PODCAST · health
Dr Pradeep kushwaha | Brahm Homeopathy
by Brahm Homeopathy | Dr Pradeep kushwaha
PANCREATITIS TREAETMENTSWHAT IS PANCREATITIS?Pancreatitis is a condition characterized by inflammation of the pancreas, a gland responsible for digestion and blood sugar regulation. There are two main types: acute and chronic. Acute pancreatitis, often severe but usually resolved with medical treatment, can be caused by factors like gallstones, alcohol consumption, infections, trauma, or high triglycerides. Symptoms include abdominal pain, nausea, vomiting, fever, rapid pulse, and tender abdomen. Chronic pancreatitis, on the other hand, is a long-term inflammation that can cause permanent
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एसिड रिफ्लक्स से खांसी कैसे होती है? | Germ me khansi kyon hoti hain?
एसिड रिफ्लक्स से खांसी कैसे होती है? | Germ me khansi kyon hoti hain? #gerd #health #treatment #reels #viral Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01https://www.brahmhomeo.com/
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Pet mein Gas banne ke lakshan | कैसे पता चलेगा कि पेट में गैस है
Pet mein Gas banne ke lakshan | कैसे पता चलेगा कि पेट में गैस है? #gas #health #tips Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01https://www.brahmhomeo.com/
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IBS ke karan kya hai in Hindi | आईबीएस के कारण से क्या होता हैं?
IBS ke karan kya hai in Hindi | आईबीएस के कारण से क्या होता हैं? #ibs #health #treatment #trend #viral Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01 https://www.brahmhomeo.com/
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दूध से एसिडिटी क्यों होती है? | दूध से एसिडिटी होने के मुख्य कारण?
दूध से एसिडिटी क्यों होती है? | दूध से एसिडिटी होने के मुख्य कारण? #milk #acidity https://www.brahmhomeo.com/https://www.instagram.com/reel/DX84LsRSH0Q/?igsh=eXcxaGVtY2tsNXJz
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पेट में गैस बनने पर कौन सा फल खाना चाहिए | Pet mein gas ho to kya khana chahie
पेट में गैस बनने पर कौन सा फल खाना चाहिए | Pet mein gas ho to kya khana chahie #gas #stomach #health #fruit #short Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01 https://www.brahmhomeo.com/
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What is Alcoholic Gastritis? | शराब GERD पर कैसे प्रभाव देती है ?
What is Alcoholic Gastritis? | शराब GERD पर कैसे प्रभाव देती है ? #gerd #alcohol #gastritis #health #treatment Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01 https://www.brahmhomeo.com
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क्या लीवर सिरोसिस अपने आप ठीक हो सकता है ? | liver cirrhosis treatment | cured my liver cirrhosis
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BS me kabj kyon hoti hai? | आईबीएस कब्ज का इलाज क्या है?
BS me kabj kyon hoti hai? | आईबीएस कब्ज का इलाज क्या है? #ibs #treatment #short #health #brahmhomeo Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01 https://www.brahmhomeo.com/
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बार-बार बुखार आना किसका लक्षण है? | क्या बुखार आना UC का संकेत है?
बार-बार बुखार आना किसका लक्षण है? | क्या बुखार आना UC का संकेत है? #uc #fiverr #health Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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एसिडिटी होने के कारण क्या है? | acidity hone se kya hota hai
एसिडिटी होने के कारण क्या है? | acidity hone se kya hota hai #acidity #causes #tips #health #short Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है? #infection #dangerous #health #medicine #short Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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Crohn's disease ki janch kaise hoti hai
Crohn's disease ki janch kaise hoti hai #crohnsdisease #shorts #health Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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आईबीडी और आईबीएस में क्या अंतर है? | IBS v/s IBD क्या हैं फर्क ?
आईबीडी और आईबीएस में क्या अंतर है? | IBS v/s IBD क्या हैं फर्क ? #ibs #ibd #shorts #health #viral Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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आयरन की कमी किस से होती है ? | Iron ki kami ke lakshan kya hai?
आयरन की कमी किस से होती है ? | Iron ki kami ke lakshan kya hai? #health #iron #health #treatment #trend Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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Chronic gastric ulcer treatment in homeopathy | क्रॉनिक अल्सर क्या होता है? | brahmhomepathy review
१) क्रॉनिक गैस्ट्रिक अल्सर का इलाज?- क्रॉनिक गैस्ट्रिक अल्सर गंभीर बीमारी है, जिस में पेट की अंदरूनी पर्त में घाव बन जाता है। - जब यह अल्सर लंबे समय तक 3 महीने से भी अधिक बना रहता है. बार-बार वापस आता है, तो इसे “क्रॉनिक” कहा जाता है। - अगर सही समय पर इसका सही इलाज नहीं किया जाए, तो यह गंभीर समस्याओं का कारण हो सकता है.२) क्रॉनिक गैस्ट्रिक अल्सर के कारण?- क्रॉनिक गैस्ट्रिक अल्सर कई कारण से हो सकते हैं, जैसे की, - H. pylori बैक्टीरिया के संक्रमण से - बहुत ही ज्यादा मसालेदार तैलीय भोजन करने से - मानसिक तनाव तथा अनियमित जीवनशैली - ये सब कारक पेट के पर्त को नुकसान पहुंचाते हैं, जिस से अल्सर होता है।३) क्रॉनिक गैस्ट्रिक अल्सर के लक्षण?इस बीमारी के लक्षण इस तरह से हैं, - पेट में जलन होना - भूख भी सही से नहीं लगना - वजन का कम होना - गंभीर परीस्थिति में खून की उल्टी यह लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉ से संपर्क करना चाहिए। ४) क्रॉनिक गैस्ट्रिक अल्सर का सही इलाज?# 1. दवा के द्वारा इलाज - डॉ. आमतौर पर इस तरह के दवाएं देते हैं: - ओमेप्राजोल, पेट के एसिड को कम करते हैं. - H. pylori संक्रमण को खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक्स # 2. आहार में परिवर्तन # किन चीजों से बचें - ज्यादा मसालेदार तला हुआ खाना। - चाय, कोल्ड ड्रिंक्स - शराब तथा धूम्रपान #क्या खाएं - हल्का भोजन- दही , दलिया - हरी सब्जियां तथा फल #3. जीवनशैली में सुधार - धूम्रपान को पुरे तरह से छोड़ दें - शराब को नहीं पीना - नियमित ७-८ घंटे नींद लें५) क्रॉनिक गैस्ट्रिक अल्सर से बचाव?- संतुलित आहार को लें - तनाव को कण्ट्रोल में रखे
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त्वचा पर लाल धब्बे क्यों दिखते हैं? | चेहरे पर लाल धब्बे
त्वचा पर लाल धब्बे क्यों दिखते हैं? | चेहरे पर लाल धब्बे #skin #face #allergy #health #treatment Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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pet dard pancreatitis | pancreas mein sujan ka ilaj | pancreatitis ke lakshan Hindi mein
1) पैंक्रियास की सूजन का इलाज?- पैंक्रियास (अग्नाशय) मानव शरीर का एक ज़रूरी अंग है, जो पेट के पीछे स्थित होता है। इसका काम पाचन एंजाइम और हार्मोन बनाना है। - जब इस अंग में सूजन आ जाती है, तो इस स्थिति को पैंक्रियाटाइटिस कहते हैं। - यह स्थिति अचानक (एक्यूट) हो सकती है या लंबे समय तक (क्रोनिक) बनी रह सकती है।2) पैंक्रियास की सूजन के कारण?- बहुत ज़्यादा शराब पीना - पित्त की पथरी (Gallstones) - ट्राइग्लिसराइड का स्तर ज़्यादा होना - कुछ दवाओं के साइड इफ़ेक्ट - इन्फेक्शन या आनुवंशिक कारण3) पैंक्रियास की सूजन के लक्षण क्या हैं?- दर्द भी पीठ तक फ़ैल सकते है. - जी मिचलाना और उल्टी होना- बुखार; पेट फूलना4) पैंक्रियास की सूजन का इलाज?# 1. अस्पताल में भर्ती होना - अगर सूजन गंभीर है, तो मरीज़ को अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत होती है। - नस के ज़रिए (IV) तरल पदार्थ दिए जाते हैं। - मरीज़ को कुछ समय के लिए बिना खाना दिए रखा जाता है ताकि पैंक्रियास को आराम मिल सके और वह ठीक हो सके। # 2. दवाएँ - डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं में ये शामिल हो सकती हैं: - दर्द कम करने के लिए पेनकिलर - पाचन एंजाइम सप्लीमेंट5) घरेलू और प्राकृतिक उपाय?# 1. हल्का और संतुलित आहार - कम वसा वाला खाना खाएँ - उबली हुई सब्ज़ियाँ, फल और दलिया खाएँ - बहुत ज़्यादा तले हुए, चिकनाई वाले और मसालेदार खाने से बचें# 2. खूब पानी पिएँ # 3. शराब और धूम्रपान से दूर रहें # 4. नारियल पानी पीने से भी पाचन बेहतर हो सकता है6) किन चीज़ों से बचना चाहिए?- बहुत ज़्यादा तेल या घी का सेवन न करें - जंक फ़ूड से बचें - डॉक्टर से सलाह लिए बिना कोई भी दवा न लें
