EPISODE · Dec 14, 2023 · 4 MIN
Selfi | Anamika
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
सेल्फी | अनामिका माएरी मैं तो गोविंद लीनों मौलचित्तौड़ के एक लिपे-पुते दालान में मुझे मिल गई मीरा बाई गोविंद को तौलतीं एक विराट से तराज़ू पर जो है आदमी का मन डोलता ही रहता है हमेशा और कभी एकाद पल संतुलित होकरफिर से झुक जाता है एक तरफ बेचारगी मेंमीराबाई को मगन देखकर मेरे मन में यह अचानक जगा कि मैं सेल्फ़ी लूँइधर मेरे बच्चों ने मुझे एक मोबाइल दी थी और सिखाया था मनोयोग से कि कैसे लेते हैं सेल्फ़ीलेकिन यह गुर मैंने कभी आजमाया नहीं था क्योंकि मेरे पल्ले बात ही नहीं पड़ती थी कि सेल्फ का दायरा इतना टुन्ना मुन्ना भी हो सकता हैजो एक क्लिक में समा जाएखुद फ़रीद बाबा कबीर और मीरा नेमुझको सिखाया था यही सदा कि आदमी के विराट सेल्फ में पूरा ब्रह्मांड है समाया एक साथ इसमें समाए हैं बूंद और समुद्र, पहाड़ और चींटीयह दुनिया वह दुनिया जंगल की वीथियाँसूरज चंदा यह उनचास पवन बादल-बिजली, माटी, आकाश, पानी, गगन एक क्लिक में सब समाएगा कैसेसुनी सुनाई बात भी इसको मानें अगर इतना तो आखिर देखी है न कि मेरा यह वजूद खासा छितराइन छरिया और घनचक्कर हैइतनी जल्दी वह पकड़ में नहीं आएगा मैं जन्मों से एक धुनिया हूँ धुनती ही रहती हूँ नाकमेरे वजूद की कोठरिया में दुविधाएँ फैली हैंधुनी हुई रुई की तरहनीरस, बेरंग, विपुल विस्तार धुनी हुई रूई का, यही है मेरा वजूद एक तो समाएगा नहीं एक क्लिक में फिर इसमें ऐसा क्या है आँकने लायक यही सब समझाती खुद को रही और कभी खीचीं नहीं सेल्फ़ी लेकिन उस दिन जब दिखीं मीराबाई तो मुझको सूझा मैं ले ही लूँमीराबाई के संग अपनी भी सेल्फ़ीमैं उनसे सट कर खड़ी हो गई कंधे पर मैंने झुकाया ज़रामा था पर जब दुलार से छुआ मुझको मीरा ने मैं तो बस भूल ही गई कि क्या करने मैं यहाँ आई थी सदियों के मेरी थकान मुआवज़ा माँगने आ गईऔर मैं सो ही गई उनके कंधे पर सेल्फ़ी वेल्फ़ी भूलकर
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Selfi | Anamika
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