EPISODE · May 22, 2025 · 1 MIN
Zooming | Ashfaq Hussain
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
ज़ूमिंग |अशफ़ाक़ हुसैनदेखूँ जो आसमाँ से तो इतनी बड़ी ज़मींइतनी बड़ी ज़मीन पे छोटा सा एक शहरछोटे से एक शहर में सड़कों का एक जालसड़कों के जाल में छुपी वीरान सी गलीवीराँ गली के मोड़ पे तन्हा सा इक शजरतन्हा शजर के साए में छोटा सा इक मकानछोटे से इक मकान में कच्ची ज़मीं का सहनकच्ची ज़मीं के सहन में खिलता हुआ गुलाबखिलते हुए गुलाब में महका हुआ बदनमहके हुए बदन में समुंदर सा एक दिलउस दिल की वुसअ'तों में कहीं खो गया हूँ मैंयूँ है कि इस ज़मीं से बड़ा हो गया हूँ मैंसहन: आँगन,शजर: पेड़, वृक्षवुसअ'तों: विस्तार
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