Sampurn Shiv Puran podcast artwork

PODCAST · religion

Sampurn Shiv Puran

Welcome to "Sampurn Shiv Puran," a captivating podcast that takes you on a mystical journey into the world of Hindu mythology and spirituality. Join us as we dive deep into the rich tapestry of the Shiv Puran, bringing ancient tales of Lord Shiv to life through engaging storytelling, revealing profound wisdom, epic battles, and timeless teachings that have shaped Hindu culture for millennia. With nearly 500 chapters to explore, prepare to be captivated by the vast depth and breadth of the Shiv Puran in each episode.

Publisher-supplied feed metadata · PodParley refreshed Oct 8, 2025 · Source feed

  1. 261

    261. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 41 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - इकतालीसवां अध्याय

    "भगवान् नन्दी का वहाँ आना और दृष्टिपात मात्र से पाशछेदन एवं ज्ञानयोग का उपदेश कर के चला जाना, शिवपुराण की महिमा तथा ग्रन्थ का उपसंहार"

  2. 260

    260. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 60 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - चालीसवां अध्याय

    "वायुदेव का अन्तर्धान, ऋषियों का सरस्वती में अवभृथ- स्नान और काशी में दिव्य तेज का दर्शन कर के ब्रह्माजी के पास जाना, ब्रह्मा जी का उन्हें सिद्धि-प्राप्ति की सूचना देकर मेरु के कुमार-शिखर पर भेजना"

  3. 259

    259. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 39 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - उन्तालीसवां अध्याय

    "ध्यान और उस की महिमा, योगधर्म तथा शिवयोगी का महत्त्व, शिवभक्त या शिव के लिये प्राण देने अथवा शिवक्षेत्र में मरण से तत्काल मोक्ष-लाभ का कथन"

  4. 258

    258. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 38 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - अड़तीसवां अध्याय

    "योगमार्ग के विघ्न, सिद्धि सूचक उपसर्ग तथा पृथ्वी से लेकर बुद्धि- तत्त्वपर्यन्त ऐश्वर्यगुणों का वर्णन, शिव-शिवा के ध्यान की महिमा"

  5. 257

    257. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 37 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - सैंतीसवां अध्याय

    "योग के अनेक भेद, उसके आठ और छ: अंगों का विवेचन -यम, नियम, आसन, प्राणायाम, दशविध, प्राणों को जीतने की महिमा, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का निरूपण"

  6. 256

    256. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 33 - 36 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - "तेंतीसवां, चौंतीसवां, पैंतीसवां एवं छत्तीसवां अध्याय "

    "पारलौकिक फल देने वाले कर्म-शिवलिंग-मह्यव्रत की विधि और महिमा का वर्णन"

  7. 255

    255. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 32 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - बत्तीसवां अध्याय

    "ऐहिक फल देने वाले कर्मों और उनकी विधि का वर्णन, शिव-पूजन की विधि, शान्ति-पुष्टि आदि विविध काम्य कर्मो में विभिन्न हवनीय पदार्थों के उपयोग का विधान"

  8. 254

    254. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 31 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - इकत्तीसवां अध्याय

    शिव के पाँच आवरणों में स्थित सभी देवताओं की स्तुति तथा उनसे अभीष्टपूर्ति एवं मंगल की कामना""

  9. 253

    253. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 30 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - तीसवां अध्याय

    "आवरणपूजा की विस्तृत विधि तथा उक्त विधि से पूजन की महिमा का वर्णन"

  10. 252

    252. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 28 & 29 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - अठ्ठाईसवां एवं उन्तीसवां अध्याय

    "काम्य कर्म के प्रसंग में शक्ति सहित पंचमुख महादेव की पूजा के विधान का वर्णन"

  11. 251

    251. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 26 & 27 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - "छब्बीसवां एवं सत्ताईसवां अध्याय "

    "पंचाक्षर-मन्त्र के जप तथा भगवान् शिव के भजन-पूजन की महिमा, अग्निकार्य के लिये कुण्ड और वेदी आदि के संस्कार, शिवाग्नि की स्थापना और उसके संस्कार, होम, पूर्णाहुति, भस्म के संग्रह एवं रक्षण की विधि तथा हवनान्त में किये जाने वाले कृत्य का वर्णन"

