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Jaya Kishori Podcast

Welcome to the Jaya Kishori Podcast, where spirituality meets everyday life. Join renowned spiritual leader Jaya Kishori as she delves into insightful discussions, uplifting stories, and practical wisdom to inspire and empower you on your journey towards inner peace and fulfillment. Tune in for enlightening conversations that touch the heart and nurture the soul.

Publisher-supplied feed metadata · PodParley refreshed Sep 19, 2026 · Source feed

  1. 99

    मजबूत और शांतिपूर्ण जीवन जीने के 5 अच्छी आदतें -जया किशोरी।

    पहला सुबह की शुरुआत शांति के साथ हो। दूसरा कुछ समय से खुद के साथ बिताना बिना फ़ोन ओर बिना शोर के साथ। तीसरा सकारात्मक होना। चौथा मदद करना और कुछ समय योगा करना ये सब एक सुखद और सकारात्मक जीवन के तरीके हैं जया किशोरी जी।

  2. 98

    कठिन परिस्थियों में सकारात्मक रहने की कला -जया किशोरी।

    आइए जानते हैं कि किस प्रकार जया किशोरी जी ने कठिन परिस्थियों में सकारात्मक रहने की कला को परिभाषित किया है आप कहती हैं कि नकारात्मक विचार आना स्वाभाविक है किन्तु उन्हें किस दिशा में मोड़ना हैं अपने हाथ होता है हमेशा नकारात्मक विचार  मस्तिष्क को अशांत करते हैं सकारात्मकता मस्तिष्क को शांत व साफ़ करती हैं।

  3. 97

    तृप्ति चाहिए तो त्याग करना होगा- जया किशोरी।

    आइए जानते हैं कि किस जया किशोरी जी ने तृप्ति चाहिए तो त्याग करना ही होगा तथ्य को स्पष्ट किया है आप जब तक बंधनों में हैं, सुविधाओं में तब तक तृप्त नहीं हो सकते हैं अगर आपको जीवन में कुछ छोड़ना हैं तो त्याग ही एकमात्र रास्ता है। जया किशोरी।

  4. 96

    बुरी नजर का सच -जया किशोरी।

    नकारात्मकता ही बुरी नजर की परिभाषा में आती हैं ईर्ष्या, द्वेष और जलन ये सब नकारात्मक सोच या बुरी नजर में आते हैं जो हमेशा सम्पन्न ,समृद्ध ओर सुंदरता पर असर डालते हैं जीवन में  हमेशा अपने आस पास सकारात्मक वातावरण और सकारात्मक व्यक्तियों का ही आगमन होने देना चाहिए ।अपने अंदर जितनी सकारात्मकता होगी उतना ही जीवन महकेगा। जया किशोरी।

  5. 95

    मन की सफाई- जया किशोरी।

    मन की सफाई भी उतनी ही जरूरी है जितनी की शरीर की क्योंकि जब तक मन साफ नहीं होगा तब तक ज्ञान नहीं रुक सकता नकारात्मक सोच , ईर्ष्या द्वेष और गलत बात पर पछतावा और माफ नहीं कर पाना ये सब मन पर कचरा है इन सब को दूर करके माफ करने की कोशिश करना , स्पष्ट सफाई शांत मन में ज्ञान का परिवेश होता है ध्यान करना, अच्छी संगति ओर प्रकृति के साथ समय बिताना ये सब मन को साफ व हल्का करते हैं जया किशोरी।

  6. 94

    कलियुग में लोग ज्ञान से दूर क्यों हैं- जया किशोरी।

    भौतिक सुविधाओं का बढ़ जाना आज हर कोइ मोबाइल, कम्प्यूटर ओर इंटरनेट की दुनिया में ही सिमट कर रह गया हैं सही मार्ग दर्शन की कमी, अच्छे गुरुओं की कमी ओर अहंकार की हमें सब आता हैं जो सीखने की इच्छा शक्ति को मिटा देता हैं आइए जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  7. 93

    समय की कीमत- जया किशोरी।

    समय की कीमत को समझो। समय को बर्बाद मत करो वरना एक दिन ऐसा आयेगा कि समय आपको बर्बाद कर देगा । किसी भी कार्य को आप कर रहे हो तो उसे पूर्ण रूप से करे। समय लौटकर नहीं आता हैं इसकी कदर करनी चाहिए।

