All Episodes
Lalit Sharma — 282 episodes · page 2 of 3
१४८. तर्क, वितर्क और कुतर्क
१४७. धारणाएं और अभिव्यक्ति
१४६. स्वप्न
१४५. अंदर - बाहर
१४४. तुम दसवें हो
१४३. औपचारिकता और सौजन्यता
कहानी एक गधे की
१४२. शिव और वशी
१४१. सम्मान
१४०. जब एक ग़लती गलती नहीं
१३९. संस्था और भक्ति
१३८. सुरक्षा का भ्रम
क्रोध आता कहां से है ?
१३७. सहन करना और स्वीकारना सद्गुण नहीं
१३६. राजनीति
१३५. तुम विशुद्ध ऊर्जा हो
१३४. बुद्धिमान व्यक्ति बुरे समय में भी खुश रहता है
१३३/१. उत्सव
जीवन की गुणवत्ता (Quality)
१३२. अनंत के चेहरे
१३१. काल और मन
१३०. बुद्धि
१२९. स्मृति
१२८. अहं
१२७. प्रेम की तुम्हारी अभिव्यक्तियां
१२६. प्रेम तो तुम्हारा अस्तित्व ही है
१२४. भाग्यशाली महसूस करो
१२३. शिशु रूप में ईश्वर
१२२. यज्ञ
१२१. साधक के छः लक्षण
१२०. सतगुरु के पांच लक्षण
११९. पांच अंतर्दृष्टियां
११८. केंद्रित कैसे हों
११७.एक बड़ी उलझन
११६. सत्य मिल जाने पर
११५. रक्षा बंधन
प्रश्नोत्तर : ११४. खिड़की के पट
११४. खिड़की के पट
११३. त्याग
११२. सम्मान
१११. सब-कुछ को व्यक्तिगत और सर्वजनीय बना लो
११०.प्रेम को प्रेम ही रहने दो
१०९. तुम किसके साथ सहज होते हो ?
१०८. सुनहरा नक़ाब
१०७. व्यक्तिगत और अव्यक्तिगत
१०६. संवेदनशीलता एवं सबलता
दृष्टिकोण- एक अर्धसत्य
१०५. प्रत्येक पत्थर अनमोल है
१०४. काल के परे ईश्वर
१०३. दु:ख से निकलने का मार्ग
१०२. उत्सर्ग और निष्ठा
राग द्वेष का बंधन
१०१. संसार तुम्हारा है
१००. स्वयं के प्रति धारणाएं छोड़ दो
९९. तुम्हारे सौंदर्य को क्या सुशोभित करता है?
९८. प्रेम के तीन रूप
काम बिगाड़े आपणा, लोग करें बुराई । काम सुधारे आपणा, लोग करें भलाई ।।
९७. सत्संग आश्रय है
धारणा और विवेक
सफलता की बाधा
९६. पुरातन मूल - वृत्ति
९५. अपने अवगुणों को बढाओ
९४. सरल या जटिल ?
९३. मित्र शत्रु है, शत्रु एक मित्र
९२. ईश्वर का ग्यारहवां आदेश
९१. शिव और कृष्ण एक ही हैं
९०. अपनी खुशियां बांटो
८९. सेवा का आशीर्वाद
८८. प्रिय बनो
प्रशंसा का जाल
८७. अज्ञात ज्ञान
८६. ज्ञान का अपच
हर कोई चाहता है, एक मुट्ठी आसमां
जीवन के अनमोल रत्न
८५. सबसे बुरी अवस्था में भी संसार को स्वीकार करो
८४. भक्ति
८३. पद्मनाभ : कमल-नाभि
८२. नववर्ष का उत्सव
८१. समर्पण और आत्मनिर्भरता
आवाज
सबको सन्मति दे भगवान
८०. विश्व के पांच पहलू
७९. सुख
अस्सी नब्बे पूरे सौ
सत्य - जीवन का एकमेव ध्येय
मोक्ष - गृहस्थ एवं सन्यस्थ
७८. रूखे व्यवहार का सामना करना
७७. श्रद्धा और प्रसन्नता
७६. आकांक्षा और प्रार्थना
७५. संघर्ष का अंत
७४. ईश्वर को देखो
७३. आत्मा के एकांत में
७२. निष्कपटता और आशीर्वाद
७१. मौन का उत्सव
७०. नवरात्रि की नौ रातें
६९. संपूर्ण संतुलन
६८. क्या अधिक महंगा है : तुम्हारी मुस्कान या तुम्हारा गुस्सा ?
६७. जो झरना ऊपर की ओर जाता है।
६६. एक पका हुआ बर्तन
६५. चाहे तुम जीतो या हारो