PODCAST · religion
AWR Hindi / हिन्दी / हिंदी
by Adventist World Radio
Hindi for India
-
189
मेल करानेवाले
जब परमेश्वर हमें शांति देता है, तो कोई भी इसे हमसे छीन नहीं सकता। वह हमें मसीह के माध्यम से परमेश्वर से जोड़े रखता है, चाहे हमारी परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
-
188
जो मन में शुद्ध हैं
हृदय से शुद्ध वे लोग हैं जो पूरे हृदय से परमेश्वर की खोज करते हैं, और परमेश्वर ऐसे लोगों से स्वयं को प्रकट करने का वादा करता है।
-
187
जो दयालु हैं
परमेश्वर की इच्छा है कि हम भी उसकी तरह दूसरों पर दया दिखाएँ, और ऐसा करके हम दया प्राप्त करेंगे।
-
186
जो नम्र हैं
विनम्रता आंतरिक श्रृंगार है, जिसे परमेश्वर बहुत मूल्यवान समझता है। यह सोने, मोतियों या कीमती आभूषणों से भी अधिक उत्कृष्ट और मूल्यवान हैं।
-
185
क्षमा का माप
परमेश्वर हमारे बहुत पापों को क्षमा किए हैं, इसलिए हमें दूसरों के पापों को क्षमा करना है।
-
184
"“राजमार्गों और बाड़ों में जाओ” -III "
परमेश्वर के संदेशवाहकों को बुलाया जाता है कि वे सुसमाचार उन सब लोगों को दें जो दुनिया में भटक गए हैं कि उन्हें आशा मिले और उन्हें परमेश्वर के दावत में निमंत्रण करें।
-
183
"“राजमार्गों और बाड़ों में जाओ” -II "
दावत का निमंत्रण सबसे पहले यहूदी लोगों को दिया गया था; जब उन्होंने इस आह्वान को अस्वीकार कर दिया, तो सुसमाचार का आह्वान अन्यजातियों को दिया जाता है।
-
182
"“राजमार्गों और बाड़ों में जाओ” -I "
फरिसी का मनोदृष्टि दिखलता था कि वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने को निश्चित था परन्तु जिस शर्त पर उद्धार प्रतिज्ञा किया गया है उसे मानने को तैयार नहीं था।
-
181
“इस वर्ष भी इसे छोड़ दो”
यीशु हमारे लिए परमेश्वर से और एक मौका के लिए प्रार्थना कर रहा है, हमें इस मौका में फल लाना है।
-
180
खोया और पाया गया –II
यीशु के पास आने में पीछे न रहें जब तक कि आप अपने आप को बेहत्तर न बना लें, या उतना अच्छा न बन जाएँ कि आप ईश्वर के पास आने के लायक हों, अन्यथा आप आएंगे ही नहीं।
-
179
खोया और पाया गया –I
वह पिता का प्रेम ही था जो उड़ाऊ पुत्र को घर की तरफ ले जा रहा था।
-
178
मन के दीन
धन्य वचनों में ( मत्ती 5: 3-12) जो यीशु का पहाड़ी उपदेश (मत्ती 5-7) का अंश है, उसने सच्ची खुशी के लिए नुस्खे दी है।
-
177
-
176
राजाओं का राजा
जल्द ही एक दिन पूरा ब्रह्मांड हमारे राजाओं के राजा की अंतिम विजय और धार्मिकता के शाश्वत शासन के उद्घाटन का आनन्दपूर्वक जश्न मनाएगा।
-
175
"सहायता का परमेश्वर "
परमेश्वर की असीमित शक्ति हमारी मदद करने, हमारी रक्षा करने, और सभी परिस्थितियों में हमारा मार्गदर्शन करने के लिए उपलब्ध है।
-
174
-
173
मेरे पिता और मेरे परमेश्वर
समस्त सृष्टि का परमेश्वर हमारे निमंत्रण का इंतजार कर रहा है कि वह हमारा सबसे प्रिय मित्र और निकटतम साथी बने, ताकि हम उसके विशेष लोग बन सकें।
-
172
परमेश्वर का मेम्ना
मनुष्य के विद्रोह का सामना करने के लिए, परमेश्वर ने मसीह में मेलमिलाप का एक ऐसा माध्यम प्रदान किया जो प्रत्येक पापी के लिए उसके प्रेम को प्रमाणित करता है।
-
171
अद्भुत युक्ति करनेवाला
