PODCAST · religion
51 Shaktipeeth with Nishtha
by HT Smartcast Originals
आदि शक्ति स्वरूपा शिव की अर्धांगिनी बनी माता सती के शव के 51 भाग ही 51 शक्तिपीठ कहलाएं। सतयुग में जब ब्रह्म देव के पुत्र दक्ष ने द्वेष और घृणा भाव में पुत्री सती और दामाद महादेव को अपमानित किया, जिस कारण माता सती ने अपनी योग अग्नि से स्वयं को भस्म किया। इस पॉडकास्ट सीरीज में हम जानेंगे महादेव और सती की प्रेम कहानी। साथ ही जानेंगे मानव कल्याण के लिए बने ये शक्तिपीठ कहाँ पर स्थित है और उनकी मान्यताएं क्या है।निष्ठा सारस्वत द्वारा रिटेन, रिसरजड एंड होस्टेड पॉडकास्ट में महादेव की आवाज़ RJ रघु रफ़्तार ने, विष्णु की आवाज़ विपिन सिंह ने, दक्ष की आवाज़ RJ शरत ने, सती/आदिशक्ति की आवाज़ दीक्षा चौरसिया ने, ब्रह्मा की आवाज़ आशीष भुसाल ने और प्रसूति की आवाज़ ज्योति तिवारी ने दी है। ये सीरीज जानकारी के लिए आपसी कही-सुनी मान्यताओं पर बनाई गयी है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी विवाद के हम उत्तरदाई नहीं है।Podcast thumbnail art credits - @devipratyakshaa
Episodes
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विंध्यवासिनी शक्तिपीठ - मिर्जापुर, उत्तरप्रदेश
51 शक्तिपीठों की ये यात्रा आप सबके साथ बहुत ही सुंदर रही, इस पॉडकास्ट के अंतिम एपिसोड में हम चल रहे हैं माता के अंतिम धाम क्योंकि इस स्थान का न कोई आदि है न अंत है. वो अनंता यहां अनंत तक के अपने पूर्ण वास में है. उत्तर प्रदेश की राजधानी से 286 km और लगभग 6 घंटे की दूरी पर और प्रयागराज से 83 km…
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यशोर- यशोरेश्वरी शक्तिपीठ - ईश्वरीपुर, बांग्लादेश
माता सती का यशोरेश्वरी शक्तिपीठ का अर्थ है जैसोर की देवी, पहले ये पूरा स्थान जैसोर के नाम से ही जाना जाता था, किंतु अब एक जिले तक सिमट कर रह गया है. यहां के स्थानीय हिंदू लोगों की ये कुल देवी है. यहां की शक्ति है मां यशोरेश्वरि और भैरव को चंद्र के नाम से पूजा जाता है. मान्यता है की इस स्थान पर…
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कुंजापुरी देवी शक्तिपीठ - देहरादून, उत्तराखंड
देव भूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से 55 km और लगभग 1 घंटा 15 min की दूरी पर एक पहाड़ की चोटी पर 1676 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है मां कुंजापुरी देवी शक्तिपीठ जहां माता के (वक्ष) कुंजभाग का निपात हुआ था. यहां की शक्ति है मां कुंजा और शिव यानी भैरव को भैरवनाथ कहते है. यह स्थल अपनी अनुपम सिद्ध...
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वैष्णों देवी शक्तिपीठ - कटरा, जम्मू
सभी शक्तिपीठों में वैष्णों देवी शक्तिपीठ की सबसे अधिक महिमा है क्यूंकि यहाँ माँ महालक्ष्मी, माँ महाकाली, माँ महासरस्वती के तीनों रूप तीन पिण्डियों के रूप में साक्षात् विराजमान है. इनकी सम्मलित शक्ति को ही वैष्णों देवी कहा गया है. जम्मू से कुछ दूर कटरा की त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है वैष्णों देवी...
