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Shiv Puran Katha in Hindi

शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,

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  1. 92

    शिव-पार्वती का विवाह आरंभ | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 48

    श्री शिव पुराण अध्याय 48 में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के आरंभ, भगवान शिव के कुल-गोत्र के रहस्य, माता पार्वती के कन्यादान और शिव-पार्वती के पाणिग्रहण की मंगलमयी कथा का वर्णन है।विवाह की रस्मों के दौरान शैलराज हिमालय भगवान शिव से उनके कुल, गोत्र, प्रवर और वेद शाखा का परिचय पूछते हैं। भगवान शिव मौन रहते हैं। तब नारद जी बताते हैं कि भगवान शिव निर्गुण, निराकार, परमब्रह्म और परमेश्वर हैं। उनका गोत्र और कुल नाद है—शिव नादमय हैं और नाद शिवमय है।इसके बाद हिमालय और मैना अपनी पुत्री पार्वती का विधिपूर्वक कन्यादान करते हैं। भगवान सदाशिव माता पार्वती का पाणिग्रहण स्वीकार करते हैं और चारों ओर शिव-पार्वती की जय-जयकार होने लगती है। गंधर्व गीत गाते हैं, अप्सराएं नृत्य करती हैं और देवता प्रसन्न होते हैं।शैलराज हिमालय भगवान शिव को अनेक बहुमूल्य वस्तुएं भेंट करते हैं और संपूर्ण हिमालय नगरी शिव-पार्वती के दिव्य विवाह के उत्सव में आनंदित हो उठती है।🙏 शिव-पार्वती की इस मंगलमयी विवाह कथा का श्रवण करें और महादेव एवं माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।हर हर महादेव 🔱ॐ नमः शिवाय 🙏

  2. 91

    वर-वधू द्वारा एक-दूसरे का पूजन | शिव-पार्वती विवाह कथा | श्री रुद्र संहिता अध्याय 47

    शिव पुराण अध्याय 47 में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के अत्यंत मंगलमय प्रसंग का वर्णन है। गिरिराज हिमालय वैदिक विधि से विवाह की तैयारियां पूर्ण करते हैं और माता पार्वती का सुंदर वस्त्रों एवं रत्नजड़ित आभूषणों से श्रृंगार किया जाता है।लग्न का शुभ समय आने पर भगवान शिव नंदी पर सवार होकर देवताओं, ऋषि-मुनियों और अपने गणों के साथ विवाह मंडप में पहुंचते हैं। माता मैना भगवान शिव की आरती उतारकर उनका स्वागत और पूजन करती हैं।इसके बाद विवाह वेदी पर माता पार्वती दही, अक्षत, कुश और जल से भगवान शिव का पूजन करती हैं। फिर महादेव भी अपनी होने वाली वधू देवी पार्वती का पूजन करते हैं। वर-वधू के एक-दूसरे का पूजन करने के बाद शिव और पार्वती विवाह वेदी पर विराजमान होते हैं और लक्ष्मी आदि देवियां उनकी आरती उतारती हैं।शिव-पार्वती विवाह के इस दिव्य और मंगलमय प्रसंग को सुनें और भगवान शिव एवं माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।

  3. 90

    शिव का परिछन और पार्वती का सुंदर रूप देख प्रसन्न होना | शिव-पार्वती विवाह कथा | श्री रुद्र संहिता - अध्याय 46

    शिव पुराण अध्याय 46 में भगवान शिव के सुंदर एवं दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। माता मैना भगवान शिव के मनोहर रूप को देखकर अत्यंत प्रसन्न होती हैं और उनकी आरती उतारती हैं। विवाह में उपस्थित देवता, ऋषि-मुनि, गंधर्व और अन्य जन भगवान शिव के दिव्य स्वरूप की प्रशंसा करते हैं।इसके बाद माता पार्वती कुलदेवी के पूजन के लिए अपनी सखियों और कुल की स्त्रियों के साथ बाहर आती हैं। उनके अनुपम सौंदर्य को देखकर सभी देवता नतमस्तक हो जाते हैं। स्वयं भगवान शिव भी माता पार्वती के सुंदर स्वरूप को देखकर हर्षित और मोहित हो जाते हैं।यह अध्याय शिव-पार्वती विवाह के मंगलमय प्रसंग को आगे बढ़ाता है।