अपने बच्चों के प्रति प्रेम के कारण, परमेश्वर उन सभी को लाभदायक सलाह देता है जो उसकी ओर देखते हैं।
-
170
प्रेम का परमेश्वर
प्रकृति और शास्त्रों में प्रकट और उसके पुत्र के जीवन में पूरी तरह से प्रदर्शित मानवजाति के लिए परमेश्वर का प्रेम सभी तक पहुँचता है।
-
169
प्रेम का परमेश्वर
प्रकृति और शास्त्रों में प्रकट और उसके पुत्र के जीवन में पूरी तरह से प्रदर्शित मानवजाति के लिए परमेश्वर का प्रेम सभी तक पहुँचता है।
-
168
वह पवित्र जन
ब्रह्मांड का प्रभु, अपनी पूर्णता, शक्ति और महिमा के कारण, सबसे अलग है - अर्थात, पवित्र - बाकी सब से ऊपर।
-
167
इम्मानुएल – परमेश्वर हमारे साथ
ईश्वरत्व में से एक मनुष्य बनने को तैयार हुआ कि हमें अपना प्रतिस्थापन और ज़मानत प्रदान की जा सके और हमें हमारे पाप-पूर्व पूर्णता में वापस लाया जा सके।
-
166
वह पवित्र जन
ब्रह्मांड का प्रभु, अपनी पूर्णता, शक्ति और महिमा के कारण, सबसे अलग है - अर्थात, पवित्र - बाकी सब से ऊपर।
-
165
मिस्र की विपत्तियाँ – 3
राजा का हृदय कठोर करने के लिए किसी अलौकिक शक्ति का प्रयोग नहीं किया गया था। यह पहले चमत्कार को ठुकराने के विद्रोह का फल था।
-
164
मिस्र की विपत्तियाँ – 2
मिस्र की विपत्तियाँ में परमेश्वर ने इसराइलियों को बचाया और मिस्र राष्ट्र के जादूगरों में भरोसा रखने की मूर्खता का एहसास किया गया।
-
163
मिस्र की विपत्तियाँ – 1
मिस्र में प्रत्येक विपत्ति आने से पहले, मूसा को फिरौन से उसके स्वरूप और प्रभावों का वर्णन करना था, ताकि राजा चाहे तो उससे बच सके।
-
162
परमेश्वर मूसा को अपने काम के लिए तैयार करता है
मूसा पहाड़ों के मध्य प्रकृति में परमेश्वर से उसके महानता के विषय और अपने भेड़ों को देखभाल करने के लिए धैर्य सीखा।
-
161
युसुफ का इज़राइल के बच्चों से निवेदन
विश्वास से यूसुफ ने, जब वह मरने पर था, तो इस्त्राएल की सन्तान के निकल जाने की चर्चा की, और अपनी हड्डियों के विषय में आज्ञा दी।
-
160
याक़ूब कनान में दफ़नाया गया
याक़ूब मिस्र में मरने पर विश्वास का देश कनान में दफनाये जाने का चाह रखता था क्योंकि उसका मन प्रतिज्ञा के देश में गड़ा था।
-
159
युसुफ अपने भाइयों का परीक्षा लेता है
युसुफ अपने को प्रकट करने से पहले अपने भाइयों को जाँचना चाहते थे कि उनमें सच्चा पश्चाताप हुआ है और उनमें सच्चा परिवर्तन आया है।
-
158
याक़ूब के बेटे मिस्र में अनाज खरीदते हैं
कनान में अकाल के कारण याक़ूब के बेटों को अनाज़ खरीदने मिस्र जाना हुआ जहाँ के राज्यपाल उनसे सख्त व्यवहार किया। उन्हें अब मालूम नहीं था कि वह उनका भाई है।
-
157
युसुफ मिस्र की सेवा करता है
एक समय युसुफ पोतिफर के घर में दास का काम करता था पर अब वह राजा फिरौन का विश्वस्त मंत्री के रूप में पूरे मिस्र देश की सेवा कर रहा था।
-
156
युसुफ जेल से महल बुलाया गया
पूरे मिस्र देश में केवल युसुफ ही था जो राजा फिरौन के स्वपन का सही अर्थ बतला सकता था।
-
155
याक़ूब का यूसफ़ प्रति एहसान
याक़ूब का अपने बेटे युसुफ के प्रति एहसान करना और कुर्ता देना उसके अन्य बच्चों में ईर्षा पैदा की और उसे मिस्र में गुलाम के लिए बेच देने में परिणामित हुआ।
-
154
याक़ूब की कनान वापसी