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कंकाली ताला मंदिर | देवगर्भा शक्तिपीठ - कंचन नगर, पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में शांतिनिकेतन के पास ही बोलपुर में कोपाई नदी के किनारे स्थित है माता का कांची देवगर्भा कंकालिता शक्तिपीठ, माना जाता है कि भगवान शिव के तांडव के समय माता सती के शरीर का कंकाल यहां आकर गिरा, इतने शक्तिशाली प्रभाव के कारण यहां की धरती दब गई, पानी भर गया और एक कुंड का निर्माण हुआ. ये...
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माया देवी शक्तिपीठ - हरिद्वार, उत्तराखंड
गरुड़ पुराण में इस सृष्टि की 7 मोक्षदायीनी पवित्र नगरियां यानी पुरियां हैं. अयोध्या, मथुरा, माया यानी हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम, अवंतिका यानी उज्जैन, द्वारिकापुरी है. इस एपिसोड में चलेंगें प्रजापति दक्ष की राजधानी मायापुरी जो आज का हरिद्वार है. माया देवी शक्तिपीठ जहां देवी सती के हृदय का एक भाग…
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जयंती जयंता शक्तिपीठ | श्री नर्तियांग दुर्गा मंदिर - जयंतिया पहाड़ी, मेघालय
मेघालय की राजधानी शिलांग से लगभग 2 घंटे या 62 km ki दूरी पर जयंतियां हिल्स में स्थित है माता का अत्यंत सुंदर धार्मिक आभा से प्रकाशित जयतेश्वरी शक्तिपीठ जिसे जयंती शक्तिपीठ और नर्तियांग दुर्गा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. शक्तिपीठ मंदिर के पास तीन गुफाएं है जिनमें क्रमशः ब्रह्मा विष्णु और भैरव...
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त्रिपुरासुन्दरी | त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ - उदयपुर, त्रिपुरा
10 महाविद्याओं में चौथी महाविद्या है मां त्रिपुरसुंदरी, जिन्हें ललिता देवी भी कहा जाता है, इनका स्वरूप 16 वर्ष की कन्या का है जो 16 कलाओं से युक्त है, इसलिए इन्हें षोडशी भी कहते है माँ के अनेकों नाम है ललिता, माहेश्वरी, शक्ति, राजराजेश्वरी। महाविद्याओं में से सबसे मनोहर रूप में पूजी जाने वाली…
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विमला शक्तिपीठ - जगन्नाथ पुरी, उड़ीसा
उड़ीसा के पूरी मंदिर में जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की स्थापना से भी युगों पहले सतयुग से स्थित है माता सती का विमला शक्तिपीठ. जहां देवी मां के उत्कल क्षेत्र यानी नाभी का निपात हुआ था. यहां की शक्ति है महादेवी और भैरव को जगन्नाथ कहते हैं. क्या आप जानते है की भगवान विष्णु मां आदिशक्ति को अपनी बहन...
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कालिका शक्तिपीठ - कालीघाट, कोलकाता
कालीका शक्तिपीठ में देवी आदिशक्ति काली रूप में साक्षात विराजती है। मां काली दस महाविद्याओं में से एक है। कहते हैं की इस स्थान पर देवी सती के दाहिने पैरो की उंगलियां स्थापित हैं। यहां की शक्ति है मां कालिका और शिव यानी भैरव यहां नकुलीश के नाम से रहते है। तांत्रिक विद्या साधना में काली मां को विशेष...
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गुह्येश्वरी शक्तिपीठ - काठमांडू, नेपाल
हर साल नवरात्रि में गुह्येश्वरी शक्तिपीठ में मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें भारत, भूटान सहित कई देशों से श्रद्धालु दर्शन करने आते है।यहां नवरात्र के साथ 10 दिवसीय दशैन उत्सव भी मनाया जाता है। इसमें माता की भव्य सवारी पालकी पर निकलती है. इस जगह पर भगवती सती के शरीर के दोनों घुटनों का निपात हुआ।...
