EPISODE · Jul 14, 2026 · 1 MIN
Tope | Viren Dangwal
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
तोप । वीरेन डंगवाल कंपनी बाग़ के मुहाने परघर रखी गई है यह 1857 की तोपइसकी होती है बड़ी सम्हाल, विरासत में मिलेकंपनी बाग़ की तरहसाल में चमकाई जाती है दो बारसुबह-शाम कंपनी बाग़ में आते हैं बहुत से सैलानीउन्हें बताती है यह तोपकि मैं बड़ी जबरउड़ा दिए थे मैंनेअच्छे-अच्छे सूरमाओं के छज्जेअपने ज़माने मेंअब तो बहरहालछोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फ़ारिग़ होतो उसके ऊपर बैठ करचिड़ियाँ ही अक्सर करती हैं गपशपकभी-कभी शैतानी में वे इसके भीतर भी घुस जाती हैंख़ास कर गौरैयेंवे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोपएक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद
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तोप । वीरेन डंगवाल कंपनी बाग़ के मुहाने परघर रखी गई है यह 1857 की तोपइसकी होती है बड़ी सम्हाल, विरासत में मिलेकंपनी बाग़ की तरहसाल में चमकाई जाती है दो बारसुबह-शाम कंपनी बाग़ में आते हैं बहुत से सैलानीउन्हें बताती है यह तोपकि मैं बड़ी जबरउड़ा दिए थे मैंनेअच्छे-अच्छे सूरमाओं के छज्जेअपने ज़माने मेंअब तो बहरहालछोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फ़ारिग़ होतो उसके ऊपर बैठ करचिड़ियाँ ही अक्सर करती हैं गपशपकभी-कभी शैतानी में वे इसके भीतर भी घुस जाती हैंख़ास कर गौरैयेंवे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोपएक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद
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