PODCAST · religion
दण्डी स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती
by Sadashiva Brahmendranand Saraswati
योग-वेदान्त पर दण्डी स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती जी के प्रवचन। प्रस्थानत्रयी, योगसूत्र, योगवासिष्ठ इत्यादि के अतिरिक्त श्रीरामचरित मानस, रामायण, महाभारत एवं पुराण इत्यादि की वेदान्तपरक व्याख्या।
Episodes
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एपिसोड 739. आयुर्वेद में सदाचार- अष्टांगहृदयम्, रोगानुत्पादनीय अध्याय
"मन और शरीर के स्वाभाविक वेगों को नहीं रोकना चाहिए" - इस नियम की अपवादसहित व्याख्या।
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एपिसोड 738. योगशास्त्र (अग्नि, अ.214 एवं पातञ्जल योगप्रदीप)
एपिसोड 738, योगशास्त्र, यत्पिण्डे तत्ब्रह्माण्डे (अग्निपुराण, अध्याय 214) विषय सूची - 1-नाडी़चक्र। 2-मुख्यप्राण एवं नौ अन्य प्राणों के स्थान एवं कार्य। 3-शरीर में उत्तरायण एवं दक्षिणायन। 4-शरीर में त्रिदेवों और सूर्य चन्द्र इत्यादि की स्थिति एवं दिनरात, ग्रहण इत्यादि की घटनाएं। 5-अजपा गायत्री
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एपिसोड 737. सदाचारशतकम् 13 - पूजा-व्रत इत्यादि के सामान्य नियम
एपिसोड 737. सदाचार शतकम् 13 *देवपूजन सम्बन्धी व्यतिक्रम एवं अशुद्वि इत्यादि का उपचार एवं व्रत सम्बन्धी सामान्य मार्गदर्शन* विषयसूची - 1. पूजा का लोप हो जाने पर क्या करें। 2. पूजनसामग्री के चूहा कीट इत्यादि द्वारा दूषित होने अथवा अशुद्ध मनुष्य द्वारा स्पर्श हो जाने पर क्या करें। 3. *विशेष…
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एपिसोड 736. सदाचार शतकम् 12. सोलह संस्कार
एपिसोड 736. सदाचार शतकम्- 12. षोडश संस्कार विषयसूची - 1. संस्कारों की कुल संख्या 48 या अल्प मतान्तर से 40 है जिसमें 16 प्रमुख हैं। 2. सोलह संस्कारों के नाम। 3.आरम्भ के नौ संस्कार चारों वर्णों के और स्त्री पुरुष सभी के होते हैं। किन्तु स्त्रियों और शूद्रों के मन्त्ररहित होते हैं। 4. उक्त सोलह में…
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एपिसोड 735. सदाचार शतकम् 11. बृहस्पति स्मृति।
एपिसोड 735. सदाचार शतकम्- 11. भूमिदान की महिमा और भूमिहरण का दण्ड - बृहस्पति स्मृति के विशेष उल्लेख के साथ। * सुवर्णदान गोदान और भूमिदान। * भूमिदान का फल- विशेष वर्णन। * भूमि पर अन्यायपूर्वक कब्जा करने का फल। * ब्रह्मस्व हरण का फल।
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एपिसोड 734. सदाचार शतकम् 8-10
एपिसोड 734. सदाचारशतकम् 8- 10 *नाभि से ऊपर के सभी अङ्ग पवित्र माने गये हैं, उसमें भी मुख सर्वाधिक पवित्र है। क्योंकि यही शब्दब्रह्म को प्रकट करता है और यही समस्त शरीर का पोषण करता है। *ब्राह्मण की रचना का उद्देश्य। *आचारः परमो धर्मः। *वेदोऽखिलो धर्ममूलम्। *वेद और धर्मशास्त्र का अर्थ। *नास्तिक का...
