EPISODE · Jun 4, 2026 · 2 MIN
Yah Number Maujood Nahi Hai | Manglesh Dabral
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
यह नंबर मौजूद नहीं । मंगलेश डबरालदिस नंबर डज़ नॉट एग्ज़िस्टजहाँ भी जाता हूँ जो भी फ़ोन मिलाता हूँअक्सर एक बेगानी-सी आवाज़ सुनाई देती हैदिस नंबर डज़ नॉट एग्ज़िस्ट यह नंबर मौजूद नहीं हैकुछ समय पहले इस पर मिला करते थे बहुत-से लोगकहते आ जाओ हम तुम्हें पहचानते हैंइस अंतरिक्ष में तुम्हारे लिए भी बना दी गई है एक जगहलेकिन अब वह नंबर मौजूद नहीं है वह कोई पहले का नंबर थाउन पुराने पतों पर बहुत कम लोग बचे हुए हैंजहाँ आहट पाते ही दरवाज़े खुल जाते थेअब घंटी बजाकर कुछ देर सहमे हुए बाहर खड़े रहना पड़ता हैऔर आख़िरकार जब कोई प्रकट होता हैतो मुमकिन है उसका हुलिया बदला हुआ होया वह कह दे मैं वह नहीं हूँ जिससे तुम बात करते थेयह वह नंबर नहीं है जिस पर तुम सुनाते थे अपनी तकलीफ़जहाँ भी जाता हूँ देखता हूँ बदल गए हैं नंबर नक़्शे चेहरेनाबदानों में पड़ी हुई मिलती हैं पुरानी डायरियाँउनके नाम धीरे-धीरे पानी में घुलते हुएअब दूसरे नंबर मौजूद हैं पहले से कहीं ज़्यादा तार-बेतारउन पर कुछ दूसरी तरह के वार्तालापमहज़ व्यापार महज़ लेनदेन ख़रीद-फरोख़्त की आवाज़ेंलगातार अजनबी होती हुईजहाँ भी जाता हूँ हताशा में कोई नंबर मिलाता हूँउस आवाज़ के बारे में पूछता हूँ जो कहती थीदरवाज़े खुले हुए हैं तुम यहाँ रह सकते होचले आओ थोड़ी देर के लिए यों ही कभी भी इस अंतरिक्ष में।
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यह नंबर मौजूद नहीं । मंगलेश डबरालदिस नंबर डज़ नॉट एग्ज़िस्टजहाँ भी जाता हूँ जो भी फ़ोन मिलाता हूँअक्सर एक बेगानी-सी आवाज़ सुनाई देती हैदिस नंबर डज़ नॉट एग्ज़िस्ट यह नंबर मौजूद नहीं हैकुछ समय पहले इस पर मिला करते थे बहुत-से लोगकहते आ जाओ हम तुम्हें पहचानते हैंइस अंतरिक्ष में तुम्हारे लिए भी बना दी गई है एक जगहलेकिन अब वह नंबर मौजूद नहीं है वह कोई पहले का नंबर थाउन पुराने पतों पर बहुत कम लोग बचे हुए हैंजहाँ आहट पाते ही दरवाज़े खुल जाते थेअब घंटी बजाकर कुछ देर सहमे हुए बाहर खड़े रहना पड़ता हैऔर आख़िरकार जब कोई प्रकट होता हैतो मुमकिन है उसका हुलिया बदला हुआ होया वह कह दे मैं वह नहीं हूँ जिससे तुम बात करते थेयह वह नंबर नहीं है जिस पर तुम सुनाते थे अपनी तकलीफ़जहाँ भी जाता हूँ देखता हूँ बदल गए हैं नंबर नक़्शे चेहरेनाबदानों में पड़ी हुई मिलती हैं पुरानी डायरियाँउनके नाम धीरे-धीरे पानी में घुलते हुएअब दूसरे नंबर मौजूद हैं पहले से कहीं ज़्यादा तार-बेतारउन पर कुछ दूसरी तरह के वार्तालापमहज़ व्यापार महज़ लेनदेन ख़रीद-फरोख़्त की आवाज़ेंलगातार अजनबी होती हुईजहाँ भी जाता हूँ हताशा में कोई नंबर मिलाता हूँउस आवाज़ के बारे में पूछता हूँ जो कहती थीदरवाज़े खुले हुए हैं तुम यहाँ रह सकते होचले आओ थोड़ी देर के लिए यों ही कभी भी इस अंतरिक्ष में।
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