EPISODE · Apr 19, 2024 · 2 MIN
Prem Ke Liye Faansi | Anamika
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
प्रेम के लिए फाँसी | अनामिका मीरा रानी तुम तो फिर भी ख़ुशक़िस्मत थीं,तुम्हें ज़हर का प्याला जिसने भी भेजा,वह भाई तुम्हारा नहीं थाभाई भी भेज रहे हैं इन दिनोंज़हर के प्याले!कान्हा जी ज़हर से बचा भी लें,क़हर से बचाएँगे कैसे!दिल टूटने की दवामियाँ लुक़मान अली के पास भी तो नहीं होती!भाई ने जो भेजा होताप्याला ज़हर का,तुम भी मीराबाई डंके की चोट परहँसकर कैसे ज़ाहिर करतीं किसाथ तुम्हारे हुआ क्या!‘राणा जी ने भेजा विष का प्याला’कह पाना फिर भी आसान था‘भैया ने भेजा’—ये कहते हुएजीभ कटती!कि याद आते वे झूले जो उसने झुलाए थेबचपन में,स्मृतियाँ कशमकश मचातीं;ठगे से खड़े रहतेराह रोककरसामा-चकवा और बजरी-गोधन के सब गीत:‘राजा भैया चल ले अहेरिया,रानी बहिनी देली आसीस हो न,भैया के सिर सोहे पगड़ी,भौजी के सिर सेंदुर हो न…’हँसकर तुम यही सोचतीं-भैया को इस बारमेरा ही आखेट करने की सूझी?स्मृतियाँ उसके लिए क्या नहीं थीं?स्नेह, सम्पदा, धीरज-सहिष्णुताक्यों मेरे ही हिस्से आयीक्यों बाबा नेये उसके नाम नहीं लिखीं?
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