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Kidney stone symptoms in hindi | kidney kharab hone ke lakshan | kidney stones
१) किडनी स्टोन का इलाज?- गुर्दे की पथरी बेहद दर्दनाक समस्या है। यह तब होता है, जब मूत्र में रहे हुए खनिज और लवण क्रिस्टल के रूप में जमा हो कर के कठोर पथरी का रूप ले लेते हैं। - पथरी किडनी में मूत्र मार्ग के कोई भी भाग में बन सकती है। यदि समय पर सही इलाज नहीं किया गया तो यह बेहद गंभीर समस्या हो सकती है.२) किडनी स्टोन होने के क्या कारण हो सकते है?किडनी में स्टोन बनने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे: की, - कम पानी को पीने से। - ज्यादा नमक या तो, प्रोटीन वाला भोजन - आनुवंशिक के कारण से - कुछ दवा का ज्यादा सेवन करने से - मूत्र में संक्रमण३) किडनी स्टोन होने पर क्या लक्षण दिखाई देते है?- किडनी स्टोन के लक्षण निचे बताये हैं, - पीठ के निचले भाग में तेज दर्द का होना - पेशाब करते समय जलन का होना। - बार-बार पेशाब करने जाने की इच्छा ४) किडनी स्टोन का सही इलाज क्या है?# 1. तरल पदार्थ का सेवन करना - यदि छोटी पथरी है,तो उसका इलाज है ज्यादा से ज्यादा पानी को पीना। - दिन में कम से कम ५-७ गिलास जितना पानी को पीने से पथरी मूत्र के माध्यम से बाहर निकल सकती है। # 2. दवा से इलाज डॉ. दर्द को कम करने तथा पथरी को बाहर निकालने के लिए दवा को देते हैं, जैसे की, - पेन किलर जो के दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए। - यदि संक्रमण हो तो, एंटीबायोटिक्स ५) किडनी स्टोन के लिए घरेलू उपाय?- घरेलू उपाय से भी किडनी स्टोन को कम करने में मदद करते है, - नींबू पानी के सेवन करने से पथरी बनने से रोकता है. - तुलसी का रस किडनी को अच्छा बनाये रखने में मदद करता है. -सेब का सिरका पथरी को घुलाने में मदद कर सकता है घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉ. की सलाह को जरूर लें.६) बचाव के लिए उपाय?- डेली उचित पानी को पीना। - नियमित कसरत करना। - समय समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच करवाना।
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chronic calcific pancreatitis treatment in hindi | क्रोनिक कैल्सीफिक अग्नाशयशोथ क्या है? #pancreas
१)क्या है क्रोनिक कैल्सीफिक अग्नाशयशोथ बीमारी?- Chronic Calcific Pancreatitis ऐसी अवस्था है, जिस में अग्न्याशय के नलि में कैल्सियम का कण जमा होने लग जाते हैं। इस से नलि में अवरुद्ध होती हैं, जिस से पाचन एंजाइमों का प्रवाह को असर होता है। - परिणाम स्वरूप, अग्न्याशय के कोशिकाएं को हानि होने लगती हैं. उसकी कार्य करने की क्षमता घट जाती है। २) क्रोनिक कैल्सीफिक अग्नाशयशोथ होने के क्या कारण होते है?- इस बीमारी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे की, 1. बहुत ही शराब का सेवनयह प्रमुख कारणों है। लंबे समय तक शराब को पीने से पैंक्रियास में सूजन , बाद में कैल्सिफिकेशन हो जाता है। 2. अनुवांशिक कारण यदि परिवार में पहले से यह समस्या हो। 3. पोषण की कमी प्रोटीन तथा एंटीऑक्सीडेंट के कमी से भी रोग को बढ़ा सकती है। 4. धूम्रपान करने से अग्न्याशय को नुकसान होता है. ३) क्रोनिक कैल्सीफिक अग्नाशयशोथ होने के क्या लक्षण हो सकते है?- इस रोग के लक्षण धीरे धीरे से होते हैं. - पेट के ऊपरी भाग बार-बार कर के तेज दर्द का होना। - दर्द तो, पीठ तक भी फैल सकता है. - भोजन करने के बाद भी दर्द बढ़ सकता है. - वजन भी कम हो जाना ४) रोग का प्रभाव?- क्रोनिक कैल्सीफिक का बड़ा प्रभाव पाचन पर पड़ता है। - अगर अग्न्याशय सही से एंजाइम नहीं बना पाता है, जिस से भोजन का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता। #निदान#- डॉ. रोग को जांनने के लिए कुछ जांचें कर सकते है, जैसे की, - CT स्कैन:: कैल्सिफिकेशन तथा संरचनात्मक को देखने के लिए. - अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) :: शुरुआती जांच के लिए. - MRI या तो, MRCP :: नलि की स्थिति को जानने के लिए. - रक्त का जाँच :: एंजाइम का लेवल तथा शुगर के जांच के लिए।५) उपचार?- इस बीमारी का पूरा इलाज सही नहीं है, पर इसके लक्षणों को कण्ट्रोल किया जा सकता है, जैसे की, 1. दर्द का प्रबंधन - दवा के जरिये से दर्द को कम कर सकते है। 2. एंजाइम सप्लीमेंट - पाचन मदद के लिए एंजाइम के गोलि को दिया जाता है. 3. इंसुलिन थेरेपी यदि मधुमेह हो जाए तो।६) संभावित जटिलताएं?- यदि इसका समय पर सही इलाज न किया जाए, तो कई जटिलता दे सकता है: - मधुमेह का होना - पाचन में समस्या - कुपोषण
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क्या PCOD होने पर भी प्रेग्नेंट हो सकते हैं? | Can I get pregnant even if I have PCOD?
१) PCOD में प्रेग्नेंसी संभव है?- महिलाओं में PCOD आम समस्या है। यह हार्मोनल डिसऑर्डर है, जिस में अंडाशय में छोटे-छोटे से सिस्ट बन जाते हैं. तथा हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं।- इसका असर मासिक धर्म , ओव्यूलेशन तथा फर्टिलिटीपर पड़ता है। पर यह नहीं कि, PCOD होने पर महिला मां नहीं बन सकती है। २) PCOD क्या है?- PCOD में महिला के शरीर में पुरुष हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इस के कारण - पीरियड्स अनियमित होता है। - ओव्यूलेशन भी सही समय पर नहीं है। - चेहरे या तो, शरीर पर ज्यादा बाल भी आ सकते हैं. ३) PCOD में प्रेग्नेंसी संभव है?- हाँ, PCOD पर प्रेग्नेंसी संभव है। प्रेग्नेंसी संभावना इन बातों पर निर्भर है, जैसे की, - हार्मोनल का बैलेंस। - ओव्यूलेशन नियमितता - वजन तथा लाइफस्टाइल अगर ओव्यूलेशन हो रहा है, तो गर्भधारण के चांस रहते हैं।४) PCOD में प्रेग्नेंसी में आने वाली क्या समस्याएँ होती है?- PCOD के कारण कुछ परेशानी हो सकती हैं, जैसे की, 1. अनियमित ओव्यूलेशन :: अंडा महीने में रिलीज नहीं होता है. 2. हार्मोन का असंतुलन :: – गर्भ को ठहरने में परेशानी 3. वजन का बढ़ जाना ५) PCOD में प्रेग्नेंसी का प्लान कैसे करें?# 1. स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएँ - डेली कसरत करें। - वजन को कंट्रोल में रखना। # 2. ओव्यूलेशन कब हो रहा है, पता करना जरूरी है। इसलिए डॉ. के सलाह ली जा सकती है। #3. दवाइयाँ तथा ट्रीटमेंट - कुछ केश में डॉ. ये ट्रीटमेंट से सुझाते हैं, जैसे की, - ओव्यूलेशन को इंड्यूस करने वाली दवा , इंसुलिन को कंट्रोल में करने वाली दवा, IVF.६) PCOD में प्रेग्नेंसी के दौरान क्या -क्या ध्यान रखने वाली बातें है?- ब्लड शुगर तथा ब्लड प्रेशर को डेली मॉनिटर करें। - डेली चेकअप को कराते रहें।
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सिरोसिस के किस स्टेज में पीलिया होता है?|क्या सिरोसिस में पीलिया ठीक हो सकता है?|cirrhosis - piliya
१) सिरोसिस में पीलिया ठीक हो सकता है?- सिरोसिस गंभीर लीवर रोग है, जिस में लीवर के कोशिका धीरे-धीरे से नष्ट होकर उनकी जगह पर फाइब्रोसिस बन जाता है। इस में लीवर सामान्य कार्य करने के क्षमता खोने लगता है।- सिरोसिस के दर्दी में पीलिया आम लक्षण है, जो तब होता है, जब रक्त में बिलीरुबिन का लेवल बढ़ जाता है। इसका उपचार गंभीरता पर निर्भर करता है।२) पीलिया क्यों होता है? सिरोसिस में?- लीवर का काम शरीर में से विषैले पदार्थों को निकालना तथा बिलीरुबिन के प्रोसेस करना होता है। - जब भी लीवर सिरोसिस के कारण क्षतिग्रस्त होता है, तो वह बिलीरुबिन को बाहर नहीं निकाल पाता है। परिणामस्वरूप, बिलीरुबिन खून में ही जमा होने लगता है, आंखों में पीला रंग भी दिखाई देता है। ३) क्या पीलिया पूरी तरह से ठीक हो सकता है?1. सिरोसिस का चरण - यदि सिरोसिस शुरुआती चरण में है, तो सही उपचार , जीवनशैली में बदलाव से लीवर कार्यक्षमता कुछ हद तक सुधर जाती है। 2. कारण का इलाज - सिरोसिस कितने ही कारणों से हो सकता है, जैसे: की, - शराब का बहुत ही अधिक सेवन करना। - हेपेटाइटिस - B या तो, हेपेटाइटिस -C का संक्रमण। यदि समय रहते ही इलाज लिया जाए, तो पीलिया में सुधार होता है। 3. उपचार डॉ. के द्वारा दी गई दवा, पोषण तथा नियमित जांच से पीलिया को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है४) किन स्थितियों में पीलिया गंभीर संकेत दे सकता है?-सिरोसिस में पीलिया का होना जटिलताओं का संकेत हो सकता है, जैसे: की, - लीवर फेलियर . संक्रमण , हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी। - यदि पीलिया में निम्न लक्षण दिखाई दें, तो डॉ. से संपर्क करना चाहिए: - बहुत ही कमजोरी का होना। - पेट में सूजन का हो जाना - मानसिक भ्रम जैसा लगना।५) पीलिया को कण्ट्रोल करने के लिए क्या उपाय है?- सिरोसिस में पीलिया को कण्ट्रोल करने के लिए उपाय हो सकते हैं, 1. शराब का पूर्ण रूप से त्याग करना 2. डॉ. की सलाह से संतुलित आहार का सेवन करना। 3. दवा का सही तरह से उपयोग करना 4 . संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण , साफ-सफाई का ध्यान रखें।६) क्या लीवर ट्रांसप्लांट का समाधान है?- जब भी सिरोसिस अधिक बढ़ जाता है ,लीवर भी काम करना बंद कर देता है, तब लीवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम ऑप्शन होता है। - ट्रांसप्लांट के बाद पीलिया ठीक हो सकता है, नया लीवर सामान्य रूप से कार्य करता है।