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देवीपाटन शक्तिपीठ | देवी पातालेश्वरी - पटना, बिहार
इस एपिसोड में होस्ट निष्ठा सारस्वत आपको लेकर चल रही हैं, उस पावन धरती पर जहां माता सीता माता धरती की गोद में समा गई थी। ये स्थान माता सती का ही शक्तिपीठ है जिसे माता सती के बाए कंधे और वस्त्र का निपात होने से देवी पाटन और देवी सीता के पताल लोक सामने से पातालेश्वरी कहा जाता है। जानिए माता सीता और...
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इंद्राक्षी शक्तिपीठ | नागापुष्णी अम्मा - जाफना, श्रीलंका
भारत से बाहर होकर भी अपनी भव्यता इतिहास महत्ता के लिए प्रसिद्ध है इंद्राक्षी मंदिर। देवी आदिशक्ति जो स्वयं प्रकृति है, जो सुंदरता की परिभाषा है, जिनसे सोलह श्रृंगार की कला समस्त स्त्रियों ने सीखी, उन्ही मां आदिशक्ति सती के नुपुर अर्थात घुंघरू श्रीलंका के जाफना में आकर गिरे और इसी स्थान पर...
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विराट अंबिका शक्तिपीठ - भरतपुर, जयपुर
अंबिका देवी विराट शक्तिपीठ सतयुग में देवी सती के बाए पैरो की उंगलियों का निपात हुआ था। यहां की शक्ति है मां अंबिका और भगवान शिव यहां भैरव अमृत के रूप में रहते है. इस मंदिर की मान्यता है की, महाभारत काल में जुए के खेल में कौरवों ने पांडवों को छल से हरा दिया। इसके चलते उन्हें 12 साल के वनवास और एक...
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ताराचंडी शक्तिपीठ - सासाराम, बिहार
इस एपिसोड में हम जानेंगे कि नारायण ने किस जगह पर भस्मासुर का वध किया था और श्रीराम और भ्राता लक्ष्मण ने कैसे विद्या प्राप्त की और ताड़का का वध किया। हम आपको ले जाएंगे बिहार राज्य के रोहतास जिले के शहर सासाराम में, जहां ताराचण्डी शक्तिपीठ स्थित है। यह स्थान अपने प्राचीनतम और चमत्कारी इतिहास के लिए...
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श्री चंद्रभागा शक्तिपीठ | प्रभास शक्तिपीठ - प्रभास पाटन, गुजरात
भगवान श्रीकृष्ण ने अपना शरीर प्रभास चंद्रभागा शक्तिपीठ में त्यागा था। यह एक बहुत ही पवित्र और महिमामयी जगह है जहां श्रद्धालुओं को अपने पिछले पापों से मुक्ति मिलती है और उन्हें भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंदिर में मां काली की विग्रह और शिवलिंग के दर्शन होते हैं और इस मंदिर की ओर जाने वाला...
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आरासुरी अम्बाजी शक्तिपीठ - जूनागढ़, गुजरात
गुजरात के राजधानी गांधीनगर से 147 किलोमीटर और 3 घंटे की दूरी पर पर्वत की चोटी पर स्थित है अंबाजी शक्तिपीठ। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां माता के हृदय के एक भाग का निपात हुआ था। इस मंदिर में शक्ति को ‘कुमारी’ के रूप पूजा जाता है और शिव को ‘कालभैरव’ के रूप में पूजा जाता है। गुजरात में माता के…
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कालमाधव | शोण देश शक्तिपीठ - अमरकंटक, मध्यप्रदेश
कालमाधव शक्तिपीठ में माता सती के बाया नितंब का निपात हुआ और यहां से सोन नदी प्रकट हुई । यहां की शक्ति है मां काली और भैरव को अतिसांग के नाम से जाना जाता है। यहां से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है सोनदेश शक्तिपीठ जहां माता का दायां नितंब गिरा था। और यहां से ही नर्मदा नदी का उद्गम स्थल है। यहां को शक्ति...
