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PODCAST · religion

AWR Hindi / हिन्दी / हिंदी

Hindi for India

Publisher-supplied feed metadata · PodParley refreshed Jun 12, 2026 · Source feed

  1. 245

    याक़ूब के बेटे मिस्र में अनाज खरीदते हैं

    कनान में अकाल के कारण याक़ूब के बेटों को अनाज़ खरीदने मिस्र जाना हुआ जहाँ के राज्यपाल उनसे सख्त व्यवहार किया। उन्हें अब मालूम नहीं था कि वह उनका भाई है।

  2. 244
  3. 243

    युसुफ जेल से महल बुलाया गया

    पूरे मिस्र देश में केवल युसुफ ही था जो राजा फिरौन के स्वपन का सही अर्थ बतला सकता था।

  4. 242

    याक़ूब का यूसफ़ प्रति एहसान

    याक़ूब का अपने बेटे युसुफ के प्रति एहसान करना और कुर्ता देना उसके अन्य बच्चों में ईर्षा पैदा की और उसे मिस्र में गुलाम के लिए बेच देने में परिणामित हुआ।

  5. 241

    याक़ूब की कनान वापसी

    याक़ूब अपने कनान वापसी में बेथेल जाने के पूर्व अपने परिवार को मूर्तिपूजा के अपवित्रता से मुक्त होने का निर्देश दिया जिसमें सबने सहयोग किया।

  6. 240
  7. 239

    कुश्ती की रात

    याकूब उस पूरे रात प्रार्थना में बिताना चाहता था, क्योंकि उसे अपने बड़े भाई से मिलने में डर था; तब उसकी मुलाकात अनजाने में परमेश्वर के दूत से हो गया।

  8. 238

    याकूब का एसाव से पलायन

    याकूब मेसोपोटामिया में बीस साल रहने के बाद लबान से भागता है क्योंकि उसका कृपा जो याकूब के प्रति था वह नहीं रहा और उसे बहुत बार धोखा भी दिया था।

  9. 237

    प्रभु की दाखबारी - II

    यहूदी लोग परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने में असफल रहे, और उनसे दाख की बारी छीन ली गई क्योंकि उन्होने मसीह को स्वीकार नहीं किया।

  10. 236

    हनोक परमेश्वर के साथ चला

    हनोक लम्बे समय तक परमेश्वर के साथ चला और परमेश्वर उसे जिंदा स्वर्ग ले लिया।

  11. 235

    उद्धार के लिए दुबारा जन्मा

    यीशु ने निकोदीमुस को सिखाया कि हरेक कोई जो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना चाहता है उसे पानी और आत्मा से दुबारा जन्म लेना होगा।

  12. 234

    उपचारकर्ता को चंगाई की आवश्यकता – I

    पतरस यीशु से चंगाई और पुनर्स्थापना प्राप्त कर लोगों के लिए चंगाई का साधन बना।

  13. 233

    स्वर्ग का राज्य

    स्वर्ग का राज्य किसी एक भौगोलिक क्षेत्र, राजनीतिक इकाई, वर्ग या जाति से ज़्यादा लोगों की एक किस्म या गुणवत्ता या स्थिति को संदर्भित करता है।

  14. 232

    राजाओं का राजा

    जल्द ही एक दिन पूरा ब्रह्मांड हमारे राजाओं के राजा की अंतिम विजय और धार्मिकता के शाश्वत शासन के उद्घाटन का आनन्दपूर्वक जश्न मनाएगा।

  15. 231

    "सहायता का परमेश्वर "

    परमेश्वर की असीमित शक्ति हमारी मदद करने, हमारी रक्षा करने, और सभी परिस्थितियों में हमारा मार्गदर्शन करने के लिए उपलब्ध है।

  16. 230

    सेनाओं का प्रभु

    स्वर्गदूत, जो निःस्वार्थ भाव से परमेश्‍वर की सेवा करते हैं, हमारे रोज़मर्रा के जीवन में, और हमारे उद्धार के लिए महत्त्वपूर्ण रूप से काम करते हैं।

  17. 229

    मेरे पिता और मेरे परमेश्वर

    समस्त सृष्टि का परमेश्वर हमारे निमंत्रण का इंतजार कर रहा है कि वह हमारा सबसे प्रिय मित्र और निकटतम साथी बने, ताकि हम उसके विशेष लोग बन सकें।

  18. 228

    परमेश्वर का मेम्ना

    मनुष्य के विद्रोह का सामना करने के लिए, परमेश्वर ने मसीह में मेलमिलाप का एक ऐसा माध्यम प्रदान किया जो प्रत्येक पापी के लिए उसके प्रेम को प्रमाणित करता है।

  19. 227

    अद्भुत युक्ति करनेवाला

    अपने बच्चों के प्रति प्रेम के कारण, परमेश्वर उन सभी को लाभदायक सलाह देता है जो उसकी ओर देखते हैं।

  20. 226

    प्रेम का परमेश्वर

    प्रकृति और शास्त्रों में प्रकट और उसके पुत्र के जीवन में पूरी तरह से प्रदर्शित मानवजाति के लिए परमेश्वर का प्रेम सभी तक पहुँचता है।

  21. 225

    वह पवित्र जन

    ब्रह्मांड का प्रभु, अपनी पूर्णता, शक्ति और महिमा के कारण, सबसे अलग है - अर्थात, पवित्र - बाकी सब से ऊपर।