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acute pancreatitis with peripancreatic inflammation | Acute pancreatitis treatment
१) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस कैसे होता है?- एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस ऐसी स्थिति है, जिस में अग्न्याशय में अचानक से सूजन आ जाती है। हमारे शरीर का महत्वपूर्ण भाग है, जो भोजन को सही से पचाने के लिए एंजाइम को बनाता है. रक्त में शुगर को कण्ट्रोल करने के लिए इंसुलिन उत्पादन करता है।- जब एंजाइम समय से पहले ही एक्टिव होने लग जाते हैं, तो अग्न्याशय के ऊतकों को हानि पहुंचाने लग जाते हैं। इस से सूजन, और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।२) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने के क्या लक्षण होते है?- इस बीमारी के लक्षण अचानक से ही दिखाई देते हैं, मुख्य लक्षण निचे अनुसार है,- पेट के ऊपर वाले भाग में तेज , लगातार दर्द का होना - यह दर्द तो, पीठ तक भी फैल सकता है. - पेट में भारीपन जैसा महसूस होना। - यदि ऐसे लक्षण हो तो, तुरंत ही, डॉक्टर से मिलना चाहिए.३) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस की जांच कैसे होती है?- डॉक्टर बीमारी की पुष्टि करने के लिए कुछ जरूरी टेस्ट करवाते हैं: - ब्लड टेस्ट :– एंजाइम लेवल जांचने के लिए - अल्ट्रासाउंड :– सूजन या पथरी की जांच के लिए - MRI :– अग्न्याशय की जांच के लिए इस से पता चल जाता है,की पैंक्रियास में सूजन है, या नहीं।४) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का इलाज1. अस्पताल में भर्ती करना - अधिकांश केस में दर्दी को हॉस्पिटल में ही भर्ती किया जाता है,यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। 2. IV फ्लूड - शरीर में से पानी की कमी को पूरा करने के लिए। 3. खाने-पीने पर भी रोक होता है. - इलाज के शुरुआती में मरीज को खाने से रोका जाता है, जिस से अग्न्याशय को आराम मिल सके। # 4. संक्रमण - यदि संक्रमण का जोखिम हो, तो डॉ. एंटीबायोटिक्स देते हैं। ५) गंभीर स्थिति में क्या होता है? - सही समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो खतरनाक रूप ले सकती है: - शरीर के कुछ भाग का फेल होना। - गंभीर संक्रमण का जोखिम६) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस में बचाव कैसे कर सकते है?- बीमारी से बचने के लिए सावधानियां को अपनाएं, - शराब का सेवन नहीं करें। - संतुलित तथा पौष्टिक आहार को ही लें. - वजन को कण्ट्रोल में रखें।
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लिवर बायोप्सी क्यों की जाती है? | Liver biopsy kya hota hai
लिवर बायोप्सी क्यों की जाती है? | Liver biopsy kya hota hai #liver #shorts #biopsy #viral #health Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या हैं ? | अल्सरेटिव कोलाइटिस के कारण क्या हैं? | tanav se uc ho sakta he ?
1) Ulcerative Colitis क्या होती है?Ulcerative Colitis एक ऐसी बीमारी है जो लंबे समय तक बनी रहती है और धीरे-धीरे आंत को प्रभावित करती है। यह मुख्य रूप से बड़ी आंत (Colon) और मलाशय (Rectum) में समस्या पैदा करती है।इस स्थिति को Inflammatory Bowel Disease (IBD) के अंतर्गत रखा जाता है। इसमें आंत की भीतरी सतह पर सूजन आ जाती है और समय के साथ वहाँ घाव (Ulcers) बनने लगते हैं, जिससे पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता।2) इस बीमारी के पीछे क्या कारण होते हैं?Ulcerative Colitis का कोई एक निश्चित कारण नहीं है, बल्कि कई चीजें मिलकर इसे उत्पन्न करती हैं:➤ इम्यून सिस्टम की असामान्य प्रतिक्रियाहमारा इम्यून सिस्टम सामान्यतः शरीर को बीमारियों से बचाता है, लेकिन इस स्थिति में यह गलत तरीके से आंत की ही कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाने लगता है।इस कारण आंत में लगातार सूजन बनी रहती है और धीरे-धीरे घाव बनने लगते हैं।➤ जेनेटिक (वंशानुगत) कारणअगर परिवार में पहले से किसी को यह बीमारी है, तो दूसरे सदस्यों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है।कुछ जीन ऐसे होते हैं जो इस रोग की संभावना को बढ़ा सकते हैं।➤ आंत के बैक्टीरिया में बदलावहमारी आंत में मौजूद माइक्रोऑर्गेनिज्म (अच्छे और बुरे बैक्टीरिया) संतुलन में रहते हैं।जब यह संतुलन बिगड़ जाता है, तो सूजन बढ़ सकती है और यही आगे चलकर बीमारी को जन्म दे सकती है।3) यह बीमारी शरीर में कैसे बढ़ती है?Ulcerative Colitis अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होती है:- शुरुआत में शरीर के अंदर कुछ बदलाव होते हैं. - इम्यून सिस्टम आंत पर ही हमला करना शुरू कर देता है. - आंत की परत में सूजन पैदा होती है. - सूजन बढ़कर घाव का रूप ले लेती है. - इसके बाद दस्त, खून आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.4) इसके मुख्य लक्षण क्या हैं?इस बीमारी के दौरान व्यक्ति को निम्न समस्याएँ हो सकती हैं: - बार-बार दस्त आना, कई बार खून के साथ. - पेट में दर्द या ऐंठन - हमेशा थकान महसूस होना - बिना कोशिश के वजन कम होना5) किन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है?- 15 से 30 साल की उम्र के लोग, परिवार में पहले से आंत से जुड़ी बीमारी (IBD) हो, शहरों में रहने वाले लोग #क्या Ulcerative Colitis पूरी तरह ठीक हो सकती है?इस बीमारी का अभी तक कोई स्थायी इलाज नहीं मिला है, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है।- डॉक्टर की सलाह से दवाएँ लेने पर लक्षण कम हो सकते हैं. - सही खान-पान और लाइफस्टाइल अपनाने से राहत मिलती है.- नियमित इलाज से व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता हैं.
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एस क्रिएटिनिन क्या होता है? | Kidney creatinine kaise kam kare | क्रिएटिनिन बढ़ने के लक्षण और इलाज
१) एस क्रिएटिनिन क्या होता है?यह महत्वपूर्ण ब्लड टेस्ट है, जो आप के किडनी की कार्य क्षमता को मापने के लिए करते जाता है। शरीर में बनने वाला वेस्ट (अपशिष्ट) पदार्थ है, जो मांसपेशियों के काम के दौरान बनता है, किडनी द्वारा खून से छानकर के पेशाब के जरिए से बाहर निकाल जाता है।- यदि किडनी सही से काम कर रही है, तो खून में क्रिएटिनिन लेवल नार्मल ही रहता है। पर जब किडनी खराब हो जाती है, तो कुछ पदार्थ खून में ही जमा होने लगता है, जिस से स्तर बढ़ जाता है।२) क्रिएटिनिन कैसे बनता है?- क्रिएटिनिन शरीर में रहे हुए क्रिएटिन नामक पदार्थ से बनता है, जो के मांसपेशियों से ऊर्जा देने में भी मदद करता है। जब मांसपेशियां अपना काम करती हैं, तो क्रिएटिन टूट कर क्रिएटिनिन में बदल जाता है। #इसके बाद# - क्रिएटिनिन खून में जाता है. किडनी फिल्टर करती है. जो के पेशाब के जरिए से बाहर निकल जाता है.३) सामान्य लेवल कितना होता है?- एस क्रिएटिनिन का स्तर उम्र, शरीर के बनावट पर निर्भर होता है, - पुरुष में : 0.7 से 1.3 mg/dL तथा महिलाएं में :0.6 से 1.1 mg/dL , बच्चे में: 0.3 से 0.7 mg/dL.४) एस क्रिएटिनिन बढ़ने के क्या कारण होते है?- रिपोर्ट में क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ा हुआ है, तो कई कारण हो सकते हैं, #1. किडनी के बीमारी सामान्य कारण है। जैसे की, किडनी फेलियर, क्रॉनिक किडनी डिजीज। #2. शरीर में पानी की कमी होने पर भी क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ सकता है। #3. हाई प्रोटीन डाइट लेने पर भी स्तर बढ़ सकता है। # 4. शरीर में मांसपेशियों के प्रॉब्लम। # 5. कुछ दवा का सेवन से भी असर होता हैं, जिस से क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ सकता है।५ ) एस क्रिएटिनिन कम हो जाने से क्या होता है?- कम स्तर पर चिंता का टॉपिक नहीं होता, इसके कारण हो सकते हैं, - कुपोषण , लिवर के प्रॉब्लम , गर्भावस्था६ ) इस तरह का टेस्ट कब कराया जाता है?- किडनी के समस्या लक्षण हों. - मधुमेह का होना - पेशाब का रंग बदल जाना - थकान या तो कमजोरी जैसा महसूस होना यह टेस्ट नियमित हेल्थ चेकअप का भी हिस्सा होता है। ७) एस क्रिएटिनिन टेस्ट कैसे करते है?- यह सामान्य ब्लड टेस्ट है, जो के, हाथ के नस में से खून को लिया जाता है. लैब में विश्लेषण किया जाता है.