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कांची कामाक्षी देवी शक्तिपीठ - कांचीपुरम, तमिलनाडु
कामाक्षी अर्थात सबसे सुंदर आँखों वाली। जिनकी नेत्रों के दर्शन मात्र से ही भक्तों के भाग्य बदल जाते हैं। कहते है देवी कामाक्षी अम्मा की एक आंख में लक्ष्मी और दूसरी में सरस्वती मां का वास है। यहां की शक्ति है मां 'देवगर्भा' तथा भैरव यानी शिव को 'रुरु' कहते हैं।यहां पर देवी सती के अंगों के निपात को...
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शिवानी चित्रकूट | रामगिरी शक्तिपीठ - चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
चित्रकूट की पावन धरती पर ही रामचरितमानस जैसे अमर कृति लिखने वाले गोस्वामी तुलसीदास ने यहां कई वर्ष व्यतीत किए। उन्होंने ही भगवान श्री राम की भक्ति के कारण चित्रकूट को रामगिरी रूप में वर्णित किया है। और इसी स्थान पर तुलसीदास ने हनुमान बाबा की सहायता से भगवान श्री राम के साक्षात दर्शन भी किए।…
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देवी तालाब मंदिर | त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ - जालंधर, पंजाब
इस स्थान पर देवी मां के बाएं वक्ष यानी बाएं स्तन का निपात हुआ हुआ था इसीलिए माना जाता है की मां त्रिपुर मालिनी संतान हीन दंपतियों को ममता का वरदान देती है। श्रीमद्देवी भागवत् पुराण में जलंधर की कथा है। उसके अनुसार भगवान शिव के क्रोध से जालंधर की उत्पति हुई वो भगवान शिव के समान ही सुंदर और बलशाली…
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कामाख्या शक्तिपीठ - गुवाहाटी, असम
कामाख्या मंदिर के गर्भ ग्रह में देवी की किसी प्रतिमा की पूजा नहीं होती बल्कि यहां माता सती की योनि की पूजा होती है जिसका सतयुग में भगवान विष्णु द्वारा माता सती को सुदर्शन से विभाजित करने के बाद गुवाहाटी में निपात हुआ था रहस्मयी बात है योनि पिंड से लगातार बहता झरना .. इसी के साथ जून के महीने में...
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सावित्री शक्तिपीठ। माँ भद्रकाली - कुरुक्षेत्र, हरियाणा
मान्यता के अनुसार कुरुक्षेत्र के शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर यानि सावित्री शक्तिपीठ में मां सती का दाहिना टखना का निपात हुआ था। किंवदंती है कि महाभारत युद्ध शुरू करने से पहले, भगवान कृष्ण के साथ पांडवों ने जीत हासिल करने की उत्कट आशा के साथ इस पवित्र स्थल पर आशीर्वाद मांगा और प्रार्थना…
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ललिता देवी मंदिर - प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर के दक्षिण दिशा में यमुना नदी के तट पर सती के हाथ की उंगली गिरने से भगवती ललिता का प्राकट्य हुआ था। ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में मां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती मां ललिता के चरण छूकर ही बहती थी। इसलिए मां को प्रयाग की महारानी भी कहा जाता है। यहां मुख्य रूप से...
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जय दुर्गा शक्तिपीठ | हृदय पीठ बैद्यनाथ धाम - देवघर, झारखंड
शिव तथा सती के ऐक्य का प्रतीक है। शिव पुराण के अध्याय 38 में भी द्वादश ज्योर्तिलिंग की जो चर्चा की गई है, उसमें बैद्यनाथं चिताभूमौ का उल्लेख है। जो यह स्पष्ट करता है कि यहाँ सती का हृदय गिरा था। यहाँ की शक्ति 'जयदुर्गा' तथा शिव 'वैद्यनाथ' हैं। यह धाम सभी ज्योतिर्लिंगों से सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना...
