EPISODE · Oct 1, 2024 · 1 MIN
Pehra | Archana Verma
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
पहरा | अर्चना वर्मा जहां आज बर्फ़ हैबहुत पहलेवहां एक नदी थीएक चेहरा है निर्विकारजमी हुई नदी.आंख, बर्फ़ में सुराख़द्वार के भीतरहै तो एक संसार मगरकैदहलचलों पर मुस्तैदमहज़ अंधेरा हैसख़्त और ख़ूँख़ार और गहरा है.पहरा है उस पर जोबर्फं की नसों में बहानदी ने जिसे जम कर सहा
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Pehra | Archana Verma
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