  8. 92

    प्रेरणादायक विचार -जया किशोरी।

    जया किशोरी जी ने अपने विचारों के माध्यम से वास्तविक जीवन की सच्चाई को दर्शाया है आइए जानते हैं जया जी कहती हैं जीवन में बहुत सारे कार्यों को पूरा करने के बजाए जो भी कार्य करते हो उसे बहुत ही सफल तरीके से करो। "कृष्ण कहते हैं कि जो सामने विरूद्ध खड़े हैं वो अपने हैं तो विरुद्ध क्यों खड़े हैं " इसी प्रकार  प्रमस्तिष्क में अपने द्वारा किए गए अधूरे कार्य गलत संदेश देते हैं आप जीवन में अच्छे कर्म करते रहे क्योंकि कर्म लौटकर आते हैं। सभी रिश्ते अपनी जगह महत्वपूर्ण है किसी  भी रिश्ते की तुलना किसी भी ओर रिश्तों से नहीं करनी चाहिए।

  9. 91

    आपके भी जीवन में बहुत उलझने हैं -जया किशोरी।

    क्या आपका भी साथ नहीं देते हैं ईश्वर। क्या आपके भी जीवन में बहुत उलझने हैं अगर हा तो आइए जानते हैं कि प्रकार जया किशोरी जी उनसे बाहर निकलने का रास्ता बताया हैं। जीवन बहुत अनमोल हैं जीवन को व्यवस्थित रखना चाहिए और मस्तिष्क को शांत रखे। तुलना, ईर्ष्या और विश्वाशज्ञात करने वालों से दूरी बनाए रखें।

  10. 90

    रिश्तों में दूरियां आने की सही वजह- जया किशोरी।

    रिश्तों में दूरियां आने की सही वजह तुलना हैं पत्नी की मां से तुलना, पति की पिता से ओर परिवार की रिश्तेदारों से आदि। औरतों को सफल तो बना दिया उनको नई दिशा तो मिल गई किन्तु सफल स्त्री के साथ पुरुष को रहना नहीं सिखा पाए जया किशोरी जी।

  11. 89

    समय का महत्व -जया किशोरी।

    समय का महत्ता को परिभाषित किया गया हैं आइए जानते हैं कि किस प्रकार जया किशोरी जी ने समय की कदर करने वाले व्यक्ति को ही सफल व्यक्ति माना हैं 

  12. 88

    पहनावे से व्यक्ति की पहचान -जया किशोरी।

    किसी को उसके पहनावे को देखकर उसका चरित्र और काम तय करना सही नहीं होता हैं क्योंकि दिखावे से भरी इस दुनिया में होता कुछ ओर है और चल कुछ ओर रहा होता हैं जया किशोरी जी ने मीडिया का उदाहरण देकर तथ्य को व्यक्त किया है आइए कुछ कहानियों के माध्यम से विस्तार से जानते हैं।

  13. 87

    बदलाव जरुरी है -जया किशोरी।

    जीवन में बदलाव बहुत जरुरी होता हैं जो भी होता हैं कुछ अच्छे के लिए होता हैं जया जी ने कुछ कहानियों के माध्यम से' बदलाव अच्छा होता हैं 'को बताया है विकाश की पहली सीडी बदलाव माना गया हैं आइए जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  14. 86

    स्वयं से प्रेम करने का प्रयास -जया किशोरी।

    जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अच्छा भोजन करते हैं उसी प्रकार मन व मस्तिष्क को शांत और खुश रखने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास करने चाहिए जैसे अपनी पसंद नापसंद ओर दूसरों की खुशी के लिए अपना मन नहीं मरना। अपने जीवन में अपने आप सीमाएं तय कर सकते हैं इसी प्रकार विस्तार से जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  15. 85