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गायत्री देवी मणिबंध शक्तिपीठ - पुष्कर, राजस्थान
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। इस गायत्री मंत्र को चार वेदो का सार बताया गया है और गायत्री माता सभी वेदो की माता है पहले गायत्री मंत्र की महिमा सिर्फ देवी देवताओं तक सीमित थी लेकिन महर्षि विश्वामित्र ने कठोर तपस्या करके इस मंत्र को प्राप्त किया और…
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माँ बहुला शक्तिपीठ - केतुग्राम, पश्चिम बंगाल
बाई भुजा से माता रानी असुर, दैत्य, नकारात्मकता और भक्तों के संकटों को नष्ट कर देती हैं और दाहिनी भुजा से अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और उनका कल्याण करती हैं। इस एपिसोड में जानिए पश्चिम बंगाल के केतुग्राम में अजोय नदी के किनारे स्थित माँ बहुला शक्तिपीठ की कहानी. जहां माता सती की बाई भुजा का...
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मानस शक्तिपीठ | दक्षायनी - कैलाश पर्वत, मानसरोवर, तिब्बत
इस एपिसोड में हम बात करेंगे दक्षायणी देवी मानस शक्तिपीठ की। कैलाश पर्वत के निचले भाग में स्थित मान सरोवर के किनारे स्थित यह शक्तिपीठ है जहां की अधिष्ठात्री देवी हैं माता दक्षायनी, जिन्हें कुमुदा के नाम से भी जानते हैं। मान सरोवर यानी मन का सरोवर के किनारे होने से इस जगह नाम मानस शक्तिपीठ हुआ।…
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जानकी मन्दिर | मिथिला शक्तिपीठ - जनकपुर, नेपाल
इस एपिसोड में हम माता सती के उस शक्तिपीठ की बात करेंगे जो राजा जनक और सुनैना माता की पुत्री सीता माता की जन्मस्थली के साथ-साथ भगवन राम और माता सीता की पहली मुलाकात का साक्षी रहा जो जगह आज सीता महल के नाम से प्रसिद्ध है। नेपाल की राजधानी काठमांडू से लगभग 225 किलोमीटर और भारतीय सीमा क्षेत्र से लगभग...
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रत्नावली शक्तिपीठ - खानाकुल, आरामबाग, पश्चिम बंगाल
ऋषि राजा सूरत को बताते हैं कि राजन जब ब्रह्मा जी ने वहां मधु और कैटव को मारने के उद्देश्य से भगवान विष्णु को जगाने के लिए तमोगुण की अधिष्ठात्री देवी योगनिद्रा कि इस प्रकार स्तुति की तभी भगवान के नेत्र मुख कमल नासिका और वक्ष स्थल से निकलकर अव्यक्त जन्में ब्रह्मा जी की दृष्टि के समक्ष खड़ी हो गई…
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मैहर की शारदा माता शक्तिपीठ - सतना, मध्यप्रदेश
12वीं शताब्दी में आल्हा-उदल नाम के दो वीरयोद्धा थे जिसमें से योद्धा उदल राजा पृथ्वीराज चौहान से युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए जिसके बाद भाई आल्हा ने बदला लेने के लिए पृथ्वीराज चौहान और उनकी सेना पे जम के हमला किया। माना जाता है कि आल्हा ने माँ शारदा की भक्ति कर अपना शीश चढ़ाया था जिससे प्रसन्न…
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श्री शैल शक्तिपीठ । मल्लिकार्जुन - श्रीशैलम, आँध्रप्रदेश
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का अहम स्थान है यह एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जिसमें शिव-पार्वती दोंनो एक साथ स्थापित हैं। आंध्रप्रदेश के कुरनूल में ब्रह्मगिरी पर्वत पर जिसे दक्षिण का कैलाश भी मानते हैं यहां कृष्ना नदी के तट पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग में आज भी हर...