  4. 89

    शिव का सुंदर व दिव्य स्वरूप दर्शन | शिव-पार्वती विवाह | श्री रुद्र संहिता - अध्याय 45

    शिव पुराण – श्री रुद्र संहिता अध्याय 45: शिव का सुंदर व दिव्य स्वरूप दर्शनइस अध्याय में माता मैना की शर्त स्वीकार करते हुए भगवान शिव अद्भुत, उत्तम और दिव्य सुंदर स्वरूप धारण करते हैं। उनका तेजस्वी और मनोहर रूप देखकर माता मैना अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भगवान शिव की पूर्व में की गई निंदा के लिए उनसे क्षमा मांगती हैं।भगवान शिव के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए हिमालय नगरी की स्त्रियां अपने सभी कार्य छोड़कर दौड़ी चली आती हैं। शिवजी के अलौकिक स्वरूप को देखकर सभी भगवान शिव और माता पार्वती की युगल जोड़ी की प्रशंसा करती हैं और पार्वती की कठोर तपस्या को धन्य मानती हैं।इसके बाद नगर की स्त्रियां अक्षत, कुमकुम, चंदन और पुष्पों से भगवान शिव का पूजन करती हैं। शिव-पार्वती के इस मंगलमय मिलन को देखकर देवता और नगरवासी अत्यंत प्रसन्न होते हैं।हर हर महादेव 🔱ॐ नमः शिवाय 🙏

  5. 88

    मैना का विलाप एवं हठ | शिव-पार्वती विवाह कथा | शिव पुराण - श्री रुद्र संहिता अध्याय 44

    शिव पुराण श्री रुद्र संहिता अध्याय 44 – मैना का विलाप एवं हठइस अध्याय में देवी पार्वती की माता मैना भगवान शिव के भयंकर स्वरूप को देखकर अत्यंत व्याकुल हो जाती हैं और शिव-पार्वती विवाह का विरोध करती हैं। देवता, सप्तऋषि, नारदजी, शैलराज हिमालय और स्वयं माता पार्वती उन्हें भगवान शिव की वास्तविक महिमा समझाने का प्रयास करते हैं।अंततः श्रीहरि विष्णु मैना को भगवान शिव के निर्गुण-सगुण स्वरूप और उनकी दिव्य माया का ज्ञान कराते हैं। मैना का क्रोध शांत होने लगता है और वे एक शर्त रखती हैं—यदि महादेव सुंदर शरीर धारण करें, तो वे सहर्ष अपनी पुत्री पार्वती का विवाह उनसे कर देंगी।यह अध्याय भगवान शिव की दिव्य माया, माता पार्वती की अटूट शिवभक्ति और शिव-पार्वती विवाह प्रसंग को दर्शाता है।हर हर महादेव 🙏 ॐ नमः शिवाय 🔱

  6. 87

    शिवजी की अनुपम लीला | शिव पुराण - श्री रुद्र संहिता - अध्याय 43

    शिव पुराण के तैंतालीसवें अध्याय में भगवान शिव की अद्भुत और रहस्यमयी लीला का वर्णन किया गया है। इस अध्याय में देवी मैना भगवान शिव के दर्शन की इच्छा प्रकट करती हैं। पहले वे देवताओं और भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप को देखकर उन्हें ही शिव समझ बैठती हैं। बाद में नारद मुनि उन्हें बताते हैं कि भगवान शिव तो समस्त ब्रह्मांड के स्वामी हैं।इसके बाद भगवान शिव अपने भूत-प्रेत, पिशाच और शिवगणों सहित ऐसे अद्भुत रूप में प्रकट होते हैं कि देवी मैना भयभीत होकर मूर्छित हो जाती हैं। यह प्रसंग भगवान शिव की अलौकिक लीला और अहंकार के नाश का गहरा संदेश देता है।यदि आप संपूर्ण शिव महापुराण सुनना चाहते हैं, तो इस श्रृंखला से जुड़े रहें।🔱 इस अध्याय में जानिए:देवी मैना की भगवान शिव के दर्शन की इच्छाभगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप का वर्णनभगवान शिव के वास्तविक एवं अद्भुत स्वरूप का प्राकट्यशिवगणों का भयंकर लेकिन दिव्य रूपमाता मैना का अभिमान और उसका नाशभगवान शिव की अनुपम लीलाहर हर महादेव।

