EPISODE · Aug 11, 2024 · 2 MIN
Tum Aayin | Kedarnath Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
तुम आईं | केदारनाथ सिंहतुम आईंजैसे छीमियों में धीरे- धीरेआता है रसजैसे चलते-चलते एड़ी में काँटा जाए धँसतुम दिखींजैसे कोई बच्चासुन रहा हो कहानीतुम हँसीजैसे तट पर बजता हो पानीतुम हिलींजैसे हिलती है पत्तीजैसे लालटेन के शीशे मेंकाँपती हो बत्ती।तुमने छुआजैसे धूप में धीरे धीरेउड़ता है भुआऔर अन्त मेंजैसे हवा पकाती है गेहूँ के खेतों कोतुमने मुझे पकायाऔर इस तरहजैसे दाने अलगाए जाते हैं भूसे सेतुमने मुझे खुद से अलगाया।
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