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महामाया शक्तिपीठ - अमरनाथ, कश्मीर
अमरनाथ गुफा में महादेव ने मां पार्वती को परम ज्ञान दिया था। जिससे उनके मनुष्यत्व का नाश हुआ , फिर उन्होंने इसी स्थान पर घोर तप किया महामाया रूप को प्राप्त हुई। इस तत्वज्ञान को 'अमरकथा' के नाम से जाना जाता है इसीलिए इस स्थान का नाम 'अमरनाथ' पड़ा। पवित्र अमरनाथ गुफा में ही स्थित है महामाया शक्तिपीठ...
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श्री सप्तश्रृंगी देवी - नासिक, महराष्ट्र
नासिक में सप्तशृंगी पहाड़ियों से घिरा हुआ वो पवित्र स्थान जहां दुर्गा सप्तशती कही गई और जहां महिषासुर राक्षस के विनाश के लिए सभी देवी-देवताओं ने मां की आराधना की थी तभी देवी मां 18 भुजाओ वाली सप्तश्रृंगी अवतार में प्रकट हुईं। आज दर्शन करेंगे पवित्रतम स्थान के जहां माता के परम भक्त मार्कण्डेय ऋषि…
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सर्वशैल | गोदावरी तीर शक्तिपीठ - राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश
दक्षिण की गंगा कही जाने वाली गोदावरी नदी के तट पर कोटिलिंगेश्वर मंदिर में स्थित है सर्वशैल शक्तिपीठ जिसे गोदावरी तीर शक्तिपीठ भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार यहां माता सती का वाम गंड (गाल) गिरे थे। यहां की शक्ति है विश्वेश्वरी जिन्हे राकिनी, या विश्वमातुका भी कहते है और शिव या भैरव को…
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गंडकी शक्तिपीठ - मुक्तिनाथ धाम, नेपाल
नेपाल में माता सती के दाएं गंड यानी गाल गिरने से बना गंडकी शक्तिपीठ जो इस सृष्टि के प्राचीनतम और सबसे ऊंचे मंदिरों में से एक है। यहाँ की शक्ति है 'गण्डकी चंडिका' तथा शिव यानी भैरव को 'चक्रपाणि' कहा जाता हैं। ये वो पवित्रतम स्थान है जहाँ स्वयं भगवान विष्णु को सती वृंदा के श्राप से मुक्ति मिली। और…
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ज्वालामुखी शक्तिपीठ - कांगड़ा, हिमाचल
माता ज्वाला देवी के दरबार में राजा अकबर ने भी शीश झुकाया. कहा जाता है कि ज्वाला माँ की लौ को बुझाने के लिए उसने लौहे के भारी तवे का इस्तेमाल किया यहां तक कि नहर को ही मोड़ दिया था फलस्वरूप माँ ने अपने चमत्कार से अकबर का घमंड तोड़ उसे अपनी शरण में लिया. तब भक्तिभाव से अकबर ने माँ ज्वाला को सोने का...
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पंचसागर शक्तिपीठ | वाराही माता मंदिर - वाराणसी, उत्तर प्रदेश
महादेव की नगरी काशी अद्भुत रहस्यो से भरी हुई है काशी में जब शाम ढल जाती है और गंगा आरती के बाद चांद निकलता है तब वाराही माता का दिन शुरू होता है। वाराही रात्रि की देवी हैं इसलिए उन्हें धूम्र वाराही और धूमावती के नाम से भी जाना जाता है। माँ धूमावती १० महाविद्याओं में आती है जिनकी महत्वता तंत्र…
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सुचीन्द्रम शक्तिपीठ | माँ नारायणी मन्दिर - कन्याकुमारी, तमिलनाडु
मिलनाडु का कन्याकुमारी नगर में देवी आदिशक्ति आज भी अवावहित कन्या रूप में तपस्या रत है। इसलिए दक्षिण भारत के इस स्थान का नाम कन्या कुमारी पड़ा। यही पर स्थित है सुचिंद्रम शक्तिपीठ जिसे शुचितीर्थम, शुचिदेश या नारायणी शक्तिपीठ आदि नामो से भी जाना जाता है। जहां पर माता सती के ऊपरी दंत (ऊर्ध्वदंत) गिरे...