    कोई काम छोटा नहीं होता हैं- जया किशोरी।

    आइए जानते हैं कि किस प्रकार जया किशोरी जी ने अपने विचारों द्वारा कर्म को महत्व दिया है और कोई काम छोटा नहीं होता इस तथ्य को कैसे समझाया हैं जहां एक सुई का कम होता हैं वहां तलवार कम नहीं आती हैं और समाज में अपने जीवन साथी, परिवार, मित्र या मां बाप कोई भी सब का अपना एक स्थान होता हैं सबका अपना -अपना प्रयास होता हैं बलिदान होता किसी को जज नहीं करना चाहिए ।

  16. 84

    जीवन आध्यात्म और रिश्ता -जया किशोरी।

    आइए जानते हैं कि जया किशोरी जी ने किस प्रकार जीवन आध्यात्म और रिश्तों को परिभाषित किया हैं जया किशोरी ने कहा है कि जीवन को सफ़ल जीवन बनाने में आध्यात्म अंधेरे में रोशनी मिलने जैसा होता हैं। माता - पिता की परवरिश भी मायने रखती हैं कि बच्चे किस दिशा में जा रहे है रिश्तों की भी बहुत बड़ी मेहनत लगती हैं आध्यात्म जीवन पाने में कामयाब होने के लिए। जया किशोरी जी।

  17. 83

    विवाह आध्यात्म और समाज- जया किशोरी।

    आइए जानते हैं कि किस प्रकार जया किशोरी जी ने विवाह, आध्यात्म और समाज की सच्चाई को परिभाषित किया हैं।   व्यक्ति हमेशा  एक जैसा होता हैं अपने  पर  निर्भर है कि किस प्रकार  देखते हैं विवाह  भी कुछ  ऐसा ही है कुछ समय  तक  सब ठीक चलता है  फिर  एक -दूसरे  में कमियां नजर आने लगती हैं आध्यात्म भी मनुष्य को मन पर काबू करना सीखता हैं और  समाज में जगह अपनी  मेहनत और व्यवहार  से बनती हैं जो समय अच्छा हो, कामयाबी हो  तो सब सकारात्मक होते हैं नहीं हो नकारात्मक आइए विस्तार से जानते हैं।

  18. 82

    ध्यान केन्द्रित कैसे करें- जया किशोरी।

    अपने मन पर विजय प्राप्त कैसे करें।हम जब चाहे तब अपने मन को अपने मुताबिक बना सके ,किस प्रकार जीवन की  भिन्न -भिन्न परिस्थितियों अपने मन को स्थिर कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि किस प्रकार अपने मन के बच्चे को जिंदा क्यों और कैसे रख सकते हैं जया किशोरी जी।

  19. 81

    कर्म, भक्ति और विश्वाश - जया किशोरी।

    जया किशोरी जी ने बताया है कि किस प्रकार कर्म करते रहना चाहिए। कर्म का मतलब पूजा पाठ, नाम जप, बुजुर्गों की सेवा,अपने घर को संवारना, बच्चों की परवरिश ओर जीव जंतुओं की रक्षा अन्य उदाहरणों द्वारा कर्म को व्यक्त किया हैं आइए विस्तार से जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  20. 80

    पैसे का महत्व -जया किशोरी।

    जीवन में पैसा भौतिक सुख-सुविधाओं , सुरक्षा और स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण साधन हैं। यह शिक्षा, स्वास्थ्य ओर लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक है यह अंतिम लक्ष्य नहीं हैं बल्कि जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का जरिया है धन का सही उपयोग ओर बचत जीवन को आसान बनाती है।

  21. 79

    नई पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक ज्ञान -जया किशोरी।

    नई पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक ज्ञान का मतलब है आंतरिक शांति और मानसिक स्पष्टता और आधुनिक जीवन की भागदौड़ में संयम बनाए रखना । आधुनिक तकनीक के बीच सन्तुलन और स्वयं की जागरूकता तथा कर्म और संतोष के माध्यम से वास्तविक खुशी पाना है जया किशोरी।

  22. 78

    मृत्यु के बाद का सच- जया किशोरी।

    आइए जानते हैं कि जया किशोरी जी ने किस प्रकार जीवन ओर मृत्यु के बारे में अपने विचार व्यक्त किए हैं अपने कर्म और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि से ही जीवन को बेहतर बनाया जा सकता हैं और बार -बार मिलने वाले जीवन -मरण   के चक्र से मुक्ति मिल सकती हैं और अपने कर्मों से स्वर्ग व नर्क प्राप्त किया जा सकता हैं जया किशोरी जी।

