EPISODE · Jul 10, 2026 · 2 MIN
Prakriya | Kedarnath Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
प्रक्रिया । केदारनाथ सिंहमैं जब हवा की तरहदृश्यों के बीच से गुज़रता हुआअकेला होता हूँतो क्षण भर के लिएमुझे कहीं भी देखा जा सकता हैकिसी भी दिशा सेकिसी भी मोड़ परकिसी भी भाषा के अज्ञातशब्दकोश मेंपर मैंजब कहीं नहीं होतासिर्फ़ कहीं होने की लगातार कोशिश मेंसामने की भीड़ कोदूर से पहचानता हुआहवा के आर-पारएक प्रश्न उछालता हूँऔर हँसता हूँतो न जाने क्योंमुझे लगता हैकि गूँज-हीन शब्दों के इस घने अंधकार मेंमैं—अर्थ-परिवर्तन कीएक अबूझ प्रक्रिया हूँजिसके भीतरये लोगझाड़ियाँबत्तख़ें और भविष्यहर चीज़ एक-दूसरे मेंघुली-मिली हैजड़ें रोशनी में हैंरोशनी गंध में,गंध विचारों मेंविचार स्मृतियों में,स्मृतियाँ रंगों में...और मैं चुपचापइस संपूर्ण व्यतिक्रम कोभीतर सँभाले हुएचलते-चलतेझुककररास्ते की धूल सेएक शब्द उठाता हूँऔर पाता हूँ कि अरेगुलाब!
Embed this episode
NOW PLAYING
Prakriya | Kedarnath Singh
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.