Skip to content
#
Title
401

E 109. योग-वेदान्त - स्वप्न क्या है? भाग 3- जाग्रत स्वप्न और सुषुप्ति का विश्लेषण - माण्डूक्य मत ।

402

Episode 108. पातञ्जल योग- स्वप्न क्या है? (भाग 2)- वेदान्तदृष्टि।

403

E 107. स्वप्न क्या है(भाग 1)- पातञ्जल योग और वेदान्तमें स्वप्न की स्थिति।

404

Episode 106. पातञ्जल योग, सूत्र 1.11. स्मृति की परिभाषा-

405

E 105. योगशास्त्रकी निद्रा और वेदान्त (माण्डूक्य उपनिषद)की सुषुप्ति का तुलनात्मक विश्लेषण।

406

E 104. पातञ्जल योग, सूत्र 10. निद्राकी परिभाषा (भाग 2)

407

E103. योगसूत्र 1.10 और 11. निद्रा क्या है?तथा स्मृति क्या है? प्रमाण विपर्यय और विकल्प की समीक्षा।

408

E 102. पातञ्जल योग, सूत्र 1.9 - विकल्प की परिभाषा। विपर्यय और विकल्पमें अन्तर।

409

Episode 101. पातञ्जल योग, सूत्र 1.8. विपर्यय की परिभाषा

410

E 100. पातञ्जल योग, सूत्र 1.7. प्रमाण- प्रत्यक्षानुमानागमाः प्रमाणानि।

411

E 99. पातञजल योग, सूत्र 5 और 6 - विशेष टिप्पणी- बुद्धि क्या है ?

412

E 98. पातञ्जल योग, सूत्र 1.5. चित्तवृत्तियों के पाँच प्रकार

413

Episode 97. पातञ्जल योग, सूत्र 1.4- वृत्तिसारूप्यमितरत्र।

414

Episode 96. पातञ्जल योगसूत्र 1.3 - योग का फल

415

Episode 95. पातञ्जल योगसूत्र 1.2. योग की परिभाषा (भाग 3)

416

Episode 94. योगकी परिभाषा (भाग 2)

417

Episode 93. पातञ्जल योगसूत्र 1.2 योगकी परिभाषा (भाग 1)

418

मानस, बालकाण्ड, 35.6-7, 36.1-2 ग्रन्थका नामकरण

419

एपिसोड 92. योगशास्त्र एवं षड्दर्शन।

420

एपिसोड 91. पातञ्जल योगसूत्र। सम्बन्ध चतुष्टय। प्रथम सूत्र में अनुशासन शब्द का अर्थ।

421

एपिसोड 90. पातञ्जल योगदर्शन, सूत्र 1.1. ग्रंथरचनाकी प्रतिज्ञा एवं मङ्गलाचरण।

422

एपिसोड 89. मानस, बाल, 34 एवं 35.1-5 रचना का शुभारम्भ

423

एपिसोड 88. योगशास्त्र- विषय प्रवेश भाग 2

424

एपिसोड 87. श्रीरामचरित मानस, बालकाण्ड, 33

425

एपिसोड 86. पातञ्जल योगसूत्र - विषयप्रवेश

426

मानस, बालकाण्ड,32.1-5 रामचरित्र का माहात्म्य

427

मानस, बालकाण्ड। 31.4-7- रामकथाकी सोलह कलायें

428

मानस, बालकाण्ड, 30.1-3 रामचरित मानसकी रचनाका उद्देश्य

429

मानस, बालकाण्ड, 30

430

मानस, बालकाण्ड, 29

431

मानस, बालकाण्ड, 28

432

मानस, बालकाण्ड,27

433

श्रीरामचरित मानस, बालकाण्ड, 26

434

मानस, बालकाण्ड। 25

435

योगवासिष्ठ ३.८ ग्रंथ की सर्वश्रेष्ठता

436

योगवासिष्ठ ३.९.१-११, तथा भगवद्गीता १०.९-१० एवं १८.१७

437

मानस, बालकाण्ड २४- रामावतार से बडा़ है नामावतार

438

मानस, २२-२३

439

मानस, बालकाण्ड,२०-२१

440

मानस, बालकाण्ड, 20.2-3

441

योगवासिष्ठ, 3.7- परमात्माका स्थान एवं स्वरूप

442

मानस 19.4 एवं 20.1-2

443

योगवासिष्ठ, 3.5-6 मन की उत्पत्ति

444

मानस,19.3 रामनामका प्रभाव

445

योगवासिष्ठ, 3.4 मनका स्वरूप, भाग 1

446

मानस, बालकाण्ड,19..2एवं श्रीरामोत्तरतापिन्युपनिषत्

447

योगवासिष्ठ, 3.2भाग2 एवं 3.3

448

मानस। बालकाण्ड, 19.1, 2, रामोत्तरतापिन्युपनिषद् - प्रणव और राम शब्दकी व्याख्या

449

योगवासिष्ठ, 3.2 भाग 1

450

मानस, बालकाण्ड. 19.1

451

योगवासिष्ठ, 3.1 भाग 2.

