EPISODE · Apr 29, 2024 · 1 MIN
Salamat Rahein | Deepika Ghildiyal
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
सलामत रहें | दीपिका घिल्डियाल सलामत रहें, सबके इंद्रधनुष,जिनके छोर चाहे कभी हाथ ना आएं, फिर भीसबके खाने के बाद, बची रहे एक रोटी,ताकि भूखी ना लौटे, दरवाज़े तक आई बिल्ली और चिड़ियासलामत रहे,माँ की आंखों की रौशनी,क्योंकि माँ ही देख पाती है, सूखे हुए आंसू और बारिश में गीले बाल सलामत रहें,बेटियों के हाथों कढ़े मेज़पोश और बहुओं के हल्दी भरे हाथों की थाप,क्योंकि उनके होने के निशान, छोटे ही सही, होने ज़रूरी हैंसलामत रहें,बच्चों की किताबों में दबे मोरपंख, इंद्रगोपताकि कहानियों पर उनका यकीन बना रहेसलामत रहें,सबकी दोपहर की नींदे,चाहे साल में एक बार मिले
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