EPISODE · Jul 11, 2024 · 1 MIN
Telephone Par Pita Ki Awaz | Nilesh Raghuvanshi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
टेलीफ़ोन पर पिता की आवाज़ - नीलेश रघुवंशी टेलीफ़ोन परथरथराती है पिता की आवाज़दिये की लौ की तरह काँपती-सी।दूर से आती हुईछिपाये बेचैनी और दुख।टेलीफ़ोन के तार से गुज़रती हुईकोसती खीझती इस आधुनिक उपकरण पर।तारों की तरह टिमटिमातीटूटती-जुड़ती-सी आवाज़।कितना सुखदपिता को सुनना टेलीफ़ोन परपहले-पहल कैसे पकड़ा होगा पिता ने टेलीफ़ोन।कड़कती बिजली-सी पिता की आवाज़कैसी सहमी-सहमी-सी टेलीफ़ोन पर।बनते-बिगड़ते बुलबुलों की तरहआवाज़ पिता की भर्राई हुईपकड़े रहे होंगेटेलीफ़ोन देर तकअपने ही बच्चों सेदूर से बातें करते पिता।
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