  23. 77

    भावुक व्यक्ति कमजोर होता हैं -जया किशोरी।

    भावनाओं को व्यक्त करने वाले कमजोर नहीं होते हैं वह अपने आप को दुबारा नई योजनाओं के लिये तैयार करते हैं जो अपनी भावना व्यक्त नहीं करते वह एक दिन बड़ा रूप लेकर निकट हैं जो सब नष्ट कर देती हैं हर जीवन का अंत खुशी ही होता हैं  और जिसका नहीं होता उसके जीवन में बदलाव अभी बाकी हैं जया किशोरी।

  24. 76

    बच्चों को social मीडिया से दूर कैसे रखें -जया किशोरी।

    आइए जानते हैं कि किस प्रकार प्रकार आधुनिक समय में बच्चों को social मीडिया से दूर रखने में मदद मिल सकती हैं पीढ़ियों में अंतराल आता नहीं है लाया जाता हैं बच्चों को मनोरंजन पूर्ण वातावरण देना चाहिए।उनको व उनकी आवश्यकता को समझना चाहिए। समय को हर कार्य के लिए निश्चित करना चाहिए। जया किशोरी।

  25. 75

    एक बहरीन चीज को बनने में समय ओर मेहनत लगती हैं- जया किशोरी।

    बेहतरीन चीज को बनने में समय ओर मेहनत लगती हैं किसी भी प्रकार की सफलता तुरन्त नहीं मिलती हैं किसी को भी देख कर मात्र उसकी मेहनत नहीं मापी जाती हैं दूसरों की सफलता आसान लगती है किन्तु ऐसा नहीं होता हैं उसके पीछे बहुत मेहनत और समय लगता हैं आइए जानते जया किशोरी जी द्वारा।

  26. 74

    प्रेम, आध्यात्म और विज्ञान- जया किशोरी।

    प्रेम ,आध्यात्म और विज्ञान जया किशोरी कहते हैं कि आज विज्ञान को खोज कर रही हैं वो तो शास्त्रों में कब की बात दी गई हैं। आध्यात्म और विज्ञान के दूसरे के रूप मैने जा सकते हैं। प्रेम, शादी और उपेक्षाएं ये सब सांसारिक जीवन में सुख प्रधान करते हैं किन्तु इनकी अति दुःख का कारण भी बन सकती हैं आइए जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  27. 73

    आत्म -जागरूकता - जया किशोरी।

    आत्म जागरूकता ,आधुनिक जीवन ,समर्पण और शांति ये सब आज का विषय बन गया हैं आइए जानते हैं कि जया किशोरी जी ने किस प्रकार बदलाव,विकास ,वर्तमान में जीना ओर बिना स्वार्थ के जीवन जीना तथा आध्यात्मिक जीवन जीना  को किस प्रकार परिभाषित किया हैं जया किशोरी जी।

  28. 72

    जो हैं झूठ हैं -जया किशोरी।

    सांसारिक जीवन की सच्चाई हर रिश्ता आपको जीवन में धोखा देता हैं संसार एक धोखा हैं। detachment ( जो हैं झूठ हैं) सब को पता हैं एक न एक दिन सबको जाना हैं जो भी है सब अनिश्चित हैं आइए जानते हैं कि किस प्रकार जया किशोरी जी ने सांसारिक जीवन की सच्चाई को परिभाषित किया हैं जया किशोरी जी।

  29. 71

    जीवन में खुश रहने के मंत्र- जया किशोरी।

    आइए जानते है कि जीवन में खुश रहने वाले मंत्र कौनसे होते हैं कुछ कहानियों के माध्यम से ओर कुछ आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जीवन में खुशहाली को परिभाषित किया गया हैं जैसे एक दुःखी व्यक्ति ओर खुश व्यक्ति दोनों के लिए एक ही तथ्य " ये समय बदल जाएगा" कोई भी चीज निश्चित नहीं हैं परिवर्तन का नाम ही जीवन हैं जया किशोरी जी।