याक़ूब अपने कनान वापसी में बेथेल जाने के पूर्व अपने परिवार को मूर्तिपूजा के अपवित्रता से मुक्त होने का निर्देश दिया जिसमें सबने सहयोग किया।
-
153
दो भाइयों का मिलन
याकूब एसाव से मिलने में भयभीत था, परन्तु उसके सच्चे पश्चाताप और परमेश्वर के वादों में दृढ़ विश्वास और भरोसा ने उसे सफल और विजयी बनाया।
-
152
कुश्ती की रात
याकूब उस पूरे रात प्रार्थना में बिताना चाहता था, क्योंकि उसे अपने बड़े भाई से मिलने में डर था; तब उसकी मुलाकात अनजाने में परमेश्वर के दूत से हो गया।
-
151
याकूब का एसाव से पलायन
याकूब मेसोपोटामिया में बीस साल रहने के बाद लबान से भागता है क्योंकि उसका कृपा जो याकूब के प्रति था वह नहीं रहा और उसे बहुत बार धोखा भी दिया था।
-
150
प्रभु की दाखबारी - II
यहूदी लोग परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने में असफल रहे, और उनसे दाख की बारी छीन ली गई क्योंकि उन्होने मसीह को स्वीकार नहीं किया।
-
149
हनोक परमेश्वर के साथ चला
हनोक लम्बे समय तक परमेश्वर के साथ चला और परमेश्वर उसे जिंदा स्वर्ग ले लिया।
-
148
उद्धार के लिए दुबारा जन्मा
यीशु ने निकोदीमुस को सिखाया कि हरेक कोई जो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना चाहता है उसे पानी और आत्मा से दुबारा जन्म लेना होगा।
-
147
उपचारकर्ता को चंगाई की आवश्यकता – I
पतरस यीशु से चंगाई और पुनर्स्थापना प्राप्त कर लोगों के लिए चंगाई का साधन बना।
-
146
स्वर्ग का राज्य
स्वर्ग का राज्य किसी एक भौगोलिक क्षेत्र, राजनीतिक इकाई, वर्ग या जाति से ज़्यादा लोगों की एक किस्म या गुणवत्ता या स्थिति को संदर्भित करता है।
-
145
राजाओं का राजा
जल्द ही एक दिन पूरा ब्रह्मांड हमारे राजाओं के राजा की अंतिम विजय और धार्मिकता के शाश्वत शासन के उद्घाटन का आनन्दपूर्वक जश्न मनाएगा।
-
144
"सहायता का परमेश्वर "
परमेश्वर की असीमित शक्ति हमारी मदद करने, हमारी रक्षा करने, और सभी परिस्थितियों में हमारा मार्गदर्शन करने के लिए उपलब्ध है।
-
143
सेनाओं का प्रभु
स्वर्गदूत, जो निःस्वार्थ भाव से परमेश्वर की सेवा करते हैं, हमारे रोज़मर्रा के जीवन में, और हमारे उद्धार के लिए महत्त्वपूर्ण रूप से काम करते हैं।
-
142
मेरे पिता और मेरे परमेश्वर
समस्त सृष्टि का परमेश्वर हमारे निमंत्रण का इंतजार कर रहा है कि वह हमारा सबसे प्रिय मित्र और निकटतम साथी बने, ताकि हम उसके विशेष लोग बन सकें।
-
141
परमेश्वर का मेम्ना
मनुष्य के विद्रोह का सामना करने के लिए, परमेश्वर ने मसीह में मेलमिलाप का एक ऐसा माध्यम प्रदान किया जो प्रत्येक पापी के लिए उसके प्रेम को प्रमाणित करता है।
-
140
अद्भुत युक्ति करनेवाला
अपने बच्चों के प्रति प्रेम के कारण, परमेश्वर उन सभी को लाभदायक सलाह देता है जो उसकी ओर देखते हैं।
We're indexing this podcast's transcripts for the first time — this can take a minute or two. We'll show results as soon as they're ready.
No matches for "" in this podcast's transcripts.
No topics indexed yet for this podcast.
Loading reviews...
ABOUT THIS SHOW
Hindi for India
HOSTED BY
Adventist World Radio
CATEGORIES
Loading similar podcasts...