  7. 86

    बारात की अगवानी और अभिनंदन - शिव पुराण - श्री रुद्र संहिता - अध्याय 42

    शिव पुराण के बयालीसवें अध्याय में भगवान शिव की दिव्य बारात का हिमालय नगरी में भव्य स्वागत और अभिनंदन वर्णित है। गिरिराज हिमालय स्वयं भगवान शिव और समस्त देवताओं का स्वागत करते हैं। देवताओं, ऋषि-मुनियों तथा बारातियों के सम्मान, भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, विष्णु और ब्रह्मा की उपस्थिति तथा पार्वती विवाह की तैयारियों का अत्यंत सुंदर वर्णन इस अध्याय में मिलता है।यदि आप सम्पूर्ण शिव पुराण का श्रवण क्रमबद्ध रूप से करना चाहते हैं, तो इस श्रृंखला से अवश्य जुड़ें।🙏 हर हर महादेव!

  8. 85

    मंडप वर्णन व देवताओं का भय | शिव पुराण - श्री रुद्र संहिता - अध्याय 41

    शिव पुराण के अध्याय 41 में विश्वकर्मा द्वारा निर्मित दिव्य विवाह मंडप का अद्भुत वर्णन मिलता है। नारद जी भगवान शिव को हिमालयपुरी के भव्य मंडप की जानकारी देते हैं, जहाँ देवताओं, ऋषियों और अनेक जीवों की इतनी जीवंत प्रतिमाएँ बनाई गई थीं कि सभी आश्चर्यचकित रह गए। इस अध्याय में देवताओं के मन में उत्पन्न भय, भगवान शिव का उन्हें दिया गया आश्वासन तथा शिव बारात के हिमालयपुरी पहुँचने का दिव्य प्रसंग वर्णित है।यदि आप शिव पुराण सम्पूर्ण, शिव-पार्वती विवाह कथा, महादेव की दिव्य लीलाएँ, और सनातन धर्म की पौराणिक कथाएँ सुनना चाहते हैं, तो इस श्रृंखला से अवश्य जुड़ें।🙏 हर हर महादेव 🙏

  9. 84

    भगवान शिव की बारात का हिमालयपुरी की ओर प्रस्थान | शिव पुराण - श्री रुद्र संहिता - अध्याय 40

    भगवान शिव की बारात का हिमालयपुरी की ओर प्रस्थान, शिव पुराण के अध्याय 40 में भगवान शिव की दिव्य बारात के हिमालयपुरी की ओर प्रस्थान का अद्भुत वर्णन किया गया है। इस अध्याय में नंदी, वीरभद्र, भैरव, शिवगण, भगवान विष्णु, ब्रह्माजी, इंद्र, ऋषि-मुनि, गंधर्व, किन्नर तथा समस्त देवताओं के साथ भगवान शिव की अलौकिक बारात का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया गया है।यदि आप शिव पुराण का सम्पूर्ण पाठ, भगवान शिव की कथाएँ, शिव-पार्वती विवाह, तथा सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों का अध्ययन करना चाहते हैं, तो यह श्रृंखला आपके लिए है।🙏 हर हर महादेव 🙏

  10. 83

    शिवजी का देवताओं को निमंत्रण | शिव पुराण - श्री रुद्र संहिता - अध्याय 39

    शिव पुराण के अध्याय 39 में भगवान शिव द्वारा अपने दिव्य विवाह के लिए समस्त देवताओं, ऋषियों, सिद्धों और लोकपालों को निमंत्रण देने का पावन प्रसंग वर्णित है। नारदजी भगवान शिव का संदेश लेकर सभी देवताओं को आमंत्रित करते हैं। कैलाश पर्वत पर देवताओं का आगमन, शिवजी का दिव्य श्रृंगार और शिव-पार्वती विवाह की भव्य तैयारियाँ इस अध्याय की मुख्य विशेषताएँ हैं।यदि आप शिव महापुराण की संपूर्ण कथा सुन रहे हैं, तो यह अध्याय अवश्य देखें और भगवान शिव की इस दिव्य लीला का आनंद लें।🔱 अध्याय 39 – शिवजी का देवताओं को निमंत्रण🔱 शिव-पार्वती विवाह की भव्य तैयारी🔱 कैलाश पर देवताओं का आगमन🔱 शिव महापुराण हिंदी कथा🙏 हर हर महादेव 🙏

  11. 82

    शिव पुराण - विश्वकर्मा द्वारा दिव्य मंडप की रचना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 38

