EPISODE · Aug 23, 2024 · 2 MIN
Surya | Naresh Saxena
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
सूर्य | नरेश सक्सेनाऊर्जा से भरे लेकिनअक्ल से लाचार, अपने भुवनभास्करइंच भर भी हिल नहीं पातेकि सुलगा दें किसी का सर्द चुल्हाठेल उढ़का हुआ दरवाजाचाय भर की ऊष्मा औ' रोशनी भर देंकिसी बीमार की अंधी कुठरिया मेंसुना सम्पाती उड़ा थाइसी जगमग ज्योति को छूने झुलस कर देह जिसकी गिरी धरती परधुआँ बन पंख जिसके उड़ गए आकाश मेंहे अपरिमित ऊर्जा के स्रोतकोई देवता हो अगर सचमुच सूर्य तुम तोक्रूर क्यों हो इस क़दरतुम्हारी यह अलौकिक विकलांगताभयभीत करती है।
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