Prarthna | Arun Kumar Singh
from Pratidin Ek Kavita Hosted by Nayi Dhara Radio
प्रार्थना। अरुण कुमार सिंह मैंने नदी से कहा कि मेरे घर चलो तो उसने एक बूँद दे दी। मैं उसे हृथेली में लेकर घर चला आया और अपने ग्लास में रखा। ग्लास कुऑँ बन गया। मैंने जंगल से कहा मेरे घर चलो तो उसने एक पत्ती दे दी। मैं उसे जेब में रखकर घर आ गया और गमले में बो दिया। अगले दिन उसमें जंगल उगाया। मैंने आसमान से कहा मेरे घर चलो तो उसने मुझसे कहा घर में खिड़की बना दो। फिर मैंने हवा से कहा मेरे घर चलो तो उसने कहा तुम्हारी साँस में रहूँगी... मैंने पृथ्वी से कहा मेरे घर चलो तो उसने मेरे गले में बाहें डाली और बोली दोस्त तुम मेरे साथ अपने घर चलो। मैं पृथ्वी के साथ घर wapas लौट आया।
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