प्रेम
from Kalam (Hindi Poetry) Hosted by Dr. Sudhanshu Kumar
आज के कविता की विषय वस्तु है प्रेम। इस जगत में प्रेम अनुभूति का विषय है किन्तु इस अनुभूति के लिए भी स्थूल हृदय आवश्यक है। प्रेम और हृदय मिलकर संसार सागर में क्या रास लीला करते हैं। शरीर को इस लीला में आनंद आता है या पीड़ा होती है। यह भी मृग मरीचिका के भ्रम जैसा है। क्या प्रेम का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है? प्रेम को व्यक्त करने का क्या कोई और माध्यम हो सकता है? इन्ही अनबूझ प्रश्नों को समेटे हुए प्रस्तुत है हमारी कविता प्रेम।
Embed this episode
No transcript yet.