EPISODE · Jul 7, 2026 · 3 MIN
O Achchi Ladkiyon | Pratibha Katiyar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
ओ अच्छी लड़कियों | प्रतिभा कटियार ओ अच्छी लड़कियो,तुम मुस्कुराहटों में सहेज देती हो दुःखओढ़ लेती हो चुप्पी की चुनरजब बोलना चाहती हो दिल सेतो बाँध लेती हो बतकही की पाजेबनाचती-फिरती होअपनी ही ख़्वाहिशों परऔर भर उठती हो संतोष सेकि ख़ुश हैं लोग तुमसेओ अच्छी लड़कियो,तुम अपने ही कंधे पर ढोना जानती होअपने अरमानों की लाशतुम्हें आते हैं हुनर अपनी देह को सजाने केनिभाने आते हैं रीति-रिवाज, नियमजानती हो तुम कि तेज़ चलने वाली औरखुलकर हँसने वाली लड़कियों कोज़माना अच्छा नहीं कहतातुम जानती हो कि तुम्हारे ही अच्छे होने पर टिका हैइस समाज का अच्छा होनाओ अच्छी लड़कियो,तुम देखती हो सपने में कोई राजकुमारजो आएगा और ले जाएगा किसी महल मेंजो देगा ज़िंदगी की तमाम ख़ुशियाँसँभालोगी उसका घर परिवारउसकी ख़ुशियों पर निसार दोगी ज़िंदगीबच्चो की खिलखिलाहटों में सार्थकता होगी जीवन कीऔर चाह सुहागन मरने कीओ अच्छी लड़कियोंतुम थक नहीं गयीं क्या अच्छे होने की सलीब ढोते ढोतेसुनो, उतार दो अपने सर से अच्छे होने का बोझलहराओ न आसमान तक अपना आँचलहँसो इतनी तेज़ कि धरती का कोना-कोनाउस हँसी में भीग जाएउतार दो रस्म-ओ-रिवाज़ के ज़ेवर और मुक्त होकर देखो संस्कारों की भारी-भरकम ओढ़नी सेअपनी ख़्वाहिशों को गले से लगाकर रो लो जी भर केआँखों में समेट लो सारे ख़्वाबजो डर से देखे नहीं तुमने अब तकओ अच्छी लड़कियों,अब किसी और का नहींसँभालो सिर्फ़ अपना मानबेलगाम नाचने दो अपनी ख़्वाहिशों कोऔर फूँक मारकर उड़ा दो सीने में पलतेसदियों पुराने दुःख कोपहन के देखोलोगों की नाराज़गी का ताज एक बारऔर फोड़ दो अच्छे होने का ठीकराओ अच्छी लड़कियों!
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