  30. 70

    धन खुशियां या सुविधा देता हैं- जया किशोरी।

    धन सुविधाएं देता हैं न कि खुशियां आइए जानते हैं कि किस प्रकार धन को परिभाषित किया गया है कहानी के माध्यम से धन का महत्व बताया गया है।धन से किस प्रकार चीजें खरीदी जा सकती हैं या चीजों द्वारा हमें खरीदा जा रहा हैं विस्तार से जानते हैं जया किशोरी जी।

  31. 69

    आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और आधुनिक चुनौतियां -जया किशोरी।

    आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि किस प्रकार आधुनिक चुनौतियां का सामना करने में सफल साबित हो रहा हैं और किस प्रकार आधुनिक संसार में रहकर जीवन को सफल बना सकते हैं आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि के द्वारा। आइए जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा अपने जीवन में आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि का महत्व और जीवन में सफलता का रहस्य।

  32. 68

    महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश -जया किशोरी।

    आज भी औरत ही औरत की दुश्मन हैं आज भी पुरानी परम्परा को बढ़ावा देते है कि औरत घर की चार दीवारों में ही कैद रहे ।आज महिला शिक्षित हैं उसे अपने अधिकार  और स्वतंत्रता भी पता हैं। महिलाओं में एक अदभुद शक्ति है कि वो अपने आप को अनेक रूप के प्रकट कर सकती हैं आइए विस्तार से जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  33. 67

    धन का आकर्षण और आधुनिक संसार -जया किशोरी।

    धन का आकर्षण और आधुनिक संसार के विषय में चर्चा की गई हैं धन सब कुछ तो नहीं लेकिन बहुत कुछ होता हैं जब तक धन के आने का मार्ग सही होता हैं तब तक धन ठीक होता हैं अच्छा जीवन जीना धन के बिना मुमकिन नहीं होता हैं आइए जानते हैं कि किस प्रकार आधुनिक संसार में धन आवश्यक हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  34. 66

    जीवन का असली सुख -जया किशोरी।

    जीवन का असली सुख भक्ति और सकारात्मकता हैं आइए जानते हैं कि किस प्रकार जया किशोरी जी ने भक्ति और सकारात्मकता को जीवन का असली सुख बताया है स्वयं सही ओर सब में कमी इस तथ्य को कैसे नकारा हैं।

  35. 65

    माफी की शक्ति व सादगी -जया किशोरी।

    माफी की शक्ति का अर्थ है किसी से दिल से माफी मांगना ना की उस बात को फिर बाद में खींचते हुए रहना अगर आपको लगता है आप गलत हो तो ही माफी मांगना चाहिए नहीं तो दिखावा नहीं करना चाहिए। सादा जीवन ,सरल विचार और विनम्रता से परिवार की जिम्मेदारी निभाना ही सादगी भरा जीवन होता हैं मोहानी रूपी आकर्षण कुछ समय का ही होता हैं किन्तु अमृत रूपी गुण व्यक्ति की पहचान होते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं जया किशोरी जी।

  36. 64

    आध्यात्मिक का अर्थ -जया किशोरी।

    आध्यात्मिकता का अर्थ वैराग्य जीवन जीना नहीं होता हैं बल्कि जहां भी रहो खुश रहो। कोई फर्क नहीं क्या हैं कितना है कैसा है।सात्विक भोजन व ईश्वर का नाम एवं कर्म। सर्व प्रथम स्वयं को तेजस्वी रखकर फिर अपने विचारों से किसी ओर को प्रभावित किया जा सकता हैं किसी के जीवन में प्रेरणा बन सकते हो। कर्म करना और मन पर विजय पाना। आइए जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  37. 63

    जीवन के नैतिक कर्त्तव्य या दिनचर्या - जया किशोरी।

    "कर्म कर फल की इच्छा मत कर " एक कहानी के माध्यम से बताया गया है कि दिनचर्या कैसी होनी चाहिए। रोज अपने जीवन के नैतिक कर्त्तव्य पूर्ण करने चाहिए सफलता अपने आप मिल जाएगी। इसी प्रकार कई तथ्य देकर जीवन के नैतिक कर्तव्यों को परिभाषित किया गया है। आइए जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  38. 62