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GERD होने पर क्या खाना चाहिए? | गैस्ट्राइटिस में क्या खाएं क्या न खाएं?
GERD होने पर क्या खाना चाहिए? | गैस्ट्राइटिस में क्या खाएं क्या न खाएं? #gerd #acid #shorts #health #brahmhomeo https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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Acute necrotizing pancreatitis | What causes necrotizing pancreatitis?
1) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैन्क्रियाटाइटिस क्या है?यह गंभीर तथा जीवन के लिए बहुत ही खतरनाक बीमारी है, जिस में अग्न्याशय के हिस्सों के ऊतक धीरे-धीरे से नष्ट होने लगते हैं। - यह सामान्य एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस के तुलना में बहुत ही जटिल होती है, क्योंकि, इस में संक्रमण, अंग काम करना भी बंद हो जाता है। इस स्थिति में उपचार जरूरी होता है।2) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैन्क्रियाटाइटिस के मुख्य क्या कारण है?- बहुत ही अधिक मात्रा में शराब के सेवन । - पित्ताशय में पथरी का होना - खून में ट्राइग्लिसराइड का लेवल बढ़ जाना - कुछ दवा के साइड इफेक्ट का होना इन कारण से अग्न्याशय में सूजन बढ़ती है.3) Acute Necrotizing Pancreatitis के लक्षण को कैसे पहचानें?शुरुआत में लक्षण नार्मल लग सकते हैं, पर धीरे-धीरे गंभीर हो जाते हैं, - पेट के ऊपर वाले भाग में दर्द। - उल्टी तथा मतली का होना - पेट में भारीपन जैसा लगना - सांस लेने में कठिनाई। - बेचैनी जैसा होना।4) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैन्क्रियाटाइटिस का सही इलाज क्या है?- हॉस्पिटल में डॉ.के निगरानी में इलाज किया जाता है। #1. ICU में एडमिट - कुछ दर्दी को ICU में रखा जाता है, स्थिति के लगातार निगरानी भी की जाती है। #2. फ्लूइड थेरेपी - शरीर में पानी तथा इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने के लिए नसों के जरिये से फ्लूइड को देते है. #3. दर्द में नियंत्रण - दर्द को कम करने के लिए डॉ दर्द निवारक दवाएं को देते है. #4. एंटीबायोटिक्स - अग्न्याशय के नष्ट ऊतकों में संक्रमण हो जाये तो, डॉ. एंटीबायोटिक्स को देते हैं। #5. पोषण का सपोर्ट- शुरुआत में दर्दी को खाना नहीं दिया जाता, पर कुछ समय बाद में नाक के माध्यम से पोषण दिया जाता है५ ) बचाव कैसे कर सकते है?- बीमारी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां को ध्यान में रखना चाहिए: - शराब के सेवन को पूरी तरह से बंद कर दो. - संतुलित तथा कम फैट वाला ही भोजन करें। - नियमित अपने स्वास्थ्य की जांच करवाएं
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पुरानी अग्नाशयशोथ में मधुमेह का इलाज कैसे करें?| Chronic pancreatitis mai diabetes kese control kare
१) Chronic Pancreatitis में Diabetes को कैसे कंट्रोल करें?- Chronic Pancreatitis ऐसी स्थिति है, जिस में अग्न्याशय धीरे-धीरे से खराब होता जाता है। यह अंग जो इंसुलिन बनाता है, इसलिए प्रभावित होता है, तो Diabetes Mellitus का खतरा भी बढ़ जाता है।- Chronic pancreatitis में होने वाले मधुमेह "Type 3c Diabetes" कहते है। इसे कंट्रोल करना मुश्किल है, पर सही रणनीति इसे अच्छे से मैनेज कर सकता है।२) Chronic Pancreatitis में मधुमेह को कम करने के लिए क्या करे?#1. ब्लड शुगर का जाँच - यह कंट्रोल करने का पहला स्टेप है, की, ब्लड शुगर को चेक करना। - दिन में २ बार शुगर को चेक करें, HbA1c 3 महीने में जांचें इस से आपको पता चलता है,कि आप का शुगर लेवल कितने कंट्रोल में है. # 2. सही डाइट को अपनाएं - Pancreatitis , diabetes में डाइट का बड़ा रोल होता है। #क्या खाएं# - ओट्स, दाल, हरी सब्जियां। - प्रोटीन वाले चीज जैसे की, पनीर, दाल, अंडा (अगर अनुमति हो). #क्या ना खाएं# - ज्यादा मिठाई, कोल्ड ड्रिंक का सेवन न करे. - ज्यादा कार्बोहाइड्रेट सफेद चावल, मैदा। #3. शराब तथा धूम्रपान से दूरी - इस तरह के आदतें छोड़ना ही इलाज का हिस्सा है। #4. Chronic pancreatitis में शरीर सही से इंसुलिन नहीं बना पाता है,तो, डॉ. इंसुलिन थेरेपी को शुरू कर सकते हैं. #5. Pancreatic Enzyme Supplements को लें. - Chronic pancreatitis में जब भी पाचन खराब होता है, जिस से शरीर पोषण भी ठीक से नहीं ले पाता है। # 6. Regular Exercise को करें। # 7. तनाव को कम रखें। उसके लिए सही नींद को ले. #8. Nutritional Deficiency का भी ध्यान रखें। - विटामिन - डी , विटामिन -बी १२ डॉ. के अनुसार ही सप्लीमेंट को लेना जरूरी है। #9. डेली फॉलो अप ले. - Chronic pancreatitis तथा diabetes दोनों में ही लंबे समय बीमारियां हैं, इसलिए: समय समय पर जांच करवाएं
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How to understand homeopathic remedies in Hindi | How to find homeopathic remedy
१) होम्योपैथी में सही रेमेडी को कैसे चुनें?- होम्योपैथी ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो केवल बीमारी का नहीं, पूरे व्यक्ति का इलाज करती है। - इसमें शरीर, मन तथा व्यक्ति के स्वभाव—तीनों को ध्यान में रख कर के दवा का चयन किया जाता है। - यही कारण है कि, एक ही बीमारी के लिए अलग-अलग लोगों को अलग दवा को दिया जाता हैं। २) होम्योपैथी में किन चीज को ध्यान में रखा जाता है?#1. पहले लक्षणों के जांच करना - होम्योपैथी में दवा को चुनने से पहला महत्वपूर्ण कदम , लक्षणों का सही से विश्लेषण करना। - सिर्फ यह जानना ही काफी नहीं होता है, कि कौन-सी बीमारी है, #ध्यान देने वाली बातें: - बीमारी शुरुआत कब से शुरू हुई है? - किन -किन समस्या के कारण से ज्यादा बढ़ती सकती है? - किन चीजों से आराम मिलता है,या कोई खास स्थिति? #2. मानसिक तथा भावनात्मक स्थिति के महत्व - होम्योपैथी शारीरिक लक्षणों तक ही सीमित नहीं है। पर व्यक्ति के मानसिक तथा भावनात्मक स्थिति भी जरुरी होती है. #कुछ महत्वपूर्ण मानसिक संकेत# - क्या - व्यक्ति को जल्दी से गुस्सा हो जाता है? * क्या बार-बार डर या तो, चिंता रहती है? * क्या अकेलापन महसूस करता है? #3. समानता वाले सिद्धांत - होम्योपैथी का महत्वपूर्ण सिद्धांत है—“जैसा रोग, वैसी ही दवा”। # 4. सही पोटेंसी का चयन करना - होम्योपैथिक दवा अलग पोटेंसी में होती हैं, और सही पोटेंसी को चुनना जरूरी होता है। - लो पोटेंसी 30C :: नई समस्याओं के लिए. - हाई पोटेंसी : पुरानी या तो,गहरी समस्याओं के लिए. # 5. दवा के सही मात्रा में लेने से - होम्योपैथी के दवा को बार - बार लेने की जरुरत नहीं होती है। #ध्यान रखें# - दिन में १-२ बार ही दवा को लेना होता है. और दवा को हाथ से नहीं छूना चाहिए। #5. इलाज के समय क्या सावधानियां रखना चाहिए? - होम्योपैथी को सुरक्षित इसलिए माना जाता है, की इसका कोई साइड - इफ़ेक्ट नहीं होता है. - डॉ. से कब मिलें - यदि बीमारी ज्यादा से भी बनी हुई है. अगर लक्षण बार-बार लौट रहे हैं तब। # 7. अनुभवी ड़ॉ. से सलाह लेना क्यों जरूरी है? - हर व्यक्ति के लक्षण अलग होते हैं, इसलिए अनुभवी डॉ. ही सही दवा , पोटेंसी का चयन कर सकता है। - शारीरिक लक्षण , मानसिक स्थिति, जीवनशैली इन तीनों को मिला कर के ही व्यक्तिगत उपचार योजना को बनाता है। #8. जरूरी टिप्स- होम्योपैथी के दवा को लेते समय छोटी-छोटी बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, - दवा को खाने से 15 मिनट पहले तथा दवा को खाने के बाद में कुछ भी न खाएं।