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एपिसोड 733. सदाचारशतकम् 5-7
एपिसोड 733. सदाचार शतकम् कण्डिका 5,6,7 - पाराशर 1.22-39 *वेदका कोई रचनाकार नहीं। *युगधर्म *अधर्मी का त्याग *दान का शिष्टाचार *कलियुग में अन्नगत प्राण। *ब्राह्मण के षट्कर्म।
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एपिसोड 732. वेदान्तकक्षा में स्मृतिचर्चा क्यों ?
वेदान्त की कक्षा में स्मृतिचर्चा क्यों ? *शास्त्रवचन है कि वेद और स्मृति - यह दोनों द्विजों की दो आंखें हैं। केवल एक को जानने वाला काणा है और जो एक भी नहीं जानता वह पूर्णतः अन्धा है। * वेदान्त में सभी वर्णों और सभी आश्रमियों का अधिकार है। किन्तु उसके लिये जो साधनचतुष्ट्य की शर्तें हैं, उनको पूर्ण...
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एपिसोड 732. भगवद्गीता 4.25 दैवयज्ञ और ज्ञानयज्ञ
एपिसोड 732. भगवद्गीता 4.25- देवयज्ञ और ज्ञानयज्ञ। नारायण। श्रीमद्भगवद्गीता प्रवचनश्रृंखला में अगला श्लोक है 4.25. श्लोक 25 का पूर्वार्ध योगी के लिये और उत्तरार्ध ज्ञानी (संन्यासी) के लिये है। ध्यातव्य है कि इसमें योगी शब्द का प्रयोग कर्मयोगी के लिये हुआ है। वैसे भी भगवद्गीता में सामान्यतः योगी…
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E731. सदाचार शतकम् 4. प्रत्येक वर्ण में चार वर्ण और दशविध ब्राह्मण।
एपिसोड 731. सदाचार शतकम् - कण्डिका 4 - वर्णाश्रम धर्म ही वास्तविक धर्म है। प्रत्येक वर्ण में चारों वर्ण अर्थात् 16 वर्ण हैं। 1. जन्मना और कर्मणा विवाद का सुन्दर निराकरण शिवमहापुराण में है। चारों वर्णों में चार-चार चार चार उपवर्ण हैं। विस्तृत जानकारी के लिये पूर्ववर्ती शिवमहापुराण वाली श्रृंखला…
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E730. सदाचार शतकम्, कण्डिका 1-3 परधर्म और पराई स्त्री एक समान हैं।
एपिसोड 730. सदाचार शतकम्। कण्डिका 1-3. इस सदाचार शतकम् श्रृंखला में समस्त स्मृतियों के साररूपमें उन अंशों का संकलन है जो आजके समय में भी व्यवहार्य हैं और प्रत्येक धर्मनिष्ठ व्यक्ति को उनका यथासंभव पालन करना चाहिये। विषयसूची - 1. दिन-रात का विभाजन, संवत्सर में मनुष्यों, पितरों और देवताओं के…
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एपिसोड 729. भगवद्गीता, 4.22-24
"एपिसोड 729. (*आजका स्मृतिवचन* - सर्वेषामेव दानानां विद्यादानं ततोधिकम्। पुत्रादिस्वजने दद्याद्विप्राय च न कैतवे।। सकामः स्वर्गमाप्नोति निष्कामो मोक्षमाप्नुयात्।। अत्रि, 337-38।। समस्त दानों में विद्याका दान सर्वश्रेष्ठ है। इसे पुत्रशिष्य इत्यादि स्नेहीजनों को और विप्र को देना चाहिये, कपटी को…
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एपिसोड 728. भगवद्गीता 4.21
एपिसोड 728. भगवद्गीता 4.21 नोट- श्लोक 21 से 24 विशेषतः संन्यासियों के लिये है। निराशीर्यतचित्तात्मा त्यक्त सर्वपरिग्रहः। शारीरं केवलं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।। 21।। ध्यातव्य - व्याख्या में भगवद्गीताकी शंकरानन्दी टीका और श्रीमद्भागवत ग्यारहवें स्कन्ध में भगवान् के वचन का उल्लेख करते हुये…
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एपिसोड 727. भगवद्गीता और योगवासिष्ठ के अध्ययन सम्बन्धी तुलनात्मक सुझाव
*भगवद्गीता और योगवासिष्ठ के अध्ययन सम्बन्धी तुलनात्मक सुझाव* नारायण। कभी कदाचित् हम योगवासिष्ठ महारामायण की चर्चा कर देते हैं। योगवासिष्ठ अत्यन्त गूढ़ ग्रन्थ है। वेदान्त की सम्यक् समझ हो जाने के उपरान्त ही इसको पढ़ना चाहिये। ध्यातव्य है कि इस विशाल ग्रन्थ में गुरु वसिष्ठ द्वारा भगवान् राम को दिये...
