विचक्षणस्य गुरोः विलक्षणः शिष्यः episode artwork

EPISODE · Sep 15, 2026 · 3 MIN

विचक्षणस्य गुरोः विलक्षणः शिष्यः

from बालमोदिनी · host सम्भाषणसन्देशः

महाप्राज्ञः प्रज्ञाचक्षुः दण्डिवरेण्यः मधुरानगर्यां निवसति स्म । कदाचित् कश्चन युवा संन्यासी तदीयं कुटीरम् आगछत् । तस्य नाम आसीत् दयानन्दः । सरस्वतादयः ग्रन्थाः अपि पठिताः आसीत् तेन । 'यदि मम अनुशासनम् इष्यते तर्हि तान् अनार्षान् ग्रन्थान् यमुनायां प्रवाह्य अत्र आगम्यताम्' इति गुरुः अवदत् । तथैव अकरोत् सः संन्यासी । सन्तुष्टः गुरुः दयानन्दस्य पाठम् आरब्धवान् । सकृत् द्विः वा श्रुतं पाठं स्मृतिपथे स्थापयति स्म सः । सः शिष्यः एव आर्यसमाजस्य संस्थापकः दयानन्दसरस्वतीमहर्षिः ।(“केन्द्रीयसंस्कृतविश्वविद्यालयस्य अष्टादशीयोजनान्तर्गततया एतासां कथानां ध्वनिप्रक्षेपणं क्रियते”)The great blind scholar Dandi Swami lived in Mathura. One day, a young monk named Dayananda Saraswati came to him. Dayananda had already studied many books. The teacher told him that if he truly wished to become his student, he should throw those non-Vedic books into the Yamuna River and then return. Dayananda obeyed. Pleased with his dedication, the teacher began teaching him. Dayananda had an excellent memory and could remember lessons after hearing them only once or twice. This devoted student later became the founder of the Arya Samaj.

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विचक्षणस्य गुरोः विलक्षणः शिष्यः

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Shyambhai Y Thakar’s Podcast Shyambhai Thakar श्यामभाई ठाकर, यह नाम आज श्रीमद्भागवत, रामकथा, श्रीमद्भगवद्गीता और हिंदू धर्मग्रंथों की हिंदू परंपरा के विद्वान, प्रामाणिक, मधुरभाषी प्रवक्ता के रूप में भारत और विदेशों में हिंदू समुदाय में जाना जाने लगा है। भारतीय संस्कृति से लहलहाते ध्वज के गौरव विस्तारक पूज्यभाईश्री रमेशभाई ओझाजी द्वारा भारत की सनातनी संस्कृति को समर्पित श्री बाबडेश्वर संस्कृत महाविद्यालय, सांदीपनि विद्यानिकेतन, पोरबंदर में संस्कृत व्याकरण में आचार्य (M.A) तक शिक्षाप्राप्त श्यामभाई, श्रीमद्भागवत आदि को केवल प्रवचनका ही विषय न मानते हुए अपनी सहज दिनचर्या के रूप में श्रीमद्भागवत, गीता, रामचरितमानस, महाभारत और हाल के लेखकों के श्रेष्ठ साहित्य का अध्ययन करते रहते है। उनकी सत्संग यात्रा, जो 1999 से जारी है, भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, अफ्रीकी देशों में 165 से अधिक कथाओं और ग्रंथों के शतावधि मूल पारायणोंके रूप में विस्तृत हुई है और फैलती जा रही है। पूज्यभाईश्री की आज्ञा और आशीर्वाद से, कथावाचन के साथ साथ श्यामभाई सांदीपनि में, आज के छात्रों और भविष्य के कथाकारों को मूल श्रीमद्भागवत ग्रंथ का 2011 से अध्ययन कराते हैं, जो कि आज Jai Jai Hanuman Gosai Hubhopper हनुमान चालीसा की सैंतीसवी चौपाई “जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाई।।” में तुलसीदास जी कहते है "हे स्वामी हनुमानजी। आपकी जय हो, जय हो, जय हो। आप मुझ पर कृपालु श्री गुरुजी के समान कृपा कीजिए। तुलसीदास जी यहाँ केहना चाहते है की जीवन में और कोई योग्य गुरु न मिले तो हनुमान जी को गुरु और हनुमान चालीसा को ही मंत्र बना लीजिए। Pinaak Podcast - पिनाक पॉडकास्ट Vivek & Vidushi Sharma पिनाक पॉडकास्ट में आपका स्वागत है, यहां हम वैदिक ज्ञान की गहराई, पुराणों की समृद्धि और इतिहास को आकार देने वाली मनोरम कहानियों के माध्यम से यात्रा पर निकलते हैं। हमारा पॉडकास्ट प्राचीन ज्ञान को उजागर करने, पौराणिक ग्रंथों की कथाओं को डिकोड करने और ऐतिहासिक कहानियों के महत्व की खोज करने के लिए समर्पित है।हमसे जुड़ें क्योंकि हम वैदिक शिक्षाओं के सार में उतरते हैं, अतीत और वर्तमान दोनों में उनकी कालातीत प्रासंगिकता में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। सावधानीपूर्वक विश्लेषण के माध्यम से, हम पौराणिक कहानियों में निहित सांस्कृतिक विरासत और गहन संदेशों को उजागर करते हैं।इसके अतिरिक्त, हम ऐतिहासिक वृत्तांतों में जान फूंकते हैं, सबक और अंतर्दृष्टि निकालते हैं जो हमारी आधुनिक दुनिया में गूंजती रहती है। चाहे आप अनुभवी विद्वान हों या जिज्ञासु शिक्षार्थी, पिनाक पॉडकास्ट बौद्धिक रूप से प्रेरक सामग्री प्रदान करता है जो ज्ञान, कहानी कहने और इतिहास के संगम का जश्न मनाता है।पिनाक पॉडकास्ट देखें और अपने आप को प्राचीन ज्ञान, कालातीत कहानियों और मनोरम इतिहास की दुनिया में डुबो द खोड्या आणि इतर कथा Khodya aani itar Katha Voicemantra दिलीपराज प्रकाशन ने प्रकाशित केलेल्या व सांत्वना शुक्ल ने कथन केलेला हा पॉडकास्ट आहे शाळकरी मुलांच्या गोष्टींचा . हा पॉडकास्ट योगेश सोमण यांच्या खोड्या आणि इतर कथा या पुस्तकावर आधारित आहे यात खोडकर मुलांच्या गमतीदार गोष्टी आहेत .पिंट्या , झिपऱ्या ,चिन्या,रघ्या, बाप्पा, ढब्ब्या ,गुड्डी यांच्या उपदव्यापी गॅंग मधले सगळेजण दिवसभरात काही न काही खोड्या करत असतात . या कथांमधून त्यांच्या निरागस खोड्यांचे वर्णन आहे .सर्वच वयाच्या श्रोत्यांना त्या आवडतील . मुलांना करमणुकीचा तर मोठ्यांना आठवणींचा आनंद घेता येईल.

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