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Pancreatitis in teenagers causes | How serious is pancreas swelling? | Pancreatitis in child
१) Bulky Edematous Pancreas का इलाज?- Bulky edematous pancreas का अर्थ है, कि अग्न्याशय में सूजन के कारण आकार बढ़ जाना। यह स्थिति Acute Pancreatitis में देखी जाती है। इस में पैनक्रियास में तरल जमा हो जाता है, जिस से दर्द, तथा पाचन की समस्या होते हैं।२) Bulky Edematous Pancreas होने के क्या कारण होते है?- Bulky edematous pancreas कितने ही कारणों से हो सकता है, जैसे: की, - गॉल ब्लैडर की पथरी - बहुत ही मात्रा में शराब का सेवन करना - हाई ट्राइग्लिसराइड का स्तर - कुछ दवा का साइड इफेक्ट होना - लंबे समय से चल रहे पाचन के संबंधी गड़बड़ी३) Bulky Edematous Pancreas होने के लक्षण क्या है?- पेट के ऊपरी वाले भाग में दर्द। - मतली तथा उल्टी - भूख भी कम लगना - पेट का फूल जाना - कमजोरी तथा थकान जैसा लगना४) Bulky Edematous Pancreas डॉ. कैसे जांच करते है?- Ultrasound , CT Scan , ब्लड टेस्ट , लिवर फंक्शन टेस्ट। #इलाज# #1. हॉस्पिटल में भर्ती - स्थिति गंभीर है, तो दर्दी को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है.- IV fluids डिहाइड्रेशन को रोकने के लिए. - दर्द को कम करने के लिए. - कुछ टाइम तक खाना नहीं देते है. #2.कारण का इलाज - अगर कारण गॉल में स्टोन है, तो गॉल ब्लैडर को हटाने की सलाह दी जा सकती है. - हाई लिपिड स्तर को कण्ट्रोल करना। #3. डाइट तथा लाइफस्टाइल #क्या खाएं# - कम फैट वाला भोजन करना - उबली हुई सब्जि। - दलिया , नारियल पानी #क्या न खाएं# - ज्यादा तला-भुना नहीं खाना। - मसालेदार भोजन को नहीं करना - शराब #लाइफस्टाइल के लिए टिप्स# - छोटे-छोटे अन्तर पर भोजन करें। - सही मात्रा में पानी पिए. - तनाव को कम करें।५) Bulky Edematous Pancreas रिकवरी- ज्यादातर मामलों में १ से २ हफ्तों में सुधार हो जाता है, - सही इलाज किया जाए तो, - सही डाइट का पालन करना। - कारण को नियंत्रण में किया जाए
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IBS होने का कारण क्या है? | IBS के कारण, लक्षण और इलाज | IBS SYMPTOMS | IBS treatment in hindi
१) Irritable Bowel Syndrome का इलाज?IBS पाचन तंत्र से जुड़ी प्रॉब्लम है, जिस में पेट का दर्द, गैस, दस्त या तो, कब्ज जैसे लक्षण बार-बार दिखाई देते हैं। कोई बीमारी नहीं है, पर लंबे समय तक होने के कारण से दर्दी की जीवनशैली तथा मानसिक स्थिति पर प्रभाव डालती है।२) IBS होने के क्या मुख्य लक्षण हो सकते है?-IBS के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, पर कुछ इस तरह से शामिल होते हैं, जैसे की, - ज्यादा पेट में मरोड़ होना - दस्त या तो, कब्ज। - पेट का फूल जाना - पेट में गैस का समस्या३) IBS होने के क्या कारण हो सकते है?IBS कोई फिक्स कारण से नहीं होता है, पर कुछ मुख्य कारण इस तरह से है, - तनाव तथा चिंता। - आंतों में संवेदन शीलता का बढ़ जाना - गलत तरह का खान-पान से - हार्मोन में परिवर्तन - आंतों में माइक्रोबायोम का असंतुलन४) IBS का क्या उपचार है?- IBS का उपचार पूरी तरह से दर्दी के स्थिति पर निर्भर होता है। इस में दवा के साथ-साथ में लाइफस्टाइल , डाइट में परिवर्तन जरूरी होता है। # 1. डाइट में सुधार करना #IBS कंट्रोल करने के लिए जरूरी डाइट# - फाइबर वाले भोजन को लें. (जैसे की, ओट्स, फल, सब्जि) - मसालेदार तथा तला हुआ खाना को कम कर दे. - डेयरी उत्पाद वाले चीज भी समस्या को बढ़ा सकते हैं. - चाय,कॉफ़ी से बचें। #2. लाइफस्टाइल में परिवर्तन - डेली 30 मिनट के लिए कसरत करें। - नियमित समय पर डेली भोजन करें। - सही तरह से डेली नींद को लें. #3. डॉ.आप के समस्या अनुसार ही दवा को देते हैं, बिना डॉ. के सलाह दवा न लें। #4. तनाव को कम करने के लिए प्रयत्न करे. #5 . घरेलू उपाय - सुबह - सुबह खाली पेट गुनगुना पानी को पिएं। - दही आंतों के लिए सही होता है.५) क्या IBS पूरी तरह से सही हो सकता है?- IBS का स्थायी इलाज नहीं है, पर सही डाइट, लाइफ स्टाइल से पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। #कब डॉ. से मिलना चाहिए? - जब भी वजन तेजी से कम हो रहा है. - मल में खून का आना। - ज्यादा दर्द होना। - लक्षण ज्यादा समय तक रहें।
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क्रोनिक पैन्क्रियाटाइटिस क्या है? | What does chronic pancreatitis mean?
क्रोनिक पैन्क्रियाटाइटिस क्या है? | What does chronic pancreatitis mean? #health #shorts #pancreatitis #chronic #brahmhomeo Follow the brahm homeopathy Health channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbBeAES3rZZkesx07o01
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Homeopathic remedy kaise select kare in Hindi | How to select homeopathic medicine for patient ?
१) होम्योपैथी में सही रेमेडी को कैसे चुनें?- होम्योपैथी ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो केवल बीमारी का नहीं, पूरे व्यक्ति का इलाज करती है। - इसमें शरीर, मन तथा व्यक्ति के स्वभाव—तीनों को ध्यान में रख कर के दवा का चयन किया जाता है। - यही कारण है कि, एक ही बीमारी के लिए अलग-अलग लोगों को अलग दवा को दिया जाता हैं। २) होम्योपैथी में किन चीज को ध्यान में रखा जाता है?#1. पहले लक्षणों के जांच करना - होम्योपैथी में दवा को चुनने से पहला महत्वपूर्ण कदम , लक्षणों का सही से विश्लेषण करना। - सिर्फ यह जानना ही काफी नहीं होता है, कि कौन-सी बीमारी है, #ध्यान देने वाली बातें: - बीमारी शुरुआत कब से शुरू हुई है? - किन -किन समस्या के कारण से ज्यादा बढ़ती सकती है? - किन चीजों से आराम मिलता है,या कोई खास स्थिति? #2. मानसिक तथा भावनात्मक स्थिति के महत्व - होम्योपैथी शारीरिक लक्षणों तक ही सीमित नहीं है। पर व्यक्ति के मानसिक तथा भावनात्मक स्थिति भी जरुरी होती है. #कुछ महत्वपूर्ण मानसिक संकेत# - क्या - व्यक्ति को जल्दी से गुस्सा हो जाता है? * क्या बार-बार डर या तो, चिंता रहती है? * क्या अकेलापन महसूस करता है? #3. समानता वाले सिद्धांत - होम्योपैथी का महत्वपूर्ण सिद्धांत है—“जैसा रोग, वैसी ही दवा”। # 4. सही पोटेंसी का चयन करना - होम्योपैथिक दवा अलग पोटेंसी में होती हैं, और सही पोटेंसी को चुनना जरूरी होता है। - लो पोटेंसी 30C :: नई समस्याओं के लिए. - हाई पोटेंसी : पुरानी या तो,गहरी समस्याओं के लिए. # 5. दवा के सही मात्रा में लेने से - होम्योपैथी के दवा को बार - बार लेने की जरुरत नहीं होती है। #ध्यान रखें# - दिन में १-२ बार ही दवा को लेना होता है. और दवा को हाथ से नहीं छूना चाहिए। #5. इलाज के समय क्या सावधानियां रखना चाहिए? - होम्योपैथी को सुरक्षित इसलिए माना जाता है, की इसका कोई साइड - इफ़ेक्ट नहीं होता है. - डॉ. से कब मिलें - यदि बीमारी ज्यादा से भी बनी हुई है. अगर लक्षण बार-बार लौट रहे हैं तब। # 7. अनुभवी ड़ॉ. से सलाह लेना क्यों जरूरी है? - हर व्यक्ति के लक्षण अलग होते हैं, इसलिए अनुभवी डॉ. ही सही दवा , पोटेंसी का चयन कर सकता है। - शारीरिक लक्षण , मानसिक स्थिति, जीवनशैली इन तीनों को मिला कर के ही व्यक्तिगत उपचार योजना को बनाता है। #8. जरूरी टिप्स- होम्योपैथी के दवा को लेते समय छोटी-छोटी बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, - दवा को खाने से 15 मिनट पहले तथा दवा को खाने के बाद में कुछ भी न खाएं।
