EPISODE · Dec 24, 2024 · 2 MIN
Onth | Ashok Vajpeyi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
ओंठ | अशोक वाजपेयीतराशने में लगा होगा एक जन्मांतरपर अभी-अभी उगी पत्तियों की तरह ताज़े हैं।उन पर आयु की झीनी ओस हमेशा नम हैउसी रास्ते आती है हँसीमुस्कुराहटवहीं खिलते हैं शब्द बिना कविता बनेवहीं पर छाप खिलती है दूसरे ओठों कीवह गुनगुनाती हैसमय की अँधेरी कंदरा में बैठाकालदेवता सुनता हैवह हंसती है।बर्फ़ में ढँकी वनराशि सुगबुगाती हैवह चूमती है।सदियों की विजड़ित प्राचीनता पिघलती हैरति मेंप्रार्थना मेंस्वप्न मेंउसके ओंठ बुदबुदाते हैं...
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Onth | Ashok Vajpeyi
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