EPISODE · Apr 2, 2026 · 1 MIN
Yudh Aur Titliyaan | Deepak Jaiswal
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
युद्ध और तितलियाँ । दीपक जायसवालतितलियों के दिलउनके पंखों में रहते हैंउनके पास दो दिल होते हैंलड़कियाँ उनके पंखों केप्यार में होती हैंवे उनमें भरती हैं अपना हृदयवे दुनिया कोतितलियों के पंखों के मानिंदख़ूबसूरत देखना चाहती हैं।फूलों की पंखुड़ियाँलड़कियों की आँखेंशांत नदीऔर सर्द मौसममरने नहीं देतेतितलियों को।लेकिन जब कहीं युद्ध छिड़ता हैजब किसी के हृदय को छला जाता हैजब फूल की पंखुड़ियाँसूख करगिरने लगती हैंउस क्षण तितलियाँ बूढ़ी होने लगती हैंउनके रंग पिघलने लगते हैंफिर वे लौटा देती हैं अपने पंखअपनी धरती कोयुद्ध रंगों को निगल जाते हैं।
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