EPISODE · Aug 12, 2024 · 2 MIN
O Mandir Ke Shankh, Ghantiyon | Ankit Kavyansh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
ओ मन्दिर के शंख, घण्टियों | अंकित काव्यांशओ मन्दिर के शंख, घण्टियों तुम तो बहुत पास रहते हो,सच बतलाना क्या पत्थर का ही केवल ईश्वर रहता है?मुझे मिली अधिकांशप्रार्थनाएँ चीखों सँग सीढ़ी पर ही।अनगिन बारथूकती थीं वे हम सबकी इस पीढ़ी पर ही।ओ मन्दिर के पावन दीपक तुम तो बहुत ताप सहते हो,पता लगाना क्या वह ईश्वर भी इतनी मुश्किल सहता है?भजन उपेक्षितहो भी जाएं फिर भी रोज सुने जाएंगे।लेकिन चीखेंसुनने वाला ध्यान कहाँ से हम लाएंगे?ओ मन्दिर के सुमन सुना है ईश्वर को पत्थर कहते हो!लेकिन मेरा मन जाने क्यों दुनिया को पत्थर कहता है?
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