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PODCAST · society

Main Aur Tum

by Umesh Pratap Singh

कुछ अनकहे से ख्याल

Publisher-supplied feed metadata · PodParley refreshed Nov 23, 2023 · Source feed

Episodes

  1. इस दुनिया से परे एक और दुनिया बसती है

    इस दुनिया से परे एक और दुनिया बसती है

  2. आयने में नजर आता वो शख्स भी अब मेरा नहीं।

    आयने में नजर आता वो शख्स भी अब मेरा नहीं।

  3. ये भी एक दौर- ए-ज़िन्दगी थी मेरी

    ये भी एक दौर- ए-ज़िन्दगी थी मेरी

  4. तु मेरी मोहबब्त है मेरी जरूरत हो नहीं सकता.

    तु मेरी मोहबब्त है मेरी जरूरत हो नहीं सकता.

  5. तुमसे दूर होऊंगा और फिर सितारा हो जाऊंगा

    तुमसे दूर होऊंगा और फिर सितारा हो जाऊंगा

  6. तुम वहां पहुंच गए मेरी जान

    तुम वहां पहुंच गए मेरी जान

  7. बहुत कुछ अपने में बिखर रहा है

    बहुत कुछ अपने में बिखर रहा है

  8. आखें बंद होते ही वो दौड़ी चली आती है।

    आखें बंद होते ही वो दौड़ी चली आती है।

  9. मैं उसकी तस्वीर बनाता हूं और वो मेरे सामने आ जाती है।

    मैं उसकी तस्वीर बनाता हूं और वो मेरे सामने आ जाती है।

  10. हमने जब भी लिखा फकत तुझे ही लिखा.

    हमने जब भी लिखा फकत तुझे ही लिखा.

  11. इस कदर हमें वो प्यारा था

    इस कदर हमें वो प्यारा था

  12. ना जाने क्यों फिर ये तन्हाई कैसी है

    ना जाने क्यों फिर ये तन्हाई कैसी है

  13. उसके छत पे पतंग उतारा करते थे हम।

    उसके छत पे पतंग उतारा करते थे हम।

  14. सफ़र खतम हुआ है, ज़िन्दगी नहीं।

    सफ़र खतम हुआ है, ज़िन्दगी नहीं।

  15. जरुरत में तो मुसाफिर भी दरख़्त तले रुकते हैं।

    जरुरत में तो मुसाफिर भी दरख़्त तले रुकते हैं।

  16. इस कदर मुझमें पागल है वो लड़की

    इस कदर मुझमें पागल है वो लड़की

  17. उसके गालों को कोई अब हाथों से छूता होगा।

    उसके गालों को कोई अब हाथों से छूता होगा।

  18. ये मेरे बिस्तर की जो चादर है, ये चादर हटा दो.

    ये मेरे बिस्तर की जो चादर है, ये चादर हटा दो.

  19. इसके अलावा, मेरा कोई ठिकाना नहीं.

    इसके अलावा, मेरा कोई ठिकाना नहीं.

  20. तुम तो हम जैसे नजर आ रहे हो

    तुम तो हम जैसे नजर आ रहे हो

  21. मैं तो उससे मोहब्बत करता था

    मैं तो उससे मोहब्बत करता था

  22. वो जहां भी रहे खुश रहे.

    वो जहां भी रहे खुश रहे.

  23. ये मेरी मोहब्बत है जिसे तुम पागलपन समझते हो

    ये मेरी मोहब्बत है जिसे तुम पागलपन समझते हो

  24. सुना है कुछ लोग थोड़ी देर बाद मिलते हैं.

    सुना है कुछ लोग थोड़ी देर बाद मिलते हैं.

  25. मुझे नींद से जगा कर चला गया वो

    मुझे नींद से जगा कर चला गया वो

  26. एक मेरी आखें जिसमें तेरे ख्वाब ठहरे

    एक मेरी आखें जिसमें तेरे ख्वाब ठहरे

  27. सुना है उसने बेटे का नाम 'उमेश' रखा है

    सुना है उसने बेटे का नाम 'उमेश' रखा है

  28. ये दरवाजे खुले क्यों रखे है ‘उमेश‘

    ये दरवाजे खुले क्यों रखे है ‘उमेश‘

  29. क्या मैं तुम्हें याद हूं? बोलो ना।

    क्या मैं तुम्हें याद हूं? बोलो ना।

  30. वो जहां छोड़ गया था मुझे वहीं खड़ा हूं मैं

    वो जहां छोड़ गया था मुझे वहीं खड़ा हूं मैं

  31. तब तुम याद आए

    तब तुम याद आए

  32. दिया जलाया है और हवा चल रही है

    दिया जलाया है और हवा चल रही है

  33. एक जमाने बाद हमने कुछ अच्छा सोचा

    एक जमाने बाद हमने कुछ अच्छा सोचा

  34. ये खयाल अच्छा लगा, तो सोच लिया

    ये खयाल अच्छा लगा, तो सोच लिया

  35. ना जाने क्या आलम होगा तुम्हारे कमरे का

    ना जाने क्या आलम होगा तुम्हारे कमरे का

  36. जो तुमने छू लिया, बहक जाएंगे हम

    जो तुमने छू लिया, बहक जाएंगे हम

  37. क्या पता कौन गया, कौन दिल में आया है.

    क्या पता कौन गया, कौन दिल में आया है.

  38. अभी उसकी आखों में रहते हैं, कल उसके दिल में मिलेंगे।

    अभी उसकी आखों में रहते हैं, कल उसके दिल में मिलेंगे।

  39. मेरी तरह तुम्हारे लिए फूलों के बगीचे लगाता है क्या वो कोई?

    मेरी तरह तुम्हारे लिए फूलों के बगीचे लगाता है क्या वो कोई?

  40. मैं रुक गया हूं, वक्त चल रहा है

    मैं रुक गया हूं, वक्त चल रहा है

  41. कमरे से पुरानी तस्वीर हटाई जाए

    कमरे से पुरानी तस्वीर हटाई जाए

  42. नई नई मोहब्बत है, तुम्हें तो मेरी बाहों में होना चहिए

    नई नई मोहब्बत है, तुम्हें तो मेरी बाहों में होना चहिए

  43. हर रोज मैं तेरे शहर की तरफ कबूतर उड़ाता हूं।

    हर रोज मैं तेरे शहर की तरफ कबूतर उड़ाता हूं।

  44. उस बूंद से चलो हम मोतियां बनाते हैं।

    उस बूंद से चलो हम मोतियां बनाते हैं।

  45. उनका किस्सा भी अपने किस्से जैसा है.

    उनका किस्सा भी अपने किस्से जैसा है.

  46. मैं हिज़्र की रात में उसकी याद चाहता हूं

    मैं हिज़्र की रात में उसकी याद चाहता हूं

  47. अब एक जिस्म को कई बदन संवारते देखा है.

    अब एक जिस्म को कई बदन संवारते देखा है.

  48. तुम सच में आए हो या दिवाली आयी है

    तुम सच में आए हो या दिवाली आयी है

  49. ये गुलाब फिर क्यों लिए जा रहे हैं हम

    ये गुलाब फिर क्यों लिए जा रहे हैं हम

  50. लिख ना पाए तुम्हारा नाम कागज पे हम

    लिख ना पाए तुम्हारा नाम कागज पे हम

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कुछ अनकहे से ख्याल

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Umesh Pratap Singh

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