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एपिसोड 726. गीताजयन्ती विशेषांक. भगवद्गीता 5.1 से 5.9 - गीता कर्मशास्त्र है अथवा ब्रह्मविद्या?
।।गीताजयन्ती विशेषांक।। विचार विन्दु- 1. गीता कर्मशास्त्र है अथवा ब्रह्मविद्या ? 2. गीता भगवान् का भी आश्रय है - "गीताश्रयेऽहं तिष्ठामि गीता मे परमं गृहम्। गीताज्ञानमुपाश्रित्य त्रींल्लोकान्पालयाम्यहम्।।" 3.गीता में अकर्मण्य गृहस्थ और आडम्बरयुक्त संन्यासी दोनों को फटकार लगाया गया है। 4. जो…
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एपिसोड 725. सपठित एपिसोड 98. मन का स्वरूप
एपिसोड 725. सपठित एपिसोड 98 (पातञ्जल योगसूत्र 1.5 का पूरक) *विषयसूची* - *येन त्यजसि तत्त्यज का अर्थ। *मन का स्वरूप - न्यायशास्त्र के अनुसार, मन नौ द्रव्यों में से एक द्रव्य है जो सुख-दुःख इत्यादि की उपलब्धि का साधन है। वे नौ द्रव्य हैं - पृथिवी, जल, तेज, वायु ,आकाश, काल, दिक्, आत्मा और मन। इसमें…
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एपिसोड 724. भगवद्गीता 4.20
एपिसोड 724. भगवद्गीता 4.20. त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्यतृप्तो निराश्रयः। कर्मण्यभिप्रवृत्तोऽपि नैव किञ्चित् करोति सः।। विचारविन्दु - * कर्मफलासङ्ग के दो अर्थ - 1. निष्काम कर्म । 2. कर्मका फल है यह शरीर - कर्मफलरूप इस शरीर में आसक्ति को त्यागकर। *नित्यतृप्त का अर्थ। *निराश्रय का अर्थ। *श्लोक के...
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एपिसोड 723. मार्गशीर्ष माहात्म्य (स्कन्दपुराण, द्वितीय वैष्णवखण्ड)
गुरु से मन्त्र ग्रहण करने के लिये मार्गशीर्ष क्यों उत्तम है ? क्योंकि श्रीमद्भगवद्गीता, दशम अध्याय में स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण ने इसे सर्वोत्तम मास कहते हुये कहा है कि मासोंमें मैं मार्गशीर्ष हूँ - "*मासानां मार्गशीर्षोऽहं* ऋतूनां कुसुमाकरः"।। श्रीकृष्ण जगद्गुरु हैं- "कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।" वह...
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Episode 722 श्रीभागवतसुधा 14 सूतजी जाति से सूत नहीं, ब्राह्मण थे
एपिसोड 722. भागवतसुधा 14. पुराणप्रवक्ता सूतजी जाति से सूत नहीं, ब्राह्मण थे। (साभार, श्रीभागवतसुधा, धर्मसम्राट करपात्रीजी और पुराणविमर्श, आचार्य बलदेव उपाध्याय) *सूत दो प्रकार के। एक - क्षत्रिय पुरुष से ब्राह्मणी स्त्री में उत्पन्न संतान जिनको धर्मशास्त्र के अनुसार सूत कहा जाता है, और दूसरे-...