  12. 250

    250. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 25 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - पच्चीसवाँ अध्याय

    "शिवपूजा की विशेष विधि तथा शिव-भक्ति की महिमा"

  13. 249
  14. 248
  15. 247

    247. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 20 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - बीसवाँ अध्याय

    "योग्य शिष्य के आचार्यपद पर अभिषेक का वर्णन तथा संस्कार के विविध प्रकारों का निर्देश"

  16. 246

    246. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 19 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - उन्नीसवाँ अध्याय

    "साधक-संस्कार और मन्त्र-माहात्म्य का वर्णन"

  17. 245
  18. 244
  19. 243

    243. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 16 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - सोलहवाँ अध्याय

    "समय-संस्कार या समयाचार की दीक्षा की विधि"

  20. 242

    242. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 15 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - पंद्रहवाँ अध्याय

    "त्रिविध दीक्षा का निरूपण, शक्तिपात की आवश्यकता तथा उसके लक्षणोंका वर्णन, गुरुका महत्त्व, ज्ञानी गुरु से ही मोक्ष की प्राप्ति तथा गुरु के द्वारा शिष्य की परीक्षा"

  21. 241

    241. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 14 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - चौदहवाँ अध्याय

    "गुरु से मंत्र लेने तथा उसके जप करने की विधि, पाँच प्रकार के जप तथा उनकी महिमा, मंत्र गणना के लिए विभिन्न प्रकार की मालाओं का महत्व तथा अँगुलियों के उपयोग का वर्णन, जप के लिए उपयोगी स्थान तथा दिशा, जप में वर्जनीय बातें, सदाचार का महत्व, आस्तिकता की प्रशंशा, तथा पंचाक्षर मंत्र की विशेषता का प्रतिपादन"

  22. 240

    240. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 13 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) तेरहवाँ अध्याय

    "पंचाक्षर-मन्त्र की महिमा, उसमें समस्त वाङ्मय की स्थिति, उसकी उपदेशपरम्परा, देवीरूपा पंचाक्षरीविद्या का ध्यान, उसके समस्त और व्यस्त अक्षरों के ऋषि, छन्द, देवता, बीज, शक्ति तथा अंगन्यास आदि का विचार"

  23. 239

    239. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 12 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) बारहवाँ अध्याय

    "पंचाक्षर-मन्त्र के माहात्म्य का वर्णन"

  24. 238

    238. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 11 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) ग्यारहवाँ अध्याय

    "वर्णाश्रम-धर्म तथा नारी-धर्म का वर्णन; शिव के भजन, चिन्तन एवं ज्ञान की महत्ता का प्रतिपादन"

  25. 237

    237. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 10 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) दशवाँ अध्याय

    "भगवान् शिवके प्रति श्रद्धा-भक्ति की आवश्यकता का प्रतिपादन, शिवधर्म के चार पादों का वर्णन एवं ज्ञानयोग के साधनों तथा शिवधर्म के अधिकारियों का निरूपण, शिवपूजन के अनेक प्रकार एवं अनन्यचित्त से भजन की महिमा"

  26. 236

    236. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 9 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) नवाँ अध्याय

    "शिव के अवतार, योगाचार्यों तथा उनके शिष्यों की नामावली"

  27. 235

    235. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 8 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) आठवाँ अध्याय

    "शिव-ज्ञान, शिव की उपासना से देवताओं को उनका दर्शन, सूर्यदेव में शिव की पूजा करके अर्घ्यदान की विधि तथा व्यासावतारों का वर्णन"

  28. 234

    234. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 7 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) सातवाँ अध्याय

    "परमेश्वर की शक्ति का ऋषियों द्वारा साक्षात्कार, शिव के प्रसाद से प्राणियों की मुक्ति, शिव की सेवा भक्ति तथा पाँच प्रकार के शिव-धर्म का वर्णन"

  29. 233

    233. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 6 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) छठा अध्याय

    "शिव के शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, सर्वमय, सर्वव्यापक एवं सर्वातीत स्वरूप का तथा उनकी प्रणवरूपता का प्रतिपादन"