  22. 224

    पाप मुक्ति

    परमेश्वर एक “खुली” सरकार चलाते हैं। महान विवाद के अंत में उनके आत्म-त्याग, भलाई, न्याय, प्रेम और व्यवस्था के विषय सब सवाल खत्म हो जाएंगे।

  23. 223

    इम्मानुएल – परमेश्वर हमारे साथ

    ईश्वरत्व में से एक मनुष्य बनने को तैयार हुआ कि हमें अपना प्रतिस्थापन और ज़मानत प्रदान की जा सके और हमें हमारे पाप-पूर्व पूर्णता में वापस लाया जा सके।

  24. 222

    वह पवित्र जन

    ब्रह्मांड का प्रभु, अपनी पूर्णता, शक्ति और महिमा के कारण, सबसे अलग है - अर्थात, पवित्र - बाकी सब से ऊपर।

  25. 221

    इम्मानुएल – परमेश्वर हमारे साथ

    ईश्वरत्व में से एक मनुष्य बनने को तैयार हुआ कि हमें अपना प्रतिस्थापन और ज़मानत प्रदान की जा सके और हमें हमारे पाप-पूर्व पूर्णता में वापस लाया जा सके।

  26. 220

    पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा

    ईश्वरत्व अस्तित्व और प्रकृति में तीन दिव्य सत्ताओं से मिलकर बना है, जो उद्देश्य और कार्य में एकीकृत हैं, किन्तु व्यक्तित्व में भिन्न हैं।

  27. 219

    हमारे प्रभु परमप्रधान

    अपने सृजित प्राणियों के सृष्टिकर्ता, न्यायाधीश और उपकारकर्ता के रूप में, परमेश्‍वर समस्त ब्रह्माण्ड पर प्रभुता रखता है।

  28. 218

    हमारा सदाकाल का परमेश्वर

    हमारा परमेश्वर सदाकाल से सदाकाल तक का परमेश्वर है। उसे छोड़ और कोई परमेश्वर नहीं है। वे हमें सबसे कठिन परिस्थिति में भी बचा सकते हैं।

  29. 217

    चर्च उग्रवादी

    जैसे प्रकाशितवाक्य के सात कलिसियायों को महान संघर्ष में यीशु के चेतावनी और प्रोत्साहन हैं, वैसे हमें भी हैं।

  30. 216

    महान विवाद पर पतरस

    पतरस के लेखन में महान-विवाद विषय की भरमार है जैसे कि वह इस वास्तविक संघर्ष से वकिफ था और हमें सचेत रहने की चेतावनी दी है।

  31. 215

    पौलुस और विद्रोह

    पौलुस परमेश्वर का शक्तिशाली सेवक था। उसके लेखन में महान-विवाद विषय की भरमार है।

  32. 214

    महान विवाद और आरंभिक कलिसिया

    यीशु को अपने अनुयायियों के सामने सबसे बड़ी बाधा उनकी पूर्वधारणाएँ थीं। दस दिनों की प्रार्थना और परमेश्वर की उपस्थिति में घनिष्ठ संगति इसमें बदलाव लायीं।

  33. 213

    हथियार में साथी

    यीशु की शक्ति शैतान से अधिक शक्तिशाली है, और यदि उसके अनुयाई उससे चिपके रहेंगे तो शैतान उन्हें पराजित नहीं कर सकता है।

  34. 212

    यीशु की शिक्षाएँ और महान विवाद

    यीशु की शिक्षा द्वारा हम महान विवाद को समझ सकते हैं।

  35. 211

    जंगल में विजय

    यीशु ने जंगल में शैतान पर विजय पाने के लिए पवित्रशास्त्र का इस्तेमाल किया। और हम भी पवित्र शास्त्र का इस्तेमाल करके शैतान पर जीत प सकते हैं।

  36. 210

    न्यायियों में संघर्ष और संकट

    न्यायियों का समय पवित्र इतिहास में एक अराजक काल था। फिर भी, परमेश्वर अपने बच्चों को बचाने के लिए उद्धारकर्ता भेजता जब वे उसे पुकारते।

  37. 209

    वैश्विक विद्रोह और कुलपति

    विद्रोह और पाप परमेश्वर द्वारा बनाई गई हर चीज़ को नष्ट कर देते हैं। पर, परमेश्वर की विश्वासयोग्यता, अपने परेशान बच्चों को बचाने में जारी रहती है।

  38. 208

    अदन में संकट

    मनुष्य को कभी भी मरने के लिए नहीं बनाया गया था; हमें परमेश्वर की योजना में भरोसा करना है।

  39. 207

    स्वर्ग में विद्रोह

    पाप की शुरुआत एक रहश्य है। प्रेम का परमेश्वर अपने सब सृजे प्राणियों को स्वतंत्र चुनाव दिया है, और उनसे स्वेच्छा आज्ञाकारी चाहता है।

  40. 206

    उसकी ज्योति को चमकाएँ

    उसकी ज्योति को चमकाएँ, जिस तरह बुद्धिमान कुवारियों ने तेल के साथ अपने दीयों के द्वारा दूल्हा के सम्मान के लिए उसके राह को उंजियाला की।

  41. 205

    बुद्धिमान और मूर्ख कुवारियाँ

    बुद्धिमान कुवारियाँ अ पने दिये और अपने साथ अतिरिक्त तेल भी लीं। मूर्ख कुवारियाँ अपने दिये लिए परन्तु अपने साथ पर्याप्त तेल नहीं लीं।

  42. 204

    बीज बोने से अन्य सबक –II

    बीज बोने की शिक्षण में उदारता दोनों आत्मिक और सामयिक बातों में सिखाया जाता है।

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