EPISODE · Jan 19, 2024 · 1 MIN
Ukti | Suryakant Tripathi 'Nirala'
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
उक्ति | सूर्यकांत त्रिपाठी निरालाकुछ न हुआ, न हो। मुझे विश्व का सुख, श्री, यदि केवल पास तुम रहो ! मेरे नभ के बादल यदि न कटे— चंद्र रह गया ढका, तिमिर रात को तिरकर यदि न अटे लेश गगन-भास का, रहेंगे अधर हँसते, पथ पर, तुम हाथ यदि गहो। बहु-रस साहित्य विपुल यदि न पढ़ा— मंद सबों ने कहा— मेरा काव्यानुमान यदि न बढ़ा— ज्ञान जहाँ का रहा, रहे, समझ है मुझमें पूरी, तुम कथा यदि कहो।
NOW PLAYING
Ukti | Suryakant Tripathi 'Nirala'
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
May 1, 2026 ·16m
Apr 29, 2026 ·46m
Apr 29, 2026 ·18m
Apr 28, 2026 ·49m