EPISODE · Jun 3, 2026 · 1 MIN
Tum Ho | Nazim Hikmat
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
तुम हो । नाज़िम हिकमतअनुवाद : सुरेश सलिलतुम्हीं मेरी ग़ुलामी हो, तुम्हीं मेरी आज़ादीगर्मियों की किसी बेलिबास रात की तरह मेरा जिस्ममेरा वतन हो तुमपन्ने जैसी हल्की हरी आँखें,हैरतअंगेज़ हो तुम, ख़ूबसूरत और ज़िंदादिलमेरी हस्रत हो तुम, मेरी पहुँच से परे हरदम।
What this episode covers
तुम हो । नाज़िम हिकमतअनुवाद : सुरेश सलिलतुम्हीं मेरी ग़ुलामी हो, तुम्हीं मेरी आज़ादीगर्मियों की किसी बेलिबास रात की तरह मेरा जिस्ममेरा वतन हो तुमपन्ने जैसी हल्की हरी आँखें,हैरतअंगेज़ हो तुम, ख़ूबसूरत और ज़िंदादिलमेरी हस्रत हो तुम, मेरी पहुँच से परे हरदम।
NOW PLAYING
Tum Ho | Nazim Hikmat
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
Jun 17, 2026 ·23m
Jun 16, 2026 ·13m
Jun 12, 2026 ·17m
Jun 11, 2026 ·10m