EPISODE · Jan 13, 2026 · 2 MIN
Sochna Aur Hona | Nilesh Raghuvanshi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
सोचना और होना। नीलेश रघुवंशीबनाना चाहती थी घर पहाड़ों के ऊपरडर गई लेकिन जंगली जानवरों और हवाओं से..बहुत प्यार है पानी से सोचा क्यों न घर बनाऊं समुद्र तट परलेकिन डर गई तूफान और लहरों से..फिर सोचा कहीं एकांत में शहर के कोलाहल से दूरलेकिन बिछड़ने से पहले दोस्तों की याद ने ऐसा करने से रोकाफिर जाने कैसे बिना कोई ना नुकुर किए बन गया घरसोचती हूँ अब खिड़की से झाँकतेसंसार को त्यागने से अच्छा है माया-मोह त्यागकर संसार में रहनामेरी इस बात पर हँसता है बाज़ार खूबखिड़की भी तो है उसी के भीतरहवाओं से डरी जानवरों से डरी तूफ़ान और लहरों से भी डरीजिससे डरना चाहिए था उसी की गोद में जाकर गिरी..
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