EPISODE · May 31, 2026 · 2 MIN
Tum Muskurana | Anurag Tiwari
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
तुम मुस्कुराना । अनुराग तिवारीचाहे जैसी स्थितियां होहालात चाहे कैसे होदुख हो, निराशा होया फिर झूठी आशा होविफलता या असफलता होया फिर घोर विकलता होसंताप, वेदना, दर्द होया थक कर हारा मर्द होजब अपनी शक्ति क्षीण लगेहम-तुम सा वीर अधीर लगेजब निश्छल प्रेम अधूरा होअपना सोचा ना पूरा होतब मानों इक बात मेरी, ना घबरानातुम मुस्कुराना मुस्कुराना मुस्कुराना।।सपने अगर अधूरे होकोशिश हो ना पूरे होंराहों में कठिनाई होया खुद से तेरी लड़ाई होदिन में भी घोर अंधेरा होहर पल रातों ने घेरा होजब सूरज का ना आस रहेखुद पर ना अब विश्वास रहेजब दुनिया ने ठुकराया होमिल सबने तुम्हें गिराया होतब मानों इक बात मेरी, ना घबरानातुम मुस्कुराना मुस्कुराना मुस्कुराना ।मुश्किल में जीवन कटता होया हर कदमों पर खांइ होअपनों गैरों में उलझन होया लंका भेदी भाई होजब रोगों का ही साया होहर ईलाज गर ज़ाया होजब गीला तन भी सूखा होपेट भरा , मन भूखा होजब बातों में ना अर्थ रहेमिलना, बतियाना व्यर्थ रहेजब फूलों की उम्मीदों मेंकांटों को तुमने पाया होतब मानों इक बात मेरी, ना घबरानातुम मुस्कुराना मुस्कुराना मुस्कुराना ।।
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