EPISODE · Jan 6, 2026 · 2 MIN
Rotiyan | Ekta Verma
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
रोटियाँ । एकता वर्मा रोटियों की स्मृतियों में आँच की कहानियाँ गमकती हैं।अम्मा बताती हैं,सेसौरी के ईंधन पर चिपचिपाई सी फूलती हैं रोटियाँ सौंफ़ला पर सिंकी रोटियाँ धुँवाई; पकती हैं चटक-चटक नीम के ईंधन पर कसैली सी, करुवाती हैं रोटियाँपर, अरहर की जलावन पर पकती हैं भीतर-बाहर बराबर।अम्मा का मानना है, शहर रोटियों के स्वाद नहीं जानतेस्टोव की रोटियों में महकती है किरोसिन की भाप और ग़ैस पर तो पकती हैं, कचाती, बेस्वाद, बेकाम रोटियाँ।रोटियों की इन सोंधाती क़िस्सागोई के बीचों-बीचमेरे सीने पर धक्क से गिरता है एक सवाल सवाल कि -गाज़ा की रोटी कैसी महकती होगी?गाज़ा की रोटी कैसी महकती होगी,जिसे सेंक रही हैं बुर्कानशीं औरतें ध्वस्त इमारत के बीचों-बीच उन्हीं इमारतों का फ़र्नीचर जलाकर।क्या गाज़ा की रोटियों में महकता होगा खून अजवाइन की तरह बीच-बीच में कि राशन के कैंप में, रक्तरंजित लाशों बीच से खींचकर लायी जाती हैं आँटे की बोरियाँ क्या किसी कौर में किसक जाती होगी कोई चिरपरिचित ‘आह’ कि चूल्हे के ठीक नीचे, मलबे की तलहटी में दफ़्न हो गए उस परिवार के सात लोग एक ही साथ इन रोटियों को निगलते हुए गले में अटकता होगा उन किताबों का अलिफ़,गृहस्थी की सबसे व्यर्थ सामग्री की तरहजिन्हें सुहूर की दाल बनाने में चूल्हे में झोंक दिया गया क्या गाज़ा की रोटियाँ कचाती सी, तालु में चिपकती होंगी कि पूरा देश जल जाने बावजूद दुनिया देखती है फ़िलिस्तीन की तरफ़, अब भी बहुत ठंडी, सूखी आँखों से।
Embed this episode
NOW PLAYING
Rotiyan | Ekta Verma
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.