EPISODE · Jul 31, 2024 · 1 MIN
Ye Bhari Aankhen Tumhari | Kunwar Bechain
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
ये भरी आँखें तुम्हारी | कुँअर बेचैनजागती हैं रात भर क्यों ये भरी आँखें तुम्हारी! क्या कहीं दिन में तड़पता स्वप्न देखा सुई जैसी चुभ गई क्या हस्त-रेखा बात क्या थी क्यों डरी आँखें तुम्हारी। जागती हैं रात भर क्यों, ये भरी आँखें तुम्हारी! लालसा थी क्या उजेरा देखने की चाँद के चहुँ ओर घेरा देखने की बन गईं क्यों गागरी आँखें तुम्हारी। जागती है रात भर क्यों, ये भरी आँखें तुम्हारी!
Embed this episode
What this episode covers
ये भरी आँखें तुम्हारी | कुँअर बेचैन जागती हैं रात भर क्यों ये भरी आँखें तुम्हारी! क्या कहीं दिन में तड़पता स्वप्न देखा सुई जैसी चुभ गई क्या हस्त-रेखा बात क्या थी क्यों डरी आँखें तुम्हारी। जागती हैं रात भर क्यों, ये भरी आँखें तुम्हारी! लालसा थी क्या उजेरा देखने की चाँद के चहुँ ओर घेरा देखने की बन गईं क्यों गागरी आँखें तुम्हारी। जागती है रात भर क्यों, ये भरी आँखें तुम्हारी!
NOW PLAYING
Ye Bhari Aankhen Tumhari | Kunwar Bechain
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.