    जीवन कैसा जीना चाहिए -जया किशोरी।

    जीवन को बेहतर बनाने में सबसे महत्वपूर्ण साफ वातावरण होना चाहिए क्योंकि जितना आप अपने आस -पास सकारात्मकता रखते हैं काम बनते चले जाते हैं छोटे- छोटे बदलाव बड़ा परिवर्तन लाते हैं अपनो को अहमियत देना आदि । आइए जानते हैं कि किस प्रकार जीवन जीना चाहिए जया किशोरी जी द्वारा।

  39. 61

    बदलाव कैसे आएगा -जया किशोरी।

    आइए जानते हैं कि किस प्रकार बदलाव लाया जा सकता हैं एक कहानी के माध्यम से बताया गया है कि बदलाव बहुत बड़े परिवर्तन नहीं बल्कि छोटी- छोटी कोशिशों से  लाया जा सकता हैं गुणों की पहचान, आदर्श व जिम्मेदारी आदि। जया किशोरी जी द्वारा बताया गया है।

  40. 60

    कर्म लौटकर आता हैं -जया किशोरी।

    जीवन में आने वाली सारी परेशानीया मौसम की तरह होती हैं जिनको हम बदल तो नहीं सकते हैं लेकिन जिस प्रकार सर्दी में स्वेटर पहनकर सर्दी से अपने आप को बचा लेते है।उसी प्रकार समस्या मौसम की तरह होती हैं आती हैं और कुछ समय बाद चली जाती हैं। समस्या का समाधान ओर संयम जीवन को आसान बना देते हैं। उम्मीद ही दुख का कारण होती हैं हम सामने वाले व्यक्ति को स्वयं के अनुसार चलना या बनाना चाहते हैं लेकिन ऐसा नहीं होता ओर हम दुखी हो जाते हैं आइए जानते हैं कि किस तरह जीवन सुखदमय बन सकता हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  41. 59

    लक्ष्य या राह- जया किशोरी।

    आपके जीवन में सिर्फ़ खुशियां ही हो दुख कभी नहीं हो ,सफलता ही हो निराशा कभी नहीं हो।ऐसे ही हमेशा ये आशा होती हैं कि सकारात्मक कार्य हो।हर व्यक्ति आपके हिसाब से या आपके ही विचार को स्वीकार कर लें। जीवन पर नकारात्मक प्रभाव हो ही नहीं ये संभव नहीं, व्यक्ति स्वयं की कमी स्वीकार नहीं कर पा रहा हैं स्वीकार करना जीवन को बेहतर बना देता हैं। जया किशोरी जी द्वारा।

  42. 58

    भक्ति, परिवार और संघर्ष -जया किशोरी।

    भक्ति,परिवार और संघर्ष सबको साथ लेकर चलने वाली जया किशोरी जी द्वारा हम जानते हैं कि आध्यात्म के साथ परिवार की यात्रा या उनको साथ लेकर चलना क्या संघर्ष था और हा तो कितना ओर कैसे? "भक्ति' जीवन को कैसे व्यवस्थित करती हैं आइए जानते हैं।

  43. 57

    आत्म- खोज की यात्रा- जया किशोरी।

    आत्म खोज की यात्रा, स्वयं की आत्मा की खोज क्या हैं आइए जानते हैं जया किशोरी जी के द्वारा की किस प्रकार हम अपने मन या स्वयं क्या चाहते  हैं इस तथ्य पर विचार विमर्श करते हैं ।क्यों हमें सब से प्रमाण चाहिए कि हम सफल हैं या सही दिशा में जा रहे हैं आज कोई ओर क्यों अपना जीवन तय कर रहा हैं। अपने मनोबल को स्वयं स्तर क्यों नहीं रख पा रहे हैं। आइए स्वयं को जानते हैं।

  44. 56

    अहंकार और स्वाभिमान -जया किशोरी।

    अहंकार मनुष्य को जीवन में सफलता के बाद आता हैं। क्रोध ,ईर्ष्या ओर जलन ये सब अहंकारी व्यक्ति में देखने को मिलता हैं। इसके विपरीत स्वाभिमान मनुष्य के अपने जीवन के कुछ सिद्धांत होते हैं। जिनके विपरीत कार्य होने पर उनके मन को ठेस पहुंचती हैं परंतु उनके मन में द्वेष भावना नहीं होती है। आइए जानते हैं कि किन तीन गुणों में इनको विस्तार से बताया है जया किशोरी जी द्वारा।

