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Main Aur Tum — 111 episodes · page 1 of 2

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Title
1

इस दुनिया से परे एक और दुनिया बसती है

2

आयने में नजर आता वो शख्स भी अब मेरा नहीं।

3

ये भी एक दौर- ए-ज़िन्दगी थी मेरी

4

तु मेरी मोहबब्त है मेरी जरूरत हो नहीं सकता.

5

तुमसे दूर होऊंगा और फिर सितारा हो जाऊंगा

6

तुम वहां पहुंच गए मेरी जान

7

बहुत कुछ अपने में बिखर रहा है

8

आखें बंद होते ही वो दौड़ी चली आती है।

9

मैं उसकी तस्वीर बनाता हूं और वो मेरे सामने आ जाती है।

10

हमने जब भी लिखा फकत तुझे ही लिखा.

11

इस कदर हमें वो प्यारा था

12

ना जाने क्यों फिर ये तन्हाई कैसी है

13

उसके छत पे पतंग उतारा करते थे हम।

14

सफ़र खतम हुआ है, ज़िन्दगी नहीं।

15

जरुरत में तो मुसाफिर भी दरख़्त तले रुकते हैं।

16

इस कदर मुझमें पागल है वो लड़की

17

उसके गालों को कोई अब हाथों से छूता होगा।

18

ये मेरे बिस्तर की जो चादर है, ये चादर हटा दो.

19

इसके अलावा, मेरा कोई ठिकाना नहीं.

20

तुम तो हम जैसे नजर आ रहे हो

21

मैं तो उससे मोहब्बत करता था

22

वो जहां भी रहे खुश रहे.

23

ये मेरी मोहब्बत है जिसे तुम पागलपन समझते हो

24

सुना है कुछ लोग थोड़ी देर बाद मिलते हैं.

25

मुझे नींद से जगा कर चला गया वो

26

एक मेरी आखें जिसमें तेरे ख्वाब ठहरे

27

सुना है उसने बेटे का नाम 'उमेश' रखा है

28

ये दरवाजे खुले क्यों रखे है ‘उमेश‘

29

क्या मैं तुम्हें याद हूं? बोलो ना।

30

वो जहां छोड़ गया था मुझे वहीं खड़ा हूं मैं

31

तब तुम याद आए

32

दिया जलाया है और हवा चल रही है

33

एक जमाने बाद हमने कुछ अच्छा सोचा

34

ये खयाल अच्छा लगा, तो सोच लिया

35

ना जाने क्या आलम होगा तुम्हारे कमरे का

36

जो तुमने छू लिया, बहक जाएंगे हम

37

क्या पता कौन गया, कौन दिल में आया है.

38

अभी उसकी आखों में रहते हैं, कल उसके दिल में मिलेंगे।

39

मेरी तरह तुम्हारे लिए फूलों के बगीचे लगाता है क्या वो कोई?

40

मैं रुक गया हूं, वक्त चल रहा है

41

कमरे से पुरानी तस्वीर हटाई जाए

42

नई नई मोहब्बत है, तुम्हें तो मेरी बाहों में होना चहिए

43

हर रोज मैं तेरे शहर की तरफ कबूतर उड़ाता हूं।

44

उस बूंद से चलो हम मोतियां बनाते हैं।

45

उनका किस्सा भी अपने किस्से जैसा है.

46

मैं हिज़्र की रात में उसकी याद चाहता हूं

47

अब एक जिस्म को कई बदन संवारते देखा है.

48

तुम सच में आए हो या दिवाली आयी है

49

ये गुलाब फिर क्यों लिए जा रहे हैं हम

50

लिख ना पाए तुम्हारा नाम कागज पे हम

51

रुको, तुम्हें एक बार गले लगा लूं क्या?

52

कितने घाव हैं दिल पे मेरे तुम्हे मालूम है जाना

53

रात दिन खुद को उसकी कहानियां सुनाता हूं।

54

एक खत जो कभी डाक घर को सौंपा ही नहीं

55

एक दफा तुम छत पर क्यों नहीं आते

56

लिख करके आखिरी खत कलम तोड़ डाली

57

वो जो अजीज था, बेवफा हो रहा है

58

माटी का ये बदन उसका,संगमरमर हो गया है

59

रातों में जगना अब मैं सीख गया हूं

60

सोच लेता हूं तुम्हें, तो बदन महकता है

61

कुछ पल में हमने सदियां बिता दीं

62

अपने होठों को तेरे माथे पे रख आया।

63

बस मेरे सांसों को रुकने कि कोई वजह ना दो

64

हम भी अब हवाओं का पीछा कर रहे हैं

65

देखा किए तुझे, कभी मिल ना पाए

66

उफनते समुंदर को मैं रोक लेता हूं

67

तुमसे बिछड़े तो नई ख्वाहिशें जन्म ले रही थी

68

अमावस्या में पूर्णिमा का चांद खिला दूं

69

कभी जिस तरह तुझे याद किया करता था.

70

मेरे पास बैठो

71

मेरा सब कुछ बन जाना तुम.

72

कौन हो तुम?

73

किताब में एक पुराना गुलाब का फूल मिला

74

मैंने समुंदर को रुलाया है

75

खिड़की से चांद को घर ले आता हूं मैं

76

सीधी कोई सड़क नहीं जाती है

77

मुझसे ना पूछो कि मैं कैसा हूं

78

ये पेड़ कुछ अपने जैसा लगता है

79

मुझसे एक दिन तुम मिलोगी क्या?

80

मेरे ख्वाब

81

ये रात मेरी हमसफ़र बन रही है

82

गुजर गई है सारी उम्र

83

मैं तुम्हारी खामोशी से बात करता हूं

84

तुमसे कुछ शिकायतें

85

मैं तुम्हारी एक तस्वीर बनाना चाहता हूं

86

कितने अलग हो ना तुम उमेश मुझसे

87

रूह से मेरी रूह मिला रहा हो जैसे

88

मैं तुम पर नाराज़ हो जाता हूं

89

तुम्हे समझना चाहता हूं

90

वो मेरे करीब आता है

91

मैं आसमां था वो बारिश थी

92

बस शर्त ये है कि

93

घर बदलने से यादें मिटती नहीं हैं

94

मुझे दोबारा इश्क करना है

95

मैं तुम्हे अपना होना लिखता हूं

96

ना समझ क्यों बन रही हो तुम

97

एक शख्स

98

इंतजार

99

लंबे बालों वाली लड़की

100

तुम निभाओगे वो किरदार?