EPISODE · Jan 12, 2024 · 2 MIN
Naye Tarah Se | Shashwat Upadhyay
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
नए तरह से लैस होकर आ गई है नई सदी | शाश्वत उपाध्याय जो दिख नहीं रही मनिहारिन,उसके चूड़ियों का बाज़ारबेड़ियों के भेंट चढ़ गया है।मोतियों की दुकान सेसीपियों ने रार ठान लिया हैनई तरह की लड़ाई लेकर आई है नई सदी।टिकुली साटती-दोपहर काटतीसारी औरतेंशिव चर्चाओं में गूंथ दी गईं हैं।शिव के गीतों में,अब छपरा-सिवान के सज्जन का ज़िक्र भी होने लगा हैनई तरह की आस्था भी लेकर आ गई है नई सदी।खेत, भूरे होकर अलसा गए हैंहवा के सहारे गोते लगाते गेहूँडर कर चीख देते हैं सरेआम।किसानी के नाम चढ़े चैत में खेत नहीं, समय काट रही बनिहारन।'आग लागो- बढ़नी बहारो, हेतना घाम'बोलने वाली गाँव भर की ठेकेदारननेपाल से आँख बनवा कर लौटी तो ज़रूरलेकिन खेत में नहीं डाले पाँव उसनेमोतियाबिंद ने आंख का पानी जगा दिया।कि नई बिमारी भी लेकर आ गई नई सदी।चहक कर पेड़ के गोदी में झूल जाने वाले बच्चे,समय से पहले बड़े हो गए ऐसा भी नहीं हैजीवन जीने को साधने के लिए सूरत से दमन तक बिछ गए हैं ज़रूर।भय यही हैकिरोटी-कपड़ा-मकान देने के लिएशराब में खप कर अगर बचेंगेतो अंत में धर्म के नाम पर चीख देंगे सरेआमजैसे पके हुए गेहूँ हों।और चीख तो एक जैसी होती हैक्या गेहूँ-क्या इंसानभले ही नई तरह से लैस होकर आई है नई सदी,नई तरह की चीख लेकर नहीं आ सकी।
What this episode covers
नए तरह से लैस होकर आ गई है नई सदी | शाश्वत उपाध्याय जो दिख नहीं रही मनिहारिन,उसके चूड़ियों का बाज़ारबेड़ियों के भेंट चढ़ गया है।मोतियों की दुकान सेसीपियों ने रार ठान लिया हैनई तरह की लड़ाई लेकर आई है नई सदी।टिकुली साटती-दोपहर काटतीसारी औरतेंशिव चर्चाओं में गूंथ दी गईं हैं।शिव के गीतों में,अब छपरा-सिवान के सज्जन का ज़िक्र भी होने लगा हैनई तरह की आस्था भी लेकर आ गई है नई सदी।खेत, भूरे होकर अलसा गए हैंहवा के सहारे गोते लगाते गेहूँडर कर चीख देते हैं सरेआम।किसानी के नाम चढ़े चैत में खेत नहीं, समय काट रही बनिहारन।'आग लागो- बढ़नी बहारो, हेतना घाम'बोलने वाली गाँव भर की ठेकेदारननेपाल से आँख बनवा कर लौटी तो ज़रूरलेकिन खेत में नहीं डाले पाँव उसनेमोतियाबिंद ने आंख का पानी जगा दिया।कि नई बिमारी भी लेकर आ गई नई सदी।चहक कर पेड़ के गोदी में झूल जाने वाले बच्चे,समय से पहले बड़े हो गए ऐसा भी नहीं हैजीवन जीने को साधने के लिए सूरत से दमन तक बिछ गए हैं ज़रूर।भय यही हैकिरोटी-कपड़ा-मकान देने के लिएशराब में खप कर अगर बचेंगेतो अंत में धर्म के नाम पर चीख देंगे सरेआमजैसे पके हुए गेहूँ हों।और चीख तो एक जैसी होती हैक्या गेहूँ-क्या इंसानभले ही नई तरह से लैस होकर आई है नई सदी,नई तरह की चीख लेकर नहीं आ सकी।
NOW PLAYING
Naye Tarah Se | Shashwat Upadhyay
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
Jun 22, 2026 ·26m
Jun 20, 2026 ·60m
Jun 19, 2026 ·25m