    शिव पुराण के अध्याय 38 में विश्वकर्मा द्वारा भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के लिए बनाए गए अद्भुत मंडप का विस्तृत वर्णन मिलता है। शैलराज हिमालय के आदेश पर देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा ने ऐसा अलौकिक मंडप तैयार किया जिसे देखकर देवता, ऋषि और स्वयं भगवान शिव भी आश्चर्यचकित हो गए।इस अध्याय में दिव्य मंडप, देवताओं के लोकों, सुंदर मूर्तियों, स्वर्गीय सजावट और शिव विवाह की भव्य तैयारियों का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया है।🔱 अध्याय 38 – विश्वकर्मा द्वारा दिव्य मंडप की रचना🔱 शिव-पार्वती विवाह की भव्य तैयारी🔱 शिव महापुराण हिंदी कथा🔱 सनातन धर्म की प्रेरणादायक कथा🙏 हर हर महादेव 🙏

  12. 81

    हिमालय का लग्न पत्रिका भेजना | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 37

    शिव पुराण के अध्याय 37 में वर्णन मिलता है कि कैसे शैलराज हिमालय ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह हेतु लग्न पत्रिका तैयार करवाई और उसे कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के पास भेजा। इस अध्याय में विवाह की तैयारियों, शुभ मुहूर्त, देवताओं के आमंत्रण और शिव-पार्वती विवाह के पवित्र प्रसंग का सुंदर वर्णन किया गया है।यदि आप शिव पुराण की सम्पूर्ण कथा सुनना चाहते हैं, तो इस अध्याय को अंत तक अवश्य सुनें।🔱 अध्याय 37 – हिमालय का लग्न पत्रिका भेजना🔱 भगवान शिव एवं माता पार्वती विवाह कथा🔱 शिव महापुराण हिंदी कथा🔱 सनातन धर्म एवं पुराण कथाएं🙏 हर हर महादेव 🙏

  13. 80

    सप्तऋषियों का शिव के पास आगमन | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 36

    शिव पुराण के अध्याय 36 में सप्तऋषि कैलाश पर्वत पहुँचकर भगवान शिव को हिमालय और मैना की स्वीकृति का समाचार देते हैं। वे भगवान शिव से वैदिक रीति से देवी पार्वती का पाणिग्रहण संस्कार करने का अनुरोध करते हैं। इस अध्याय में शिव-पार्वती विवाह की तैयारियों का शुभारंभ होता है और सभी देवताओं, ऋषियों तथा दिव्य शक्तियों को विवाह में आमंत्रित करने की चर्चा होती है।✔ सप्तऋषियों का कैलाश आगमन✔ भगवान शिव को विवाह का संदेश✔ पार्वती के वाग्दान की सूचना✔ शिवजी की विनम्रता और विवाह पर चर्चा✔ देवताओं और ऋषियों को विवाह हेतु आमंत्रणयदि आपको शिव पुराण की दिव्य कथाएं पसंद आती हैं तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें।ॐ नमः शिवाय#ShivPuran #ShivPuranHindi #Adhyay36 #ShivParvatiVivah #Mahadev #Kailash #Saptarishi #ShivKatha #SanatanDharma #LordShivaइस अध्याय में जानिए:

  14. 79

    हिमालय का शिवजी के साथ पार्वती के विवाह का निश्चय करना | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 35

    शिव पुराण के अध्याय 35 में सप्तऋषियों और देवी अरुंधती द्वारा हिमालय और मैना को समझाने के बाद शिव-पार्वती विवाह का निर्णय लिया जाता है। हिमालय भगवान शिव की महिमा को स्वीकार करते हुए अपनी पुत्री पार्वती को शिवजी की अमानत घोषित करते हैं। सप्तऋषि पार्वती को आशीर्वाद देते हैं और विवाह के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित करते हैं।इस अध्याय में जानिए:✔ भगवान शिव की सर्वोच्च महिमा✔ हिमालय द्वारा विवाह की स्वीकृति✔ पार्वती को सप्तऋषियों का आशीर्वाद✔ शिव-पार्वती विवाह की तैयारी✔ शुभ विवाह मुहूर्त का निर्धारणयदि आपको शिव पुराण की कथाएं पसंद आती हैं तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें।#ShivPuran #ShivPuranHindi #Adhyay35 #ShivParvatiVivah #LordShiva #Parvati #ShivKatha #HindiPauranikKatha #Mahadev #SanatanDharma