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एपिसोड 721, भागवतसुधा 13 समुद्रमंथन कथा भाग 2
एपिसोड 721. भागवतसुधा 13. विषयसूची - 1. वाल्मीकीय रामायण से विरोधाभास का निराकरण। श्रीमद्भागवत के अनुसार वारुणी को भगवान् की अनुमति से दैत्यों ने ग्रहण किया। 3. श्लोक संख्या 8/8/8 जिसको विगत अष्टमी (संवत्सर के आठवें मास की अष्टमी तिथि - गोपाष्टमी को सत्संग समूहमें बताये थे।) 3. अमृतपान के लिये...
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एपिसोड 720,भागवतसुधा 12- समुद्रमंथन
एपिसोड 720. भागवतसुधा 12 - विषयसूची - 1.वैकुण्ठ के दो अर्थ - वेदान्ती और पौराणिक ? 2. वैकुण्ठनामक अवतार और वैकुण्ठधाम की रचना - पांचवें मन्वन्तर में हुयी। 3. *कच्छप अवतार और समुद्रमंथन की कथा* - 4. श्रीमद्भागवत के अनुसार समुद्रमंथन से प्रकट होने वाले 10 रत्नों की उत्पत्ति का क्रम - विष, कामधेनु,...
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एपिसोड 719. श्रीभागवतसुधा 11. गजेन्द्रमोक्ष
एपिसोड 719. भागवतसुधा 11. *गजेन्द्रमोक्ष कथा* विचारविन्दु - 1. यह कथा चौथे मन्वन्तर की है। कुल चौदह मन्वन्तर होते हैं। वर्तमान मे 7वां मन्वन्तर अर्थात् वैवस्वत मन्वन्तर चल रहा है. इस से पूर्व 6 मन्वन्तर- स्वायम्भुव, स्वारोचिष, औत्तमि, तामस, रैवत, चाक्षुष बीत चुके है और आगे सावर्णि आदि 7 मन्वन्तर...
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एपिसोड 718. भागवतसुधा 10. गृहस्थों का मोक्षमार्ग 5
एपिसोड 718. भागवतसुधा 10. गृहस्थों का मोक्षमार्ग 5. विषयसूची - 1. *भजनक्रिया* आदौ श्रद्धा ततः साधुसंगोऽथ भजक्रिया। ततोऽनर्थ निवृत्तिः स्यात्ततो निष्ठा रुचिस्ततः।। अथासक्तिस्ततो भावस्ततः प्रेमाभ्युदञ्चति। साधकानामयं प्रेम्णः प्रादुर्भावे भवेत्क्रमः।। धन्यस्यायं नवः प्रेमा यस्योन्मीलति चेतसि।...
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एपिसोड 717 भागवतसुधा(9),गृहस्थों का मोक्षमार्ग(4)
एपिसोड 717. भागवतसुधा 9. गृहस्थों का मोक्षमार्ग 4. *विषयसूची* - *अद्वैत के प्रकार - आत्माका त्रिविध अद्वैत - *भावाद्वैत , क्रियाद्वैत और द्रव्याद्वैत*। (ध्यातव्य - यहां आत्मा के त्रिविध अद्वैत की चर्चा है। दर्शनशास्त्र की शाखाओं - अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, केवलाद्वैत, द्वैताद्वैत , शुद्धाद्वैत की...
