EPISODE · Jun 29, 2025 · 1 MIN
Prem Ka Arthshastra | Vihaag Vaibhav
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
प्रेम का अर्थशास्त्र | विहाग वैभव जितना हो तुम्हारे पासउससे कम ही बताना सबसेख़र्च करते हुए हमेशाथोड़ा-सा बचा लेनामाँ की गुप्त पूँजी की तरहजब छाती पर समय का साँप लोटने लगेगाहर साँस में चलने लगेगी जून की लूऔर तुम्हें लगेगा किमन का आईनारेगिस्तान की गर्म हवाओं से चिटक रहा हैतब कठिन वक़्तों में काम आएगावही थोड़ा-सा बचा हुआ प्रेम।
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प्रेम का अर्थशास्त्र | विहाग वैभव जितना हो तुम्हारे पासउससे कम ही बताना सबसेख़र्च करते हुए हमेशाथोड़ा-सा बचा लेनामाँ की गुप्त पूँजी की तरहजब छाती पर समय का साँप लोटने लगेगाहर साँस में चलने लगेगी जून की लूऔर तुम्हें लगेगा किमन का आईनारेगिस्तान की गर्म हवाओं से चिटक रहा हैतब कठिन वक़्तों में काम आएगावही थोड़ा-सा बचा हुआ प्रेम।
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