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Chronic pancreatitis treatment in women | What is the treatment for pancreatitis? brahm homeo
१) Chronic Pancreatitis का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार?यह गंभीर ज्यादा लम्बे समय तक चलने वाली बीमारी है. जिस में अग्न्याशय में लंबे समय तक सूजन रहती है। धीरे-धीरे सूजन अग्न्याशय के कार्य क्षमता को असर करने लगती है।- हमारे शरीर में पाचन एंजाइम , इंसुलिन को बनाने का काम करता है, इसलिए यह अंग असर होता है तो पाचन ,ब्लड शुगर असर पड़ सकता है।- बीमारी धीरे-धीरे से बढ़ती है. कई बार मरीज को पेट दर्द, अपच , कमजोरी जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।२) Chronic Pancreatitis होने के मुख्य कारण हो सकता है?कई कारणों से हो सकता है। इन में कुछ कारण निम्नलिखित हैं, जैसे की, - शराब का सेवन जयदा समय के लिए करना - पित्ताशय में पथरी - पारिवारिक इतिहास के कारण - कुछ दवा का साइड इफ़ेक्ट - धूम्रपान इन कारणों से भी लगातार सूजन बनी रहती है. धीरे-धीरे स्थायी समस्या बन जाती है।३) Chronic Pancreatitis होने पर क्या लक्षण दिखाई देते है?- ऊपरी पेट में बार-बार दर्द - भोजन के बाद में भी दर्द का बढ़ जाना - वजन का कम होना - पाचन के प्रॉब्लम - कमजोरी तथा थकान जैसा लगना४) Chronic Pancreatitis का सही निदान क्या है?- डॉ. बीमारी का पता करने के लिए कुछ जांच करते हैं, जैसे की, - रक्त का जाँच करना - अल्ट्रासाउंड करना - CT स्कैन, MRI इन जांचों अग्न्याशय और सूजन की स्थिति का पता चलता है।५) Chronic Pancreatitis का सही इलाज?# 1. जीवनशैली में परिवर्तन करना - इलाज का पहला कदम है, जीवनशैली में सुधार करना - धूम्रपान को छोड़ें। - डेली कसरत करें। # 2. आहार में सुधार करना - कम चर्बी वाला भोजन करना - छोटे-छोटे अंतर में भोजन करना # 3. दवा का उपयोग डॉ. दर्दी की स्थिति के अनुसार दवा दे सकते हैं: - विटामिन सप्लीमेंट #4. सर्जिकल उपचार - अग्न्याशय में पथरी, या गंभीर दर्द की समस्या हो, तो कुछ मामलों में सर्जरी की जा सकती है। - एंडोस्कोपिक से उपचार - पैंक्रियाटिक के डक्ट के सफाई ये दर्द और जटिलताओं को कम करने में मदद करती हैं।
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Chronic pancreatitis ka ilaj | Treatment for pancreatitis | chronic pancreatitis
1) Chronic Calcific Pancreatitis क्या है?Chronic Calcific Pancreatitis गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, जिस में पैंक्रियास में लगातार सूजन बनी रहती है। समय के साथ-साथ पैंक्रियास के अंदर कैल्शियम के छोटे जमाव बनने लगते हैं, जिस से पैंक्रियास की सामान्य कार्य क्षमता को प्रभावित हो जाती है।- पैंक्रियास शरीर में दो महत्वपूर्ण काम करता है, जैसे की, - भोजन को पचाने के लिए एंजाइम को बनाना।- शरीर में शुगर को कण्ट्रोल करने के लिए इंसुलिन को बनाना।जब यह बीमारी बढ़ती है तो, पाचन के प्रक्रिया तथा इंसुलिन को बनने के क्षमता दोनों को असर हो सकती हैं। यदि समय पर सही इलाज नहीं हो तो, यह बीमारी धीरे से गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।2) Chronic Calcific Pancreatitis होने के क्या लक्षण हो सकते है?# 1. पेट के ऊपरी भाग में दर्द का होना - कई बार दर्द पीठ तक फैल सकता है। भोजन करने के बाद भी दर्द बढ़ सकता है। # 2. पाचन से जुड़ी ही समस्याएँ - पैंक्रियास भोजन पचाने वाले एंजाइम को बनाता है। यदि सही से काम नहीं करता तो कई पाचन के समस्याएँ होती है. - पेट का फूल जाना - पेट में गैस का बनना #3. वजन का घट जाना तथा कमजोरी , थकान महसूस होता है. # 4. मधुमेह का खतरा पैंक्रियास को नुकसान होने पर इंसुलिन का उत्पादन कम होता है, जिस से मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। - अधिक प्यास का लगना। - पेशाब करने जाना बार बार - थकान जैसा महसूस होना 3) Chronic Calcific Pancreatitis में क्या -क्या खाना चाहिए?#खाने लायक चीजे# - कम चर्बी वाला भोजन। - उबली हुयी या तो,पकी सब्जियाँ , ताजे फल - प्रोटीन वाले भोजन जैसे की, दाल , मछली, मूंग दाल. #किन चीजों से दुरी रहना चाहिए. - ज्यादा तली-भुनी , तथा मसालेदार चीजें। - ज्यादा फास्ट फूड का सेवन - शराब तथा ध्रूमपान का सेवन नहीं करना चाहिए। 4) Chronic Calcific Pancreatitis के क्या कारण हो सकते है?- 1. ज्यादा लंबे समय तक शराब का सेवन से पैंक्रियास को हानि पहुँच सकता है। - 2. आनुवंशिक कारण परिवार में चलने वाले कारणों से भी हो सकती है। - 3. यदि व्यक्ति को बार-बार एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होता है, समय के साथ में वो Chronic Calcific Pancreatitis में बदल सकता है। -4. पैंक्रियास की नली में रुकावट से भी बीमारी हो सकती है। - 5. कुपोषण की कमी भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकती है।
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Hemorrhagic cyst diet plan in hindi | hemorrhagic cyst me kya khana chahiye | brahm homeopathy
१) Hemorrhagic Cyst का इलाज तथा डाइट प्लान?- Hemorrhagic cyst एक तरह के ओवेरियन सिस्ट होता है, जिस में सिस्ट के अंदर खून भर जाते है। महिलाओं के अंडाशय में बनने वाला फंक्शनल सिस्ट होता है।- कुछ मामलों में अपने-आप ठीक भी हो जाता है, पर अगर दर्द, सूजन बढ़ जाएँ तो इलाज की जरूरत होती है।२) Hemorrhagic Cyst क्या है?- Hemorrhagic Ovarian Cyst जब ओवरी में बनने वाला नार्मल सिस्ट अंदर से फट जाता है, उसमें खून भर जाता है। अधिकतर प्रजनन आयु के महिलाओं में देखा जाता है।३) Hemorrhagic Cyst के क्या-क्या लक्षण दिखाई देते है?- हर महिला में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। सामान्य लक्षण इस तरह से है, - पेट के निचे वाले भाग में दर्द का होना - अचानक से तेज ऐंठन होना - मासिक धर्म में अनियमित होना - पेट में भारीपन जैसा लगना - सैक्स के दौरान ज्यादा दर्द का होना अगर सिस्ट बड़ा हो जाए या तो, फट जाए तो गंभीर दर्द तथा आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। इस स्थिति में डॉ. से संपर्क करना जरूरी है।४) Hemorrhagic Cyst का सही इलाज क्या है?#1. निगरानी - छोटे सिस्ट 6 से 8 हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। डॉ. अल्ट्रासाउंड के जरिये से निगरानी करते हैं। #2. दर्द कण्ट्रोल - डॉ.