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अट्टहास शक्तिपीठ | फुल्लारा देवी मंदिर - बीरभूम, पश्चिम बंगाल
इस एपिसोड में हम चलेंगे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पश्चिम बंगाल के बीरभूम जनपद के लाबपुर के अट्टहास गांव में जहां स्थित है अट्टहास शक्तिपीठ। मान्यता अनुसार यहां देवी का निचला होंठ गिरा था। यहां की शक्ति है फुल्लारा देवी और भैरव भगवान विश्वेश्वर के रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर के बगल में आज भी एक...
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हरसिद्धि माँ शक्तिपीठ - उज्जैन, मध्यप्रदेश
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर से 1 घंटे की दूरी पर स्थित महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जहां ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे पश्चिम दिशा में हरसिद्धि माता का मंदिर स्थित है। यहां माता सती के दो अंग विपरीत पहाड़ी पर आमने-सामने गिरे थे, जहां माता की कोहनी गिरी थी, उसे हरसिद्धि…
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चामुंडेश्वरी शक्तिपीठ - मैसूर, कर्नाटका
दुर्गा सप्तशती में ही भगवान शिव ने समस्त विश्व के कल्याण के लिए सिद्ध कुंजिका स्त्रोत्र का रहस्य बताया। इस एपिसोड में सुनिए की काली देवी ने चंड मुंड का वध किस स्थान पर किया था और किस लिए वे चामुंडेश्वरी शक्तिपीठ से विख्यात हुई Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices
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माँ विशालाक्षी शक्तिपीठ | मणिकर्णिका - काशी, उत्तर प्रदेश
मोक्षदायनी धरा वाराणसी की अलौकिकता को अनुभव करना एक अद्भुत एहसास है. यहाँ पर माता सती की कर्ण मणि गिरी थी जिससे मणिकर्णिका शक्तिपीठ यानि विशालाक्षी शक्तिपीठ की स्थापना हुई. उसी के साथ मणिकर्णिका घाट की उतपत्ति भी हुई. इसी घाट पर भगवान शिव ने माता सती के शव का अंतिम संस्कार किया था जिससे ये...
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सुगंधा- सुनंदा शक्तिपीठ | उग्रतारा शक्तिपीठ - शिकारपुर गाँव , बांग्लादेश
बांग्लादेश के शिकारपुर में बरिसल या बरीसाल से उत्तर में 21 किमी दूर शिकारपुर नामक गांव में सुनंदा नदी (सोंध) के किनारे स्थित है मां सुगंधा, जहां सती माता की नासिका गिरी थी। इसकी शक्ति है सुनंदा और भैरव या शिव को त्र्यंबक कहते हैं। यहां का मंदिर उग्रतारा के नाम से विख्यात है। उग्रतारा सुगंदा देवी...
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नैना देवी शक्तिपीठ - बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश की शिवालिक पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों पर चंडीगढ़ से लगभग 104 किलोमीटर की दूरी पर बिलासपुर जिले में पहाड़ी पर स्थित है नैना देवी शक्तिपीठ जहां माता सती के दोनों नेत्रों का निपात हुआ था लेकिन कुछ लोगों का ये मानना है कि उनके नेत्रों का निपात नैनी देवी मंदिर में हुआ था जो भारत के...
