EPISODE · Jun 12, 2026 · 2 MIN
Usne Kaha | Shiv Kumar Gandhi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
उसने कहा । शिव कुमार गांधीउसने कहा मुझसे ले चलो अपने शहरजो कहोगे वही करूँगाफिर पकड़ाई चाय जो गैस केचूल्हे पर बनी थीमैंने कहा मज़ाक़ में -जगह बदल लेते हैं हमऔर फिर वैसे भी शहर ख़ुद ही तो आ रहा हैतुम तकउसने कहा वहाँ छत पर बैठना शाम मेंअच्छा लगता है रोशनियों बीच और फिर हवा तो आती ही हैएक कारख़ाने में काम करता था उसका भतीजाजिसके साथ किसी छत पर बैठा था वह एक दिनइस शहर में रोशनियों बीचऔर उस दिन भी हवा तो आई ही थीतालाब किनारे चाँद को देखता लेटा हुआशाम में मैं ख़ुद कितने दिन काट लूँगा यहाँतालाब अभी भरा है फिर ख़ाली होगाऔर फिर भरेगा और ख़ाली होगाअगली बारपता नहीं भरे कि नहींऔर मैं कहूँगा किसी से ले चलो अब तो मुझेअपने साथजो कहोगे वह कर ही लूँगा!
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