दर्द कम करने के लिए दर्द निवारक के दवाइयाँ दे सकते हैं, सूजन कम करने में भी मदद करती हैं। #3.ऑपरेशन - अगर सिस्ट बड़ा हो जाए, तो, बार-बार फटने का जोखिम हो तो सर्जरी की जरूरत हो सकती है। सामान्यतः laparoscopy के जरिये से सिस्ट को हटाया जाता है।५) Hemorrhagic Cyst के लिए सही डाइट प्लान क्या है?- सही डाइट से हार्मोन संतुलन , सूजन कम करने में मदद करती है। #1. आयरन वाले खाद्य पदार्थ - पालक , चुकंदर, अनार, गुड़ , हरी पत्तेदार सब्जि #2. फाइबर फ़ूड - फाइबर हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में ज्यादा मदद करता है। - ब्राउन राइस, साबुत अनाज, फल #3. प्रोटीन से मिलने वाला - दाल, पनीर, अंडे, सोया, दही६) Hemorrhagic cyst में किन चीजों से बचें?- बहुत ज्यादा चीनी - ज्यादा जंक फूड का सेवन - ज्यादा मसालेदार खाना - ज्यादा चाय, कॉफ़ी। - शराब तथा ध्रूमपान #जीवनशैली में परिवर्तन - डाइट के साथ में जीवनशैली में सुधार भी जरूरी हैं। #1 . नियमित एक्सरसाइज करने से हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं। #2. तनाव को कम करें। तथा सुबह टहलना। #3. पर्याप्त नींद को ले. शरीर के हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करती है। #4. पेट दर्द या तो, अनियमित पीरियड्स होते हैं , तो समय पर अल्ट्रासाउंड से जांच करवाना जरूरी है।
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Gastroenteritis diet plan in hindi | गैस्ट्राइटिस में क्या खाना चाहिए? | brahm homeo
१) गैस्ट्रोएंटेराइटिस क्या है? इसका सही इलाज क्या है?गैस्ट्रोएंटेराइटिस आम पर परेशान करने वाली बीमारी है, जिस में पेट तथा आंतों में सूजन हो जाती है। इसे पेट का इन्फेक्शन भी कहते है।- यह बीमारी वायरस, बैक्टीरिया, ख़राब भोजन ,पानी के कारण से होती है। इस स्थिति में व्यक्ति को दस्त , उल्टी, पेट में दर्द, बुखार,जैसी समस्याएं हो सकती हैं।- सही समय पर इलाज तथा देखभाल से कुछ दिनों में ठीक हो जाती है।२) गैस्ट्रोएंटेराइटिस होने के क्या मुख्य कारण होते है?- गैस्ट्रोएंटेराइटिस कई कारण से हो सकता है, जैसे की, 1. वायरल वाले संक्रमण :: जैसे की,नोरोवायरस तथा रोटावायरस। 2. बैक्टीरियल संक्रमण ::जैसे की, साल्मोनेला। 3. ख़राब भोजन के सेवन से 4. खराब स्वच्छता से 5. यह बीमारी संक्रमित भोजन, किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैलती है।३) गैस्ट्रोएंटेराइटिस होने के क्या लक्षण हो सकते है?- गैस्ट्रोएंटेराइटिस के लक्षण अचानक से ही शुरू हो सकते हैं. 1 से 2 दिनों तक रह सकते हैं। - बार-बार दस्त का लगना। - पेट में मरोड़ का होना - तेज बुखार का आना - कमजोरी तथा थकान जैसा लगना - भूख भी कम लगना मरीज को बार-बार से उल्टी , दस्त हो रहे हों, तो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स कमी होने का खतरा बढ़ जाता है।४) गैस्ट्रोएंटेराइटिस का इलाज?#1. उचित तरल पदार्थ को लेना - इस बीमारी से शरीर में पानी की कमी को पूरा करना है। पेशेंट्स को बार-बार से तरल पदार्थ दिए जाने चाहिए जैसे: की, - ORS , नारियल पानी, सादा पानी। #2. हल्का तथा सुपाच्य भोजन - पेट को आराम देने के लिए हल्का भोजन ही करना चाहिए, जैसे: की, - खिचड़ी, दलिया, दही, टोस्ट या ब्रेड # 3. पर्याप्त आराम करना - बीमारी के दौरान शरीर को आराम देना जरुरी है.इसलिए मरीज को नींद लेनी चाहिए। #4. दवा का उपयोग डॉ. मरीज के स्थिति को देखकर ही कुछ दवा दे सकते हैं, जैसे: की, - उल्टी को रोकने की दवा. - दस्त को कण्ट्रोल करने की दवा.५) कब डॉ. से संपर्क करना चाहिए?- निचे अनुसार लक्षण दिखाई दे तो, तुरंत डॉ. से संपर्क करना चाहिए: - 3 दिनों से ज्यादा समय तक दस्त का रहना। - बार-बार उल्टी का होना। - मल में से खून का आना. - शरीर में कमजोरी का हो जाना#गैस्ट्रोएंटेराइटिस से बचाव के लिए चाहिए?इस बीमारी के लिए सावधानियां बहुत जरूरी हैं. - हमेशा ताजा भोजन ही करें।- भोजन से पहले और बाद में अच्छे से हाथ को धोएं।
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haemorrhagic cyst treatment in Hindi | haemorrhagic cyst को दूर होने में कितना समय लगता है?
१) Hemorrhagic Cyst का सही इलाज क्या है?Hemorrhagic Ovarian Cyst एक तरह की ओवेरियन सिस्ट है, जो जब बनती है जब अंडाशय में बनने वाली सामान्य सिस्ट के अंदर रक्तस्राव हो जाता है।- यह समस्या अधिकतर प्रजनन आयु की महिलाओं में देखने को मिलती है। कई बार यह सिस्ट अपने-आप से ही ठीक होती है, पर कुछ मामलों में दर्द, सूजन, जटिलताएँ पैदा कर सकती है।२) Hemorrhagic Cyst क्या है?- महिला के अंडाशय में हर महीने अंडा बनने के प्रक्रिया के दौरान छोटी सिस्ट बनती हैं। परिस्थितियों में ये सिस्ट कुछ समय बाद अपने-आप ही खत्म हो जाती हैं।- पर जब किसी सिस्ट के अंदर रक्तस्राव हो जाता है, तो वह Hemorrhagic Cyst बन जाती है।- यह सिस्ट आकार में बड़ी हो सकती है , कभी-कभी दर्द भी पैदा कर सकती है। कुछ मामलों में यह सिस्ट २-६ सप्ताह के अंदर खुद ही ख़त्म हो जाती है, पर कुछ स्थितियों में इलाज भी जरूरी हो सकता है।३) Hemorrhagic Cyst के क्या मुख्य लक्षण होते है?- हर महिला में लक्षण अलग हो सकते हैं। पर कई बार तो, कोई लक्षण दिखाई नहीं देता। पर ये लक्षण देखे जा सकते हैं, जैसे की,- पेट के निचले वाले भाग में अचानक से दर्द का होना - एक ही तरफ बार -बार ज्यादा दर्द का होना - Periods के दौरान ज्यादा दर्द का होना - पेट में भारीपन जैसा महसूस होना। - चक्कर का आ जाना। यदि सिस्ट फट जाए तो दर्द तेज हो सकता है तुरंत ही डॉ. से संपर्क करना चाहिए।४) Hemorrhagic Cyst की जांच कैसे की जाती है?इस बीमारी को पहचान के लिए डॉ. कुछ जांच करवाते हैं, जैसे की, #1. Ultrasound- सबसे महत्वपूर्ण जांच है। इस से सिस्ट का साइज , प्रकार और स्थिति क्लीन दिखाई देती है। # 2. CT Scan या तो, MRI - यदि सिस्ट जटिल दिखाई दे रही हो तो डॉ. CT Scan या तो, MRI करवा सकते है. #3. Blood Test - कभी कभी संक्रमण को समझने के लिए रक्त के भी जांच भी करवाई जाती है।५) Hemorrhagic Cyst का सही इलाज क्या होता है?- Hemorrhagic cyst लक्षण और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। जैसे की, #1. निगरानी - ज्यादातर मामलों में डॉ. कोई बड़ा इलाज नहीं करते। वे मरीज को ४-५ सप्ताह तक निगरानी में रखते हैं, क्योंकि कई बार सिस्ट अपने-आप ही ठीक हो जाती हैं। इस दौरान डॉ. दर्द कम करने की दवाएं को देते हैं. कुछ समय बाद दोबारा भी अल्ट्रासाउंड करवाते हैं - सिस्ट छोटी हो तो, और लक्षण कम हों, तो सामान्य उपचार होता है। #2. दवा से इलाज - अगर सिस्ट बार-बार बन रही हो, तो डॉ. कुछ दवाइयां दे सकते हैं: दर्द को कम करने की दवाएं। - दवा नई सिस्ट बनने को कम कर सकती हैं।६ ) Hemorrhagic Cyst में क्या सावधानियाँ रखना जरूरी है?यदि महिला को यह समस्या है , तो कुछ बातों का ध्यान देना जरूरी है, जैसे की, - ज्यादा वजन उठाने वाले समान से बचें। - नियमित डॉ. से जांच कराएं। - समय पर अल्ट्रासाउंड की जाँच करवाएं। - संतुलित तथा पौष्टिक आहार को भी लें.
