EPISODE · May 12, 2024 · 1 MIN
Sanyog | Shahanshah Alam
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
संयोग | शहंशाह आलमयह संयोगवश नहीं हुआकि मैंने पुरानी साइकिल सेपुराने शहरों की यात्राएं कींख़ानाबदोश उम्मीदों से भरीइस यात्रा में संयोग यह थाकि तुम्हारा प्रेम साथ था मेरेतुम्हारे प्रेम नेमुझे अकेलेपन सेमुठभेड़ नहीं होने दियाएक संयोग यह भी थाकि मेरा शहर जूझ रहा थाअकेलेपन की उदासी सेतुम्हारे ही इंतज़ार मेंऔर मेरे शहर का नामतुमने खजुराहो रखा थाप्रेम की पवित्रता में बहकर।
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