  30. 232

    232. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 5 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) पाचवाँ अध्याय

    "परमेश्वर शिव के यथार्थ स्वरूप का विवेचन तथा उनकी शरण में जाने से जीव के कल्याण का कथन"

  31. 231
  32. 230

    230. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 3 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) तीसरा अध्याय

    "भगवान् शिव की ब्रह्मा आदि पंचमूर्तियों, ईशानादि ब्रह्ममूर्तियों तथा पृथ्वी एवं शर्व आदि अष्टमूर्तियों का परिचय और उनकी सर्वव्यापकता का वर्णन"

  33. 229

    229. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 2 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - दूसरा अध्याय

    "उपमन्यु द्वारा श्रीकृष्ण को पाशुपत ज्ञान का उपदेश"

  34. 228

    228. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 1 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) पहला अध्याय

    "ऋषियों के पूछने पर वायुदेव का श्रीकृष्ण और उपमन्यु के मिलन का प्रसंग सुनाना, श्रीकृष्ण को उपमन्यु से ज्ञान का और भगवान् शंकर से पुत्र का लाभ"

  35. 227

    227. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 35 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - पैंतीसवां अध्याय

    "भगवान् शंकर का इन्द्ररूप धारण कर के उपमन्यु के भक्तिभाव की परीक्षा लेना, उन्हें क्षीरसागर आदि देकर बहुत से वर देना और अपना पुत्र मान कर पार्वती के हाथ में सौंपना, कृतार्थ हुए उपमन्यु का अपनी माता के स्थान पर लौटना"

  36. 226

    226. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 34 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - चौंतीसवां अध्याय

    "बालक उपमन्यु को दूध के लिये दु:खी देख माता का उसे शिव की तथा उपमन्यु की तीव्र तपस्या"

  37. 225

    225. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 33 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - तेंतीसवां अध्याय

    "पाशुपत-व्रत की विधि और महिमा तथा भस्मधारण की महत्ता"

  38. 224

    224. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 32 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - बत्तीसवां अध्याय

    "परम धर्म का प्रतिपादन, शैवागम के अनुसार पाशुपत ज्ञान तथा उसके साधनों का वर्णन"

  39. 223

    223. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 30 & 31 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - तीसवां एवं इकत्तीसवां अध्याय

    "ऋषियों के प्रश्न का उत्तर देते हुए वायुदेव के द्वारा शिव के स्वतन्त्र एवं सर्वानुग्राहक स्वरूप का प्रतिपादन"

  40. 222

    222. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 29 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - उन्तीसवां अध्याय

    "जगत् ‘वाणी और अर्थ रूप’ है - इसका प्रतिपादन"

  41. 221

    221. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 28 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - अठ्ठाईसवां अध्याय

    अग्नि और सोम के स्वरूपका विवेचन तथा जगत की अग्नीषोमात्मकता का प्रतिपादन

  42. 220

    220. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 27 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - सत्ताईसवां अध्याय

    "मन्दराचल पर गौरी देवी का स्वागत, महादेवजी के द्वारा उनके और अपने उत्कृष्ट स्वरूप एवं अविच्छेद्य सम्बन्ध पर प्रकाश तथा देवी के साथ आये हुए व्याघ्र को उनका गणाध्यक्ष बना कर अन्तःपुर के द्वार पर सोमनन्दी नाम से प्रतिष्ठित करना"

  43. 219

    219. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 26 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - छब्बीसवां अध्याय

    "गौरी देवी का व्याघ्र को अपने साथ ले जाने के लिये ब्रह्माजी से आज्ञा माँगना, ब्रह्माजी का उसे दुष्कर्मी बता कर रोकना, देवी का शरणागत को त्यागने से इनकार करना, ब्रह्माजी का देवी की महत्ता बता कर अनुमति देना, और देवी का माता- पिता से मिल कर मन्दराचल को जाना"

  44. 218

    218. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 25 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - पच्चीसवाँ अध्याय

