EPISODE · Jun 30, 2026 · 1 MIN
Stree Ki Neend | Nilesh Raghuvanshi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
स्त्री की नींद। नीलेश रघुवंशी एक छोटे से डाकखाने मेंवो स्त्री अपनी सीट पर इतनी उदास इतनी अकेलीसमय उसके आसपास नहीं होता ऊँघते और झपकियाँ लेतेएक ही गलती को दोहराती है बार-बार कंप्यूटर परकाउंटर पर ठक-ठक की आवाज़नींद और आलस से बाहर लाती है उसेवह लिफाफे की इबारत और भेजने वाले केहाथों के कंपन से होती है कोसों दूरनींद से भरी हुई इस स्त्री को देखदफ्तर के लोग पीटते हैं सिर कोसते हैं अपने बीच उसके होने कोघर और दफ्तर के कभी न खत्म होने वाले कामों के बीचस्त्री की नींद कसमसाती है
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