  15. 78

    पद्मा–पिप्पलाद की कथा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 34

    शिव पुराण के चौंतीसवें अध्याय में देवी पद्मा और ऋषि पिप्पलाद की प्रेरणादायक कथा मिलती है। इस अध्याय में देवी पद्मा के पतिव्रत धर्म, धर्मराज द्वारा ली गई परीक्षा, शाप और वरदान का वर्णन है।इस कथा में बताया गया है कि कैसे देवी पद्मा ने अपने वृद्ध पति पिप्पलाद के प्रति अटूट निष्ठा दिखाई और धर्मराज से वरदान प्राप्त किया।

  16. 77

    राजा अनरण्य और पद्मा विवाह की कथा - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 33

    शिव पुराण के तैंतीसवें अध्याय में जानिए राजा अनरण्य, उनकी पुत्री पद्मा और ऋषि पिप्पलाद की अद्भुत कथा। इस अध्याय में धर्म, त्याग, कुल रक्षा और भाग्य की गहरी शिक्षा मिलती है। सुनिए शिव पुराण अध्याय 33 हिंदी में और जानिए कैसे राजा अनरण्य ने अपने कुल की रक्षा के लिए कठिन निर्णय लिया।✨ इस वीडियो में:राजा अनरण्य की कथादेवी पद्मा का विवाहऋषि पिप्पलाद की कहानीधर्म और त्याग का महत्वशिव पुराण हिंदी कथाअगर आपको शिव पुराण की कथाएं पसंद हैं तो वीडियो को Like, Share और Channel Subscribe जरूर करें।#ShivPuran #ShivMahapuran #Adhyay33 #ShivPuranHindi #PippaladRishi #PadmaKatha #Mahadev #ShivKatha #HindiKahani #Bhakti

  17. 76

    वशिष्ठ मुनि का उपदेश - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 32

    शिव पुराण के बत्तीसवें अध्याय में महर्षि वशिष्ठ हिमालय को भगवान शिव के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराते हैं। इस अध्याय में शिव-पार्वती विवाह का महत्व, भगवान शिव की महिमा और देवी पार्वती के दिव्य स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है।महर्षि वशिष्ठ बताते हैं कि भगवान शिव स्वयं सृष्टि के पालनकर्ता और परमेश्वर हैं तथा देवी पार्वती आदिशक्ति हैं। यह अध्याय शिवभक्तों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक है।

  18. 75

    सप्तऋषियों ने हिमालय और मैना को समझाया | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 31

    शिव पुराण के इकतीसवें अध्याय में सप्तऋषियों का हिमालय के घर आगमन और देवी मैना को समझाने की कथा वर्णित है। इस अध्याय में सप्तऋषि हिमालय और मैना को भगवान शिव की महिमा बताते हैं और समझाते हैं कि पार्वती का विवाह शिवजी से ही होना चाहिए।इस कथा में तारकासुर के अत्याचार, शिव-पुत्र की आवश्यकता, पार्वती की तपस्या और शिव-पार्वती विवाह के दिव्य कारण का वर्णन मिलता है।shiv puran adhyay 31, shiv puran chapter 31 hindi, सप्तऋषियों का आगमन, हिमालय को समझाना, शिव पार्वती विवाह, parvati vivah katha, shiv puran hindi, shiv katha hindi, mahadev katha, saptarishi shiv puran, hindu mythology hindi, sanatan dharm katha#ShivPuran #Adhyay31 #Saptarishi #ShivParvati #Mahadev #ParvatiVivah #ShivKatha #SanatanDharma

  19. 74

    ब्राह्मण वेष में पार्वती के घर गए शिव | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 30

    शिव पुराण के तीसवें अध्याय में भगवान शिव ब्राह्मण वेष धारण करके शैलराज हिमालय के घर जाते हैं। वहाँ वे हिमालय को पार्वती और शिव विवाह के विषय में परखते हैं और शिवजी के गुण-दोषों की चर्चा करते हुए हिमालय की परीक्षा लेते हैं।इस अध्याय में भगवान शिव की लीला, हिमालय की भक्ति, पार्वती की पहचान और शिव-पार्वती विवाह से पहले की दिव्य परीक्षा का वर्णन मिलता है।

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शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,

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शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण...

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