EPISODE · Aug 31, 2025 · 11 MIN
Tere utare hue din -Attempt 2-❤️ Gulzar Sahab
from Aawaz Meri, Baat Aapki - By Manoj · host ❤️
I attempted this for one more time today the same poetry with some graphical presentation. I hope you'd like it. It's written by Gulzar Sahab and narrated by legendary actor Nana Patekar sahab. #Podcast #Storytelling #Storyline #music #Gulzaar #poetry From online sources:तेरे उतारे हुए दिन…टंगे है लॉन में अब तकना वो पुराने हुए है ..ना उनका रंग उतराकही से कोई भी सिवन ..अभी नहीं उधड़ीइलायची के बहुत पास रखे पत्थर परज़रा सी जल्दी सरक आया करती है छाँवज़रा सा और घना हो गया है वो पौंधामैं थोडा थोडा वो गमला हटाता रहता हूँफकीरा अब भी वहीँ, मेरी कॉफ़ी देता हैगिलहरियों को बुलाकर खिलाता हूँ बिस्कुटगिलहरियाँ मुझे शक की नज़र से देखती हैवो तेरे हांथों का मस जानती होगीकभी – कभी जब उतरती है चील शाम की छत सेथकी – थकी सी …ज़रा देर लॉन में रुककरसफ़ेद और गुलाबी मसुम्बे के पोंधों में घुलने लगती हैकि जैसे बर्फ का टुकड़ा पिघलता जाये व्हिस्की मेंमैं स्कार्फ दिन का गले से उतार देता हूँतेरे उतारे हुए दिन पहन के अब भी मैंतेरी महक में कई रोज़ काट देता हूँतेरे उतारे हुए दिन …– गुलज़ार
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Tere utare hue din -Attempt 2-❤️ Gulzar Sahab
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