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अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर | करवीर शक्तिपीठ - कोल्हापुर, महाराष्ट्र
क्या आप जानते है कि महालक्ष्मी के पीछे-पीछे स्वयं नारायण को भी धरती पर आकर तिरुपति में स्थापित होना पड़ा. कहते है, इस स्थान के दर्शन किए बिना तिरुपतिबाला जी के दर्शन पूर्ण नहीं होते. इस एपिसोड में हम तंत्र चूड़ामणी, स्कन्द पुराण व देवी गीता में उल्लेखित कोल्हापुर में स्थित करवीर शक्तिपीठ को…
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चूड़ामणि शक्तिपीठ - रूड़की, उत्तराखंड
माता सती के इस शक्तिपीठ के दर्शन करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है लेकिन इसके लिए करना होगा मंदिर में अपराध पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए इस एपिसोड को. Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices
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वक्रेश्वर शक्तिपीठ - बीरभूम, बंगाल
महिषमर्दिनी शक्तिपीठ के नाम से विख्यात वक्रेश्वर शक्तिपीठ की महिमा अलौकिक है. यहां माँ सती की प्रतिमा महिषासुर का वध करते हुए दर्शायी गयी है. यहां पर वक्रेश्वर शक्तिपीठ के साथ ही भगवान शिव का वक्रेश्वर नाथ मन्दिर भी है. इस जगह पर पानी के स्वनिर्मित 10 कुंड है. जिनका तापमान खोलते हुए से लेकर जमा...
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सुरकंडा देवी शक्तिपीठ - कद्दूखाल, उत्तराखंड
देव भूमि उत्तराखंड में माता सती का सिर गिरा था जिस स्थान पर उनके सर ने पिंड रूप धारण किया उसे सुरकंडा देवी शक्तिपीठ कहा गय। सुरकंडा देवी की पहाड़ी से बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री अर्थात चारों धाम की पहाड़ियां दिखाई देती है. गंगा दशहरा और नवरात्रि के मौके पर यहां दर्शन करने से सभी...
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हिंगलाज माता शक्तिपीठ - बलूचिस्तान, पाकिस्तान
51 शक्तिपीठ के पहले पीठ में हम जानेंगे माता हिंगुला के बारे में, जिसे हिन्दू भक्त माता रानी और मुस्लिम भक्त नानी कहते है. पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगोल नदी के किनारे हिंगलाज नामक पहाड़ी पर बसे हिंगलाज माता के मंदिर में सती माता का 'ब्रह्मरंध्र' गिरा था. यहां उपासना से मनुष्य का भी...
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आदि शक्ति स्वरूपा शिव की अर्धांगिनी बनी माता सती के शव के 51 भाग ही 51 शक्तिपीठ कहलाएं। सतयुग में जब ब्रह्म देव के पुत्र दक्ष ने द्वेष और घृणा भाव में पुत्री सती और दामाद महादेव को अपमानित किया, जिस कारण माता सती ने अपनी योग अग्नि से स्वयं को भस्म किया। इस पॉडकास्ट सीरीज में हम जानेंगे महादेव और सती की प्रेम कहानी। साथ ही जानेंगे मानव कल्याण के लिए बने ये शक्तिपीठ कहाँ पर स्थित है और उनकी मान्यताएं क्या है।निष्ठा सारस्वत द्वारा रिटेन, रिसरजड एंड होस्टेड पॉडकास्ट में महादेव की आवाज़ RJ रघु रफ़्तार ने, विष्णु की आवाज़ विपिन सिंह ने, दक्ष की आवाज़ RJ शरत ने, सती/आदिशक्ति की आवाज़ दीक्षा चौरसिया ने, ब्रह्मा की आवाज़ आशीष भुसाल ने और प्रसूति की आवाज़ ज्योति तिवारी ने दी है। ये सीरीज जानकारी के लिए आपसी कही-सुनी मान्यताओं पर बनाई गयी है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी विवाद के हम उत्तरदाई नहीं है।Podcast thumbnail art credits - @devipratyakshaa
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