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एपिसोड 716. भागवतसुधा 8. गृहस्थों का मोक्षमार्ग - 3
एपिसोड 716. भागवतसुधा 8. गृहस्थों का मोक्षमार्ग 3 *सारांश* - *जिनकी इन्द्रियां वश में नहीं और जो लोभी हैं , उनके श्रौत स्मार्त कर्म भी कल्याणकारी नहीं होते, प्रत्युत विपरीत फल देते हैं और बन्धनकारी होते हैं। *उक्त योग्यताओं को प्राप्त कर आसक्ति और परिग्रह त्यागकर संन्यास की ओर बढे़। *मन के…
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एपिसोड 715.भागवतसुधा 7 - गृहस्थों का मोक्षमार्ग 2
एपिसोड 715. भागवतसुधा 7. गृहस्थोंका मोक्षमार्ग :- विषयसूची- *देवकार्य में दो और पितृकार्यमें तीन ब्राह्मणों को भोजन करायें, इससे अधिक नहीं (भाग.7.15.3-4, मनु 3.125-126)। *अतिथि का सत्कार न होने पर वह सारा पुण्य ले लेता है (मनु 3.100)। यदि दरिद्रता के कारण नित्य अतिथिसत्कार में असमर्थ हों तो...
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एपिसोड 614. भागवतसुधा 6. गृहस्थ भी सदाचार के मार्गसे होकर मोक्ष तक पहुँच सकता है।
गृहस्थों का सदाचार और मोक्षधर्म - विषयसूची - *सभी कर्मों को वासुदेव के प्रति समर्पित करते हुये करें। *जितना आवश्यक हो उतना ही घर और शरीर की सेवा करें। *मनुष्यों का अधिकार केवल उतने धन पर है जितने से भूख मिट जाय। *सम्पत्ति में से सन्तों और निर्बलों का भाग निकालने के उपरान्त अपने उपयोग में लायें।...
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एपिसोड 713. श्रीभागवतसुधा 5. उदयनाचार्य और बौद्ध भिक्षु की दिव्यपरीक्षा।
1. उदयनाचार्य का दृष्टान्त। बौद्ध भिक्षु से शास्त्रार्थ । बौद्ध द्वारा पत्थर को जल तथा उदयनाचार्य द्वारा जल को पत्थर बनाना - दिव्य परीक्षा में ताड़ के पेंड़ से कूदने पर वेद की दुहाई देने से उदयनाचार्य का जीवित रहना और वेद को अस्वीकार करने से बौद्ध का मर जाना। 2. *न्यायशास्त्र में आस्तिकता* -...
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E 712. श्रीभागवतसुधा 4 क्या नास्तिक का भी उद्धार सम्भव है?
एपिसोड 712. श्रीभागवतसुधा 4 क्या नास्तिकों का भी उद्धार सम्भव है ? 1. नास्तिक किसे कहते हैं*? "नास्तिको वेदनिन्दकः"। "श्रुतिस्तु वेदो विज्ञेयो धर्मशास्त्रं तु वै स्मृति।" ते सर्वार्थेष्वमीमास्ये ताभ्यां धर्मो हि निर्बभौ।। योऽवमन्येत ते मूले हेतुशास्त्राश्रयाद्विजः। स साधुभिर्बहिष्कार्यो नास्तिको...
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एपिसोड 711. श्रीभागवतसुधा 3
एपिसोड 711. श्रीभागवतसुधा 3 (*ध्यातव्य* - इस समूह में हम एक क्रम से किसी ग्रन्थ की व्याख्या करते हैं। किन्तु श्रीभागवतसुधा श्रृंखला में श्रीमद्भागवत के श्लोकों का क्रम मिलाने के लिये श्रम न करें। यह श्रृंखला मुख्यतः प्रातःस्मरणीय धर्मसम्राट स्वामी करपात्रीजी महाराज के प्रवचनों के संकलन भागवतसुधा...
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एपीसोड 710. श्रीभागवतसुधा 2
एपिसोड 710. भागवतसुधा 2 *कलियुग में भक्ति का स्वरूप - कानों में हरिकथा, मुखमें हरिनाम, हृदयमें हरिका रूप। *कलियुग में बाह्यपूजा की अपेक्षा मानसिक पूजा का अधिक महत्व है - "कृष्णसेवा सदा कार्या मानसी सा परा मता।" *कायिक और वाचिक सेवा की भी परिणति मानसी सेवा में ही होती है। बाह्य पूजा का उद्देश्य है…
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एपिसोड 709. भागवत सुधा -1
*निगमकल्पतरोर्गलितं फलम् का अर्थ। *पिबत भागवतं रसमालयं में आलयम् का अर्थ। *शुक उसी फल में चोंच मारता है जो सबसे अधिक मीठा हो। *भागवतकथा देवताओं के लिये दुर्लभ है।
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एपिसोड 708. राधासुधा- भक्ति किसे कहते हैं?