  45. 55

    बदलाव को स्वीकार करना -जया किशोरी।

    जीवन को बेहतर बनाने में मदद करता हैं स्वीकार करना।जो हो रहा हैं और जो होना है होकर ही रहेगा ।इस बात को जितना जल्दी मान लेंगे जीवन सरल हो जाएगा। सब कुछ अपने अनुसार ही हो ,यही तो परेशानी है।बदलाव को स्वीकार करो आइए जानते हैं कि किस प्रकार सकारात्मक सरल जीवन जिया जा सकता हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  46. 54

    जो है सही हैं -जया किशोरी।

    "खुद को जानो,खुद को बदलो और खुद का माफ करो।" आइए जानते हैं कि किस प्रकार सकारात्मक जीवन जिया जा सकता है जीवन में मंजिल तक पहुंचने से पहले प्रयास करके ही रास्ता बनाया जाता हैं अगर गलती के डर से प्रयास नहीं करते हैं तो मंजिल मिलना मुमकिन नहीं।     परेशानी तो इतनी है ही नहीं जितनी सोच सोच कर बड़ा ली जाती हैं "स्वयं को अपनाओ" अपने आप को स्वीकार करो। तुलना "  ईर्ष्या" में कब बदल जाती है ? बड़े फैसलों से दूरियां नहीं आती, छोटी - छोटी बातों को नजरअंदाज करना ही वज़ह । आइए जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा की कैसे जीवन में सब ठीक है।

  47. 53

    मनुष्य को जीवन कैसे जीना चाहिए -जया किशोरी।

    मनुष्य को जीवन कैसे जीना चाहिए आइए जानते हैं।बुरा देखन में चला,बुरा न मिला कोई, अपने मन को देखा, मुझसे बुरा ना कोई। इसी प्रकार जब जीवन में बुरा हुआ ही नहीं तो परेशानी किस बात की। ओर अगर बुरा हो गया तो फिर हो गया ना फिर किस बात का डर। जीवन में अच्छा दोस्त होना किसी खजाने से कम नहीं होता हैं । जीवन में दोस्ती का महत्व। जीवन को बेहतर बनाने में सहायक जया किशोरी जी द्वारा बताए गए विचार।

  48. 52

    सकारात्मक रहकर जीवन को सरल बनाया जा सकता हैं- जया किशोरी ।

    सकारात्मक रहकर अपने जीवन को सरल बना सकते है, मनुष्य के जीवन में कोई भी नई शुरुआत तभी हो सकती है जब पहले किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं हो। सकारात्मक रहकर जीवन में नए रास्ते बनाए जा सकते हैं और नई दिशा भी मिल सकती है आइए जानते हैं कि किस प्रकार सकारात्मक रहकर जीवन को सरल बनाया जा सकता हैं जया किशोरी जी के द्वारा।

  49. 51

    ईश्वर तुम्हें वही देता है जो तुम्हारे लिए सही होता है -जया किशोरी।

    जो अपने चाहा वो आपको तुरंत मिल जाए। ऐसा नहीं होता । लेकिन जो आपके भाग्य में है वो सही समय आपको जरूर मिलेगा।जीवन जब भीषण बिखरा सा लगे तो समझो कि कुछ अच्छा होने वाला है। परिवर्तन ही जीवन  का दूसरा नाम है। आइए जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।

  50. 50

    कर्म ही कर्त्तव्य -जया किशोरी।

    कर्म किसी का सगा नहीं ,कर्म ही कर्त्तव्य या प्रत्येक जीव का कर्म ही कर्तव्य होता हैं। मनुष्य के अच्छे कर्म सेवा, सत्य, सत्कार और भक्ति।इसी प्रकार बुरे कर्म झूठ बोलना,निंदा करना ,किसी को कष्ट देना और अपमान करना। आइए जानते हैं कि मनुष्य के साथ सिर्फ कर्म ही जाते हैं और कुछ नहीं। जया किशोरी जी।

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