EPISODE · Feb 12, 2025 · 1 MIN
Nahin Nigaah Mein | Faiz Ahmed Faiz
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
नहीं निगाह में | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सहीनहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सहीन तन में ख़ून फ़राहम न अश्क आँखों मेंनमाज़-ए-शौक़ तो वाजिब है बे-वुज़ू ही सहीकिसी तरह तो जमे बज़्म मय-कदे वालोनहीं जो बादा-ओ-साग़र तो हाव-हू ही सहीगर इंतिज़ार कठिन है तो जब तलक ऐ दिलकिसी के वादा-ए-फ़र्दा की गुफ़्तुगू ही सहीदयार-ए-ग़ैर में महरम अगर नहीं कोईतो फ़ैज़ ज़िक्र-ए-वतन अपने रू-ब-रू ही सही
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