1. भक्ति क्या है? राधासुधा में करपात्रीजी महाराज भक्तिरसायन उद्धृत करते हुये कहते हैं - "द्रुतस्य भगवद्धर्माद् धारावाहिकतां गता। सर्वेषे मनसो वृत्तिर्भक्तिरित्यभिधीयते।।" श्रीमद्भागवत में भगवान् स्वयं कहते है- मद्गुण श्रुतिमात्रेण मयि सर्वं गुहाशये। मनोगतिरविच्छिन्ना यथागङ्गाम्भसोऽम्बुधौ।।…
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एपिसोड 707.श्रीमाता की उपासनाके तीन मार्ग - ज्ञानयोग क्रियायोग भक्तियोग। उमासंहिता, 51.6-12.
*ज्ञानयोग, क्रियायोग और भक्तियोग की परिभाषा एवं उपासना का क्रम। *भगवती की उपासना में प्रत्येक मास के शुक्लपक्ष की तृतीया का विशेष महत्व ।
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एपिसोड 706. श्रीदुर्गा सप्तशती अ. 11 एवं शिवमहापुराण,उमासंहिता, अ. 50 - दुर्गा शाकम्भरी।
श्रीदुर्गा सप्तशती अध्याय 11, श्लोक 40-55 एवं शिवमहापुराण, उमासंहिता, अध्याय 50। * "दुर्गा" नाम कब और कैसे पडा़ ? दुर्गा अ़वतार को ही शाकम्भरी और शताक्षी भी कहते हैं। * कुपुत्रो जायेत् क्वचिदपि कुमाता न भवति। बच्चे भले ही माता को भूल जायें, माता बच्चों को नहीं भूलती। बच्चों के द्वारा स्मरण करने…
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E 705. गुरुगीता- गुरुसेवा
सद्गुरुसुश्रूषा श्रीमद्भागवत में कहा है - योगी-संन्यासी का वास्तविक नियम और स्वभाव जानने का प्रयास करना उसी प्रकार असम्भव है जैसे आकाश में किसी पक्षी का पदचिह्न खोजना। फिर ऐसे गुरु की सेवा कैसे करें ? वैसे भी सेवाधर्म अत्यन्त कठिन है। भरतजी ने कहा - सबतें सेवक धरमु कठोरा। उसमें भी सद्गुरुसेवा ।...
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एपिसोड 704. शिवपञ्चाक्षर मन्त्रप्रयोगके गूढ़ रहस्य
*शिवपञ्चाक्षर मन्त्र* * विना दीक्षा लिये कोई मन्त्र जपने से विपरीत फल और नरक मिलता है। केवल शिवपंचाक्षर एक ऐसा मन्त्र है जिसका जप विना दीक्षा लिये भी कर सकते हैं। किन्तु दीक्षा लेकर जप करें तो कोटि-कोटि गुणा अधिक फलदाई होता है। * साक्षात् शिव ने अपने पांचों मुखों से क्रमशः पञ्चाक्षर मन्त्र के एक…
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एपिसोड 703. कल्पभेदसे ब्रह्मा विष्णु रुद्र की एक दूसरे से उत्पत्ति एवं शिवकी स्थाणुता का रहस्य।
कल्प भेद से कभी विष्णुसे ब्रह्मा और ब्रह्मासे रुद्र की उत्पत्ति होती है, कभी ब्रह्मासे विष्णु और विष्णु से रुद्रकी, कभी रुद्र से आरम्भ होकर यह यह क्रम चलता है। एक कल्प में ब्रह्माजी ने भगवान् रुद्र से सृष्टिरचना करने की प्रार्थना किया। रुद्र ने अपने ही समान अमर रुद्रों की रचना कर डाला। तब…
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एपिसोड 702. वेद,वेदाङ्ग(षड्शास्त्र), षड्दर्शन,चतुर्दश विद्या,अष्टादश विद्या और इतिहास
वेद,वेदाङ्ग(षड्शास्त्र), षड्दर्शन,चतुर्दश विद्या,अष्टादश विद्या और इतिहास :- 1. वेद - ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। 2. वेदाङ्ग - शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष - यह छः वेदाङ्ग कहे गये हैं। इन्हीको छः शास्त्र भी कहते हैं। 3. चतुर्दश विद्या - चार वेद + छः शास्त्र + मीमांसा…
