EPISODE · Mar 31, 2026 · 2 MIN
Poochte Ho To Suno | Meena Kumari
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है | मीना कुमारीपूछते हो तो सुनो, कैसे बसर होती हैरात ख़ैरात की, सदक़े की सहर होती है साँस भरने को तो जीना नहीं कहते या रबदिल ही दुखता है, न अब आस्तीं तर होती है जैसे जागी हुई आँखों में, चुभें काँच के ख़्वाबरात इस तरह, दीवानों की बसर होती है ग़म ही दुश्मन है मेरा, ग़म ही को दिल ढूँढता हैएक लम्हे की जुदाई भी अगर होती है एक मर्कज़ की तलाश, एक भटकती ख़ुशबूकभी मंज़िल, कभी तम्हीदे-सफ़र होती हैदिल से अनमोल नगीने को छुपायें तो कहाँबारिशे-संग यहाँ आठ पहर होती हैकाम आते हैं न आ सकते हैं बे-जाँ अल्फ़ाज़तर्जमा दर्द की ख़ामोश नज़र होती है.
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