452

मानस, बालकाण्ड, 16 तथा गायत्री मंत्र और देवीभागवतका प्रथम श्लोक।

453

योगवासिष्ठ, उत्पत्तिप्रकरण 3.3-12 - उत्पत्तिप्रकरण का औचित्य। आत्माकी परिभाषा।

454

मानस, बालकण्ड, 16- 17। अवधपुरी एवं दशरथ इत्यादिकी वन्दना

455

योगवासिष्ठ,2.18-20 मुमुक्षुव्यवहार प्रकरणका उपसंहार

456

योगवासिष्ठ 2.17-18 ग्रन्थकी श्लोकसंख्या 32000. इसकी बडी़ विशेषता यह है कि यह युक्तियों से भरा है।

457

मानस, बालकाण्ड, 14(च) से 15.1-3

458

योगवासिष्ठ 2.16- मोक्षका चौथा द्वारपाल सत्संग

459

श्रीरामचरित मानस, बालकाण्ड, 14.4 से 14(ङ)।

460

योगवासिष्ठ 2.15, मनुस्मृति 4.12 एवं श्रीमद्भगवद्गीता 12.13-19 मोक्षका तीसरा द्वारपाल- संतोष।

461

मानस, बालकाण्ड, 13.2-5 एवं 14.1-3.

462

चर्पट पञ्जरिका स्तोत्रम् 12, योगवासिष्ठ, 2.14. मोक्षका दूसरा द्वारपाल- विचार।

463

मानस, बाल. 12 एवं 13.1

464

योगवासिष्ठ 2.13, अपरोक्षानुभूतिः 6, तत्वबोधः 7- शम और उसका प्रभाव। शमशील के लक्षण क्या हैंं ?

465

श्रीरामचरित मानस, बालकाण्ड, 11.1-5

466

योगवासिष्ठ 2.11 श्रोता और वक्ता के लक्षण, योगवासिष्ठका उपदेश राजविद्या है।

467

श्रीरामचरितमानस, बाल 9.2 - 10क

468

देवीभागवत+भगवद्गीता। गहना कर्मणो गतिः। कर्मफल भोगना ही पड़ता है।उसका निवारण भगवान् भी नहीं कर सकते।

469

देवीभागवत,4.1। श्रीकृष्ण और पाण्डवोंके प्रारब्ध और कर्म के सम्बन्धमें जनमेजय के रोचक प्रश्न।

470

देवीभागवत, 3.9-11। तीनों गुणोंके मिश्रणका वर्णन।भगवतीके बीजमंत्र ऐं का बिन्दुरहित उच्चारण का चमत्कार

471

देवीभागवत 3.8। सत्वगुण रजोगुण और तमोगुण का विवेचन।

472

देवीभागवत 3.7। निर्गुण तत्वनिरूपण। महाभूतोंके गुण।

473

देवीभागवत 3.4-6। ब्रह्मा विष्णु महेशको देवीने स्त्री बना दिया।ब्रह्माके सौ वर्षतक तीनोंस्त्री बनेरहे

474

देवीभागवत 3.3। विभिन्न ब्रह्माण्डोंके विभिन्न ब्रह्मा विष्णु महेश।

475

देवीभागवत 3.1-2। जनमेजय के प्रश्न व्यासजीसे,व्यासके प्रश्न नारदजीसे,नारदके प्रश्न ब्रह्माजीसे।

476

देवीभागवत 1.17,18,19। शुकदेवजीको जनक से उपदेश एवं शुकदेवजी का विवाह एवं सन्तानें।

477

देवीभागवत, 1.10,14,15। व्यासजी की तपस्या, शुकदेव की उत्पत्ति, व्यास-शुकदेव संवाद

478

देवीभागवत। शक्तितत्व निरूपण।

479

देवीभागवत 1.6। श्रवणके प्रकार , साहित्य के प्रकार । मधु कैटभ की उत्पत्ति।

480

देवीभागवत 1.4 । विष्णुभी भगवती की ही उपासना करते हैं।

481

देवीभागवत। त्रिपुरसुन्दरीका अर्थ।

482

देवीभागवत की भूमिका

483

देवीभागवत। पुराणों के लक्षण और नाम।विरोधाभास का निराकरण।

484

देवीभागवत माहात्म्य २. स्यमन्तक मणि प्रकरण

485

श्रीमणिरत्नमाला (प्रश्नोत्तरी) श्लोक ९-११, प्रश्न संख्या २९-३७

486

देवीचर्चा। श्रीमद्देवीभागवत। सौन्दर्य लहरी।

487

श्रीमणिरत्नमाला (प्रश्नोत्तरी) 7

488

योगवासिष्ठ 2.10. सर्वज्ञ वसिष्ठकी उत्पत्ति और ब्रह्माजी द्वारा उपदेश।

489

मानस, बाल 9.1-2। खल परिहास होइ हित मोरा।

490

श्रीमणिरत्नमाला 6

491

योगवासिष्ठ, 2.9 शुभवासनाओं का आश्रय लेकर अशुभ वासनाओं पर विजय प्राप्त करें।

492

श्री मणिरत्नमाला भाग 5 श्लोक 4-5

493

मानस, मंगलाचरण, बाल. 8

494

योगवासिष्ठ, 2.8 । भाग्य केवल भ्रम है। इस भ्रमका अधिष्ठान पुरुषार्थ है।

495

मानस, बाल, दो. 7-7क और चौ 8.1

496

श्रीमणिरत्नमाला (प्रश्नोत्तरीत) भाग 4(श्लोक 3)

497

योगवासिष्ठ,2.7. भाग्य और पुरुषार्थ भाग 5

498

मानस, बाल. 7-1 से 6। सत्संग और कुसंग का प्रभाव।

499

धर्म और तर्क।

500

श्रीमणिरत्नमाला (प्रश्नोत्तरी) 3। प्रश्न 1-4।