EPISODE · Jun 10, 2024 · 2 MIN
Prem Karna Ya Phasna | Rupam Mishra
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
प्रेम करना या फंसना - रूपम मिश्रा हम दोनों नए-नए प्रेम में थेउसके हाथ में महँगा-सा फोन था और बाँह में औसत-सी मैंफोन में कई खूबसूरत लड़कियों की तसवीरें दिखाते हुए उसनेमुस्कुराते हुए गर्व से कहा, देख रही हो ये सब मुझपे मरती थींमैंने कहा और तुम! उसने कहा, ज़ाहिर है मैं भी प्रेम करता थामुझे भी थोड़ा रोमांच हुआमैंने हसरत और थोड़ी रूमानियत से लजाते हुए कहामेरे भी स्कूल में एक पगलेट-सा लड़का थामुझे बहुत अच्छा लगता था, हम खूब बातें करते थेतब उसने मेरी ओर हिकारत से देखकर कहांअच्छा तो तुम एक पागल से फँसी थीमैं आज तक न समझ पाई भाषा का ये व्याकरण कि एक ही संवेदना में वो कैसे प्रेम में था और मैं कैसे फँसी थी।
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Prem Karna Ya Phasna | Rupam Mishra
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