EPISODE · Jun 20, 2020 · 15 MIN
सपनों के से दिन(कहानी एक दृष्टि में) कक्षा दसवीं की पूरक पुस्तक संचयन का दूसरा पाठ
from वैचारिक पटल · host Anita Aggarwal
सपनों के से दिन 'गुरदयाल सिंह' की आत्मकथा का एक अंश है जिसमें लेखक ने समाज के कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताया है जो शिक्षा के महत्व से पूरी तरह अनजान थे। बचपन की स्मृतियों को याद करते हुए लेखक अपने विद्यार्थी जीवन का वर्णन करते हुए बताता है कि उसके कोमल मन में एक ओर हेड मास्टर साहब के कोमल व्यवहार की अमित शाह पड़ी तो दूसरी ओर मास्टर प्रीतम चंद का कठोर चेहरा भी उन्हें हमेशा के लिए याद रह गया।
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