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एपिसोड 701. श्रावणपूर्णिमा विशेषांक - पञ्चार जगच्चक्र और सदाशिव का व्यूहचतुष्ट्य
एपिसोड 701. श्रावणपूर्णिमा विशेषांक - पंचार जगच्चक्र और सदाशिव से महेश्वरादि व्यूहचतुष्ट्य की उत्पत्ति। शिवमहापुराण के अनुसार, 1. सदाशिव समष्टिरूप हैं। महेश्वर, रुद्र, विष्णु और ब्रह्मा यह चारों सदाशिवके व्यष्टिरूप हैं। सदाशिव आकाशतत्व के अधिपति हैं। 2. सदाशिव के हजारवें भाग से महेश्वरकी उत्पत्ति...
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एपिसोड 700. प्रणवमीमांसा - पातञ्जल योगसूत्र एवं श्रीशिव महापुराण।
।।तस्य वाचकः प्रणवः।। तज्जपस्तदर्थभावनम्।। * प्रणव के अर्थ को जान लेना ही शिवको जानना है। *प्रणव ही ब्रह्मा से लेकर तृणपर्यंत समस्त प्राणियों का प्राण है, इसीलिये इसको प्रणव कहते हैं। * प्रणव शिव का निवास भी है और प्रणव ही स्वयं शिव भी है। * शंकरजी काशी में देह छोड़ने वाले जीव को इसी प्रणव का…
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एपिसोड 699. भगवद्गीता भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करती है।
भगवद्गीता भौतिक उन्नति में कदापि बाधक नहीं है। यह तो भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करती है। इसका प्रमाण है स्वयं भगवान् का वचन - "योगक्षेमं वहाम्यहम्" , "गीताज्ञानमुपाश्रित्य त्रींल्लोकान्पालयाम्यहम्" ...इत्यादि।
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एपिसोड 698. रामेश्वर एवं घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव
नारायण। "सेतुबन्धे तु राशं घुश्मेशं च शिवालये।" रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य और श्रीराम द्वारा स्थापना की कथा सर्वविदित ही है। अतः उसका अति संक्षेप में वर्णन करते हुये इस एपिसोड में घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य और नामकरण का रहस्य बताया गया है। घुश्मा नामक ब्राह्मणी की भक्ति से प्रसन्न...
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एपिसोड 697. भगवद्गीता, करपात्र विशेषांक 3. वेदान्त और कर्मयोग
*जो यह समझते हैं कि वेदान्त कर्मकी उपेक्षा करता है अतः भौतिक उन्नति में बाधक है, वे वस्तुतः वेदान्त समझते ही नहीं अथवा प्रमादी हैं। वेदान्तकी ओट में प्रमाद ठीक नहीं।* *जितने प्रकार के ज्ञान हैं, सबका यही उद्देश्य है कि दुःख मिटे और सुख प्राप्त हो*। *किसको किस वस्तु से सुख मिलता है, उस सुख में…
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एपिसोड 695. भगवद्गीता, करपात्र विशेषांक 2. नामस्मरणके साथ शास्त्रविहित कर्म भी करो।
एपिसोड 695. श्रीमद्भगवद्गीता, करपात्र विशेषांक 2. *जो स्वकर्म को छोड़कर केवल भगवन्नाम का जप करता है वह भगवान् का ही द्रोही है।* *अपहाय निजं कर्म कृष्ण कृष्णेति वादिनः। ते हरेर्द्वेषिणः पापाः धर्मार्थं जन्म च हरेः।।* *जब भगवान् स्वयं भी धर्मकी रक्षा के लिये अवतार ग्रहण करते हैं तब मनुष्यको तो...
