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All Episodes

Lalit Sharma — 282 episodes · page 1 of 3

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Title
1

२३८. चेतना के विभिन्न रूप

2

२३७. विकास आत्मा का अंश नहीं

3

२३६. गुरु के संग रहने के कारण

4

२३५. पांच तत्व,जो मन को प्रभावित करते हैं

5

२३४. पांचों इंद्रियों का स्वभाव है ज्ञान

6

२३३. इरादा

7

२३२. रहस्यों का ज्ञान

8

२३१. पांच रहस्य

9

२३०- नया सोचो

10

२२९. उदासीनता दूर करने के लिए आक्रामकता

11

२२८. मृत्यु और आध्यात्मिकता

12

२२७. अनन्य प्रेम में

13

२२६. हमेशा ?

14

२२५. ध्वनि - विश्वास

15

२२४. आध्यात्मिकता और उत्सव

16

२२३. जीवन संग्राम

17

२२२. नकारात्मकता को सहारा चाहिए

18

२२१. करुणा और कर्म

19

२२०. दो घटनाएं

20

२१९. विजयी कौन ?

21

२१८. प्रतिरक्षा और रूपांतरण

22

२१७. ज्ञान - एक बोझ

23

२१६. अणु व्रत

24

२१५. ईर्ष्या व द्वेष पर कैसे विजय पायें ?

25

२१४. गुरु लक्ष्य हैं

26

२१३. सत्यं परं धीमहि

27

२१२. धन्यवाद ऊपरी हो

28

२११. परिवर्तन और प्रेम

29

२१०. प्रेम और वैराग्य

30

२०९. धर्म और राजनीति

31

२०८. भाग्यशाली हैं वे जो उकता गए हैं

32

२०७. संदेश

33

२०६. सफलता

34

२०५. आस्था : चेतना का स्वभाव

35

२०४. आसान रास्ता

36

२०३. आशीर्वाद

37

२०२. एक गहरा विश्राम

38

अनमोल हीरा मोती

39

२०१. जीवन अत्यंत छोटा है, जीवन अनंत है

40

२००. अहिंसा की आवाज

41

१९९. प्रार्थना

42

१९८. तुम और तुम्हारा समय

43

१९७. आत्म-ज्ञान की प्राप्ति

44

दुनिया से संबंध

45

१९६. बुद्धि

46

१९५. संशय और निकटता

47

१९४. प्रेम और वासना

48

१९३. दीक्षा

49

१९२. सुरक्षा-विहीन होना

50

१९१. प्रेम प्रज्ञा

51

मैं

52

१९०. शून्यता का विस्तार

53

१८९. आत्मा का उद्दीपन

54

१८८. स्वागत और प्रतिरोध

55

१८७. क्या तुम प्रभु की परीक्षा लेते हो या प्रभु तुम्हारी परीक्षा लेते हैं ?

56

१८६. परम आनंद

57

१८५. पुनरावृत्ति और स्वच्छता

58

१८४. संगठन

59

१८३. अनिश्चितता

60

जीवन में असुरक्षा - कहानी

61

१८२. वासना का शोधन

62

१८१. केंद्रियता और विस्तार

63

१८०. तप

64

१७९. जीवन का उद्देश्य

65

१७८. प्रेम के क्या चिन्ह हैं ?

66

१७७. प्रशंसा

67

१७६. वापस आने का कारण

68

१७५. विभिन्न प्रकार की समझ

69

१७४. यज्ञ

70

जो जमा करेंगे, वही काम आयेगा

71

१७३. अपनी गलतियों को मत सुधारो !

72

१७१. करते जाओ जब तक वह तुम्हारा स्वभाव न बन जाए

73

१७०. विश्राम और कर्म

74

साथी हाथ बढ़ाना

75

१६९. अधीन, स्वाधीनता, परस्पर निर्भरता और एकता

76

परख, संबंधों की

77

१३३/२. क्रिसमस - वृक्ष

78

१६८. चेतना का विस्तार शांति है?

79

१६७. गायन, संपर्क और अहं

80

१६६. क्या तुम इसलिए किसी को प्रेम करते हो क्योंकि वे महान और विशिष्ट हैं ?

81

१६५. निष्ठा

82

१६४. अहं केवल एक अणु है

83

१६३. क्या तुम जानते हो मुझमें रहम नहीं ?

84

१६२. "मैं हूं" कहने के लिए साहस चाहिए

85

१६१. प्रेम का पथ है समर्पण

86

१६०. उदारता चित्त की विशेषता है

87

१५९. अपने अधिकार त्याग दें

88

१५८. यदि तुम ध्यान नहीं कर सकते - बेवकूफ हो जाओ

89

१२५. दीपावली

90

१५७. तार्किक बुद्धि के परे

91

१५६. कौन पहले उठता है ?

92

१५५. निष्ठा तुम्हारी संपदा है

93

१५४. अपनी उत्कंठा को तीव्र करो

94

१५३. जप का मोल

95

१५२. तुम विशेषाधिकारी हो

96

१५१. उलझन और निर्णय

97

सत्य की असत्य पर विजय

98

१५०. मेरा पीछा न करो

99

जीवन में 'कृष्ण' और 'कंस' का मिलना

100

१४९. कोमलता और प्रबलता