EPISODE · Sep 17, 2024 · 1 MIN
Registan Ki Raat Hai | Deepti Naval
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
रेगिस्तान की रात है / दीप्ति नवलरेगिस्तान की रात हैऔर आँधियाँ सीबनते जाते हैं निशांमिटते जाते हैं निशांदो अकेले से क़दमना कोई रहनुमांना कोई हमसफ़ररेत के सीने में दफ़्न हैंख़्वाबों की नर्म साँसेंयह घुटी-घुटी सी नर्म साँसें ख़्वाबों कीथके-थके दो क़दमों का सहारा लिएढूँढ़ती फिरती हैंसूखे हुए बयाबानों मेंशायद कहीं कोई साहिल मिल जाएरात के आख़री पहर से लिपटे इन ख़्वाबों सेइन भटकते क़दमों सेइन उखड़ती सांसों सेकोई तो कह दो!भला रेत के सीने में कहीं साहिल होते हैं।
Embed this episode
NOW PLAYING
Registan Ki Raat Hai | Deepti Naval
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.