EPISODE · Jan 4, 2024 · 2 MIN
Saukh | Archana Verma
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
सौख | अर्चना वर्मा झुनिया को चर्राया इज्जत को सौख बड़के मालिक की उतरन का कुरता देखने में चिक्कन बरतने में फुसफुस नाप में छोटा कंधे पर छाती पर कसताबड़ी जिद और जतन से महंगू को पहनायामुश्किल है महंगू को अब सांस लेना भीझुनिया ने महंगू की एक नहीं मानीसांस बांस रखी रहे इज्जत की ठानीएड़ी से चोटी तक अंगों पर ढांप ली चादर पुरानी जीते जी पगली ने ओढ़ लिया कफन कोठरी में घुस कर कुंडी चढ़ा लीदेहरी के पार अब झांकेगी न भूलकर कोठरी के भीतर का राजपाट देखेगीमलकिन की तरह खुद पियरांती जाएगी जाने इस इज्जत को ले के क्या पायेगीइज्जत की नापबहुत छोटी है झुनियाझरोखा न खिड़की न दिन है न दुनिया अपने कद को तो देख जरा छत से भी ऊँचा है कितना सिकोड़ेगी हाथ पांव अपने गर्दन को पैरों तक कैसे झुकाएगी, कब तक दोहराएगी सीधी सतर पीठ को, मलकिन कीहारी थकी झुकी हुई दीठ कोउठ कुण्डी खोल दे बाहर निकल आ
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