EPISODE · Jan 5, 2025 · 2 MIN
Saal Mubarak | Asheesh Pandya
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
साल मुबारक! | आशीष पण्ड्या साल मुबारक!भगवा हो या लाल, मुबारक!साल मुबारक!आज नया कल हुआ पुराना,टिक टिक करता काल मुबारक!पैसे की भूखी दुनिया को,थाल में रोटी-दाल मुबारक!चिंताओं से लदी चाँद पर,बचे खुचे कुछ बाल मुबारक!यहाँ पड़े हैं जान के लाले,वो कहते लोकपाल मुबारक!काली करतूतों की गठरी,धवल रेशमी शाल मुबारक!ग़ैरत! इज्ज़त! शर्म? निरर्थक,अब तो मोटी खाल मुबारक!आँख का पानी सूख चुका कबबना टपकती राल, मुबारक!जिस पर बैठा उसी को काटे,पल पल गिरती डाल मुबारक!शोर है अँधा, बहरा हल्ला,मंथर दिल की ताल मुबारक!सरपट दौड़े दुनिया, मुझकोअपनी फक्कड़ चाल मुबारक!साल मुबारक!भगवा हो या लाल, मुबारक!साल मुबारक!
Embed this episode
NOW PLAYING
Saal Mubarak | Asheesh Pandya
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.