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एपिसोड 693.भगवद्गीता करपात्र जयन्ती विशेषांक 1. - क्या वेदान्त अकर्मण्य बनाता है?
प्रातःस्मरणीय करपात्र स्वामीजी महाराज के प्रवचनों के संकलन गीतासुधा के प्रथम खण्ड अध्याय 23 पर आधारित व्याख्यान। अन्य सहायक ग्रन्थों - शङ्करानन्दी गीतातात्पर्यबोधिनी, गीताशाङ्करभाष्य आनन्दगिरि टीका, मधुसूदन सरस्वतीकृत गीतागूढार्थ दीपिका तथा उडि़या बाबाकृत गीतातत्वालोक इत्यादि के आलोक में सम्पादित।
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एपिसोड 687. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिङ्ग की उत्पत्ति
एपिसोड 687. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति। द्वादश ज्योतिर्लिंगों की गणना में सोमनाथ का प्रथम और मल्लिकार्जुन का दूसरा स्थान है। *नाम का अर्थ - मल्लिका पार्वतीजी का नाम है और अर्जुन = शिवजी का। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग इन्ही दोनों का समन्वित रूप है । *उत्पत्ति - पृथिवीकी परिक्रमा करने की...
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एपिसोड 686. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति।
*सोम= चन्द्रमा। सोमनाथ = चन्द्रमा के स्वामी, चन्द्रमा द्वारा विशेषरूप से पूजित। * चन्द्रमा अपने श्वसुर दक्षके शाप से क्षयरोग से ग्रस्त हो गये। तब देवताओं की प्रार्थना पर ब्रह्माजी ने उपाय बताया कि प्रभास तीर्थ में शिवजी की आराधना करो। चन्द्रमाने छः मास तक मृत्युञ्जय मन्त्र का जप करते हुये शिवजी…
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एपिसोड 685. शिवमहापुराण, काशी विश्वेश्वर। काशी,प्रयाग एवं अयोध्या के प्रसिद्ध शिवलिंग। काशीमाहात्म्य
। *काशीमें अविमुक्त, तिलभाण्डेश्वर इत्यादि शिवलिंग। *प्रयागमें दशाश्वमेध तीर्थ में ब्रह्मेश्वर नामक शिवलिंग ,सोमतीर्थ में सोमेश्वर नामक शिवलिंग। * अयोध्या में नागेश्वर महादेव। * काशी नगरी का अवतरण। *परब्रह्म परमात्मा का स्त्री-पुरुष दो भागों में विभक्त होना। *काशी विश्वेश्वर का प्राकट्य और...
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एपिसोड 684. श्रावण विशेषांक। कोटिरुद्र संहिता, द्वादश ज्योतिर्लिंग
*द्वादश ज्योतिर्लिंग । *द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नित्यस्मरण का फल ः- सकाम करने से कामनापूर्ति और निष्काम करने से जन्म-मरण मुक्ति। * शिवलिंग पर चढा़या गया नैवेद्य प्रसाद ग्राह्य है। यह पापनाशक है। इसमें शंका नहीं करनी चाहिये (चण्डाधिकार इत्यादि अपवाद की चर्चा अलग एपिसोड में की गयी है)। * किसी भी…
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ABOUT THIS SHOW
योग-वेदान्त पर दण्डी स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती जी के प्रवचन। प्रस्थानत्रयी, योगसूत्र, योगवासिष्ठ इत्यादि के अतिरिक्त श्रीरामचरित मानस, रामायण, महाभारत एवं पुराण इत्यादि की वेदान्तपरक व्याख्या।
HOSTED BY
Sadashiva Brahmendranand Saraswati
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