    "पार्वती की तपस्या, एक व्याघ्र पर उनकी कृपा, ब्रह्माजी का उनके पास आना, देवी के साथ उनका वार्तालाप, देवी के द्वारा काली त्वचा का त्याग और उससे कृष्णवर्णा कुमारी कन्या के रूप में उत्पन्न हुई कौशिकी के द्वारा शुम्भ-निशुम्भ का वध"

  45. 217

    217. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 17 - 24 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - सत्तरहवें अध्याय से लेकर चौबिसवें अध्याय तक

    "भगवान् शिव का पार्वती तथा पार्षदों के साथ मन्दराचल पर जाकर रहना, शुम्भ निशुम्भ के वध के लिये ब्रह्माजी की प्रार्थना से शिव का पार्वती को 'काली’ कहकर कुपित करना और काली का ‘गौरी’ होने के लिये तपस्या के निमित्त जाने की आज्ञा माँगना"

  46. 216

    216. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 16 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - सोलहवाँ अध्याय

    "महादेव जी के शरीर से देवी का प्राकट्य और देवी के भ्रूमध्य-भाग से शक्ति का प्रादुर्भाव"

  47. 215

    215. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 15 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - पंद्रहवाँ अध्याय

    "ब्रह्माजी के द्वारा अर्द्धनारीश्वर रूप की स्तुति तथा उस स्त्रोत की महिमा"

  48. 214

    214. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 13 & 14 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - तेरहवाँ एवं चौदहवाँ अध्याय

    "भगवान् रुद्र के ब्रह्माजी के मुख से प्रकट होने का रहस्य, रुद्र के महामहिम स्वरूप का वर्णन, उनके द्वारा रुद्रगणों की सृष्टि तथा ब्रह्माजी के रोकने से उनका सृष्टि से विरत होना"

  49. 213

    213. Vayviya Sanhita (Purv Khand) - Adhyay 7 - 12 / वायवीय संहिता (पूर्वार्द्ध) - सातवें अध्याय से लेकर बारहवें अध्याय तक

    "ब्रह्माजी की मूर्छा, उनके मुख से रुद्रदेव का प्राकट्य, सप्राण हुए ब्रह्माजी के द्वारा आठ नामों से महेश्वर की स्तुति तथा रुद्र की आज्ञा से ब्रह्मा द्वारा सृष्टि-रचना"

  50. 212

Type above to search every episode's transcript for a word or phrase. Matches are scoped to this podcast.

Searching…

We're indexing this podcast's transcripts for the first time — this can take a minute or two. We'll show results as soon as they're ready.

No matches for "" in this podcast's transcripts.

Showing of matches

No topics indexed yet for this podcast.

Loading reviews...

ABOUT THIS SHOW

Welcome to "Sampurn Shiv Puran," a captivating podcast that takes you on a mystical journey into the world of Hindu mythology and spirituality. Join us as we dive deep into the rich tapestry of the Shiv Puran, bringing ancient tales of Lord Shiv to life through engaging storytelling, revealing profound wisdom, epic battles, and timeless teachings that have shaped Hindu culture for millennia. With nearly 500 chapters to explore, prepare to be captivated by the vast depth and breadth of the Shiv Puran in each episode.

HOSTED BY

Anupama Dhunsoiya

Frequently Asked Questions

How many episodes does Sampurn Shiv Puran have?

Sampurn Shiv Puran currently has 50 episodes available on PodParley. New episodes are automatically indexed when they're published to the podcast feed.

What is Sampurn Shiv Puran about?

Welcome to "Sampurn Shiv Puran," a captivating podcast that takes you on a mystical journey into the world of Hindu mythology and spirituality. Join us as we dive deep into the rich tapestry of the Shiv Puran, bringing ancient tales of Lord Shiv to life through engaging storytelling, revealing...

How often does Sampurn Shiv Puran release new episodes?

Sampurn Shiv Puran has 50 episodes. Check the episode list to see recent publication dates and frequency.

Where can I listen to Sampurn Shiv Puran?

You can listen to Sampurn Shiv Puran on PodParley by clicking any episode. We provide an embedded audio player for direct listening, and you can also subscribe via your preferred podcast app using the RSS feed.

Who hosts Sampurn Shiv Puran?

Sampurn Shiv Puran is created and hosted by Anupama Dhunsoiya.
URL copied to clipboard!