VO...HUSN -E- YAARA MERA
from DHADKANE MERI SUN Hosted by Dr. Rajnish Kaushik
ना अता ना पता ना खबर बड़ी मुद्दत हुई ना हुई कोई मुलाक़ात ना ही मुहब्बत हुई बड़ी बड़ी बातेँ वादे इरादे शायद भूल गया है वो ऐसी कैसी मुहब्बत में उसकी शिद्दत हुई माना के वो थोड़ा मगरूर था हुस्न ए जवानी पे अपनी...... पर बंदिश ए दुनिया में रहेगा इतना बेदम नहीं था वो हुस्न ए यारा मेरा किसी कातिलाना शबाब से कम नहीं था..... नशा इस कदर शामिल था उसकी अदाओं में कमबख्त किसी भी शराब से कम नहीं था जो लगा दे आग पानी में ...ऐसे किसी आफताब से भी कम नहीं था.... वो हुस्न ए यारा मेरा वो हुस्न ए यारा मेरा ....
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