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Chronic pancreatitis ka ilaj | Treatment for pancreatitis | chronic pancreatitis
1) Chronic Calcific Pancreatitis क्या है?Chronic Calcific Pancreatitis गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, जिस में पैंक्रियास में लगातार सूजन बनी रहती है। समय के साथ-साथ पैंक्रियास के अंदर कैल्शियम के छोटे जमाव बनने लगते हैं, जिस से पैंक्रियास की सामान्य कार्य क्षमता को प्रभावित हो जाती है।- पैंक्रियास शरीर में दो महत्वपूर्ण काम करता है, जैसे की, - भोजन को पचाने के लिए एंजाइम को बनाना।- शरीर में शुगर को कण्ट्रोल करने के लिए इंसुलिन को बनाना।जब यह बीमारी बढ़ती है तो, पाचन के प्रक्रिया तथा इंसुलिन को बनने के क्षमता दोनों को असर हो सकती हैं। यदि समय पर सही इलाज नहीं हो तो, यह बीमारी धीरे से गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।2) Chronic Calcific Pancreatitis होने के क्या लक्षण हो सकते है?# 1. पेट के ऊपरी भाग में दर्द का होना - कई बार दर्द पीठ तक फैल सकता है। भोजन करने के बाद भी दर्द बढ़ सकता है। # 2. पाचन से जुड़ी ही समस्याएँ - पैंक्रियास भोजन पचाने वाले एंजाइम को बनाता है। यदि सही से काम नहीं करता तो कई पाचन के समस्याएँ होती है. - पेट का फूल जाना - पेट में गैस का बनना #3. वजन का घट जाना तथा कमजोरी , थकान महसूस होता है. # 4. मधुमेह का खतरा पैंक्रियास को नुकसान होने पर इंसुलिन का उत्पादन कम होता है, जिस से मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। - अधिक प्यास का लगना। - पेशाब करने जाना बार बार - थकान जैसा महसूस होना 3) Chronic Calcific Pancreatitis में क्या -क्या खाना चाहिए?#खाने लायक चीजे# - कम चर्बी वाला भोजन। - उबली हुयी या तो,पकी सब्जियाँ , ताजे फल - प्रोटीन वाले भोजन जैसे की, दाल , मछली, मूंग दाल. #किन चीजों से दुरी रहना चाहिए. - ज्यादा तली-भुनी , तथा मसालेदार चीजें। - ज्यादा फास्ट फूड का सेवन - शराब तथा ध्रूमपान का सेवन नहीं करना चाहिए। 4) Chronic Calcific Pancreatitis के क्या कारण हो सकते है?- 1. ज्यादा लंबे समय तक शराब का सेवन से पैंक्रियास को हानि पहुँच सकता है। - 2. आनुवंशिक कारण परिवार में चलने वाले कारणों से भी हो सकती है। - 3. यदि व्यक्ति को बार-बार एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होता है, समय के साथ में वो Chronic Calcific Pancreatitis में बदल सकता है। -4. पैंक्रियास की नली में रुकावट से भी बीमारी हो सकती है। - 5. कुपोषण की कमी भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकती है।
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Hemorrhagic cyst diet plan in hindi | hemorrhagic cyst me kya khana chahiye | brahm homeopathy
१) Hemorrhagic Cyst का इलाज तथा डाइट प्लान?- Hemorrhagic cyst एक तरह के ओवेरियन सिस्ट होता है, जिस में सिस्ट के अंदर खून भर जाते है। महिलाओं के अंडाशय में बनने वाला फंक्शनल सिस्ट होता है।- कुछ मामलों में अपने-आप ठीक भी हो जाता है, पर अगर दर्द, सूजन बढ़ जाएँ तो इलाज की जरूरत होती है।२) Hemorrhagic Cyst क्या है?- Hemorrhagic Ovarian Cyst जब ओवरी में बनने वाला नार्मल सिस्ट अंदर से फट जाता है, उसमें खून भर जाता है। अधिकतर प्रजनन आयु के महिलाओं में देखा जाता है।३) Hemorrhagic Cyst के क्या-क्या लक्षण दिखाई देते है?- हर महिला में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। सामान्य लक्षण इस तरह से है, - पेट के निचे वाले भाग में दर्द का होना - अचानक से तेज ऐंठन होना - मासिक धर्म में अनियमित होना - पेट में भारीपन जैसा लगना - सैक्स के दौरान ज्यादा दर्द का होना अगर सिस्ट बड़ा हो जाए या तो, फट जाए तो गंभीर दर्द तथा आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। इस स्थिति में डॉ. से संपर्क करना जरूरी है।४) Hemorrhagic Cyst का सही इलाज क्या है?#1. निगरानी - छोटे सिस्ट 6 से 8 हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। डॉ. अल्ट्रासाउंड के जरिये से निगरानी करते हैं। #2. दर्द कण्ट्रोल - डॉ.दर्द कम करने के लिए दर्द निवारक के दवाइयाँ दे सकते हैं, सूजन कम करने में भी मदद करती हैं। #3.ऑपरेशन - अगर सिस्ट बड़ा हो जाए, तो, बार-बार फटने का जोखिम हो तो सर्जरी की जरूरत हो सकती है। सामान्यतः laparoscopy के जरिये से सिस्ट को हटाया जाता है।५) Hemorrhagic Cyst के लिए सही डाइट प्लान क्या है?- सही डाइट से हार्मोन संतुलन , सूजन कम करने में मदद करती है। #1. आयरन वाले खाद्य पदार्थ - पालक , चुकंदर, अनार, गुड़ , हरी पत्तेदार सब्जि #2. फाइबर फ़ूड - फाइबर हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में ज्यादा मदद करता है। - ब्राउन राइस, साबुत अनाज, फल #3. प्रोटीन से मिलने वाला - दाल, पनीर, अंडे, सोया, दही६) Hemorrhagic cyst में किन चीजों से बचें?- बहुत ज्यादा चीनी - ज्यादा जंक फूड का सेवन - ज्यादा मसालेदार खाना - ज्यादा चाय, कॉफ़ी। - शराब तथा ध्रूमपान #जीवनशैली में परिवर्तन - डाइट के साथ में जीवनशैली में सुधार भी जरूरी हैं। #1 . नियमित एक्सरसाइज करने से हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं। #2. तनाव को कम करें। तथा सुबह टहलना। #3. पर्याप्त नींद को ले. शरीर के हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करती है। #4. पेट दर्द या तो, अनियमित पीरियड्स होते हैं , तो समय पर अल्ट्रासाउंड से जांच करवाना जरूरी है।
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Crohn's disease me kya khana chahiye? | Crohn's disease diet plan in Hindi
१) Crohn’s Disease का इलाज और डाइट प्लान?Crohn’s Disease तरह का Inflammatory Bowel Disease है, जो आप के पाचन तंत्र को असर करता है। यह किसी भी हिस्से में होता है. मुँह से लेकर गुदा तक और आमतौर पर आंतों के दीवार में सूजन तथा घाव पैदा करता है।- यह जानलेवा नहीं होता है, पर इसका असर जीवन के गुणवत्ता पर गहरा पड़ता है।२) Crohn’s Disease होने के क्या लक्षण होते है?Crohn’s Disease के लक्षण अलग -अलग लोगों में अलग ही होते हैं। आम लक्षणों में शामिल हैं, - बार-बार दस्त का लगना - पेट में दर्द का होना तथा ऐंठन का होना - थकान तथा कमजोरी जैसा लगना - वज़न का कम हो जाना - भूख भी कम लगना कभी-कभी सूजन शरीर के कुछ हिस्सों में जैसे की, आंख, जोड़ों पर भी दिखाई दे सकती है।३) Crohn’s Disease का सही इलाज क्या है?- इसका स्थायी इलाज अभी तक नहीं मिला है, पर इसके लक्षणों को कण्ट्रोल किया जा सकता है। इलाज आमतौर पर तीन तरीके से करते है, #1. दवा मैन रोल को निभाती हैं। जिस से सूजन कम हो जिस से लक्षणों को कण्ट्रोल कर सकते है. - ध्यान दें : दवा को हमेशा ही डॉ. के निगरानी में ही लें। # 2. सर्जरी - कुछ मामलों में जब दवा असर नहीं करतीं है, या तो,आंत में घाव, बन जाते हैं, तो सर्जरी की जरुरत पड़ सकती है। - सर्जरी में भी प्रभावित हिस्से को हटा देते है। यह पुरे तरह से ठीक नहीं करती, पर लक्षणों को कम करने में मदद करते है। #3. जीवनशैली तथा सपोर्टिव केयर - इस बीमारी में दर्दी को जीवनशैली में परिवर्तन की जरूरत होती है। - तनाव को कम करने के लिए डेली योग करे. - धूम्रपान इस बीमारी को बढ़ा सकता है। - नियमित डॉ. के निगरानी में इलाज को किया जा सकता है. ४) Crohn’s Disease के सही डाइट प्लान क्या है?Crohn’s Disease में सही सही डाइट प्लान लेने से लक्षणों को कम किया जा सकता है. पोषण की कमी को पूरा किया जा सकता है। #1 क्या नहीं खाये# - कठिन पचने वाले खाद्य पदार्थ जैसे की, साबुत अनाज, बीन्स, कच्चे फल और सब्जियाँ। - अत्यधिक तैलीय तथा मसालेदार भोजन न करे। - ज्यादा मसालेदार भोजन भी पेट में जलन को बढ़ाते हैं। - डेरी खाद्य पदार्थ जिसमे दूध, पनीर से बचें। - शराब से दस्त तथा सूजन बढ़ा सकते हैं। तो नहीं लेना चाहिए। #2. क्या खाने में शामिल करें# - लीन प्रोटीन :: चिकन, मछली, अंडे। - पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ। - छोटे-छोटे मात्रा में भोजन दिन में ३-४ बार लें। - खाने को अच्छे से चबाकर के खाये।
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बच्चों में पैंक्रियाटाइटिस का इलाज | Pancreatitis child symptoms | pancreatitis problems in child
१)बच्चों में एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस का क्या इलाज है?एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस ऐसी बीमारी है, जिस में अग्न्याशय में अचानक से सूजन हो जाती है। शरीर में अग्न्याशय पेट के अंदर स्थित महत्वपूर्ण अंग है, जो पाचन एंजाइम तथा इंसुलिन जैसे हार्मोन को बनाता है। - जब सूजन हो जाती है, तो बच्चे को तेज पेट में दर्द, उल्टी तथा बुखार जैसी समस्याएँ लगती हैं। बच्चों में बीमारी कम पाई जाती है, जब होती है तो सही समय पर इलाज जरूरी होता है। २) बच्चों में एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस के क्या कारण है?बच्चों में एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस के कई कारणों से हो सकता है, जैसे की, 1.) पेट में चोट लग जाना 2.) कुछ दवा का साइड इफेक्ट 3.) वायरस या तो,संक्रमण 4). पित्त के थैली के प्रॉब्लम 5.) जन्मजात से ही समस्या ३) बच्चों में एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस होने के क्या लक्षण दिखाई दे सकते हैं?एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस होने निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं, - पेट के ऊपरी वाले भाग में तेज दर्द का होना - उल्टी तथा जी का मिचलाना - पेट का फूल जाना - भूख भी कम लगना ४) एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस के जांच कैसे की जाती है?डॉ. बीमारी का पता के लिए कुछ जांच करवाते हैं, 1. Blood Test :: अमाइलेज तथा लाइपेज एंजाइम के जांच 2. Ultrasound :: अग्न्याशय के सूजन को देखने के लिए. 3. CT Scan , MRI. इन जांच से डॉ. बीमारी के गंभीरता का पता लगाते हैं. ५) बच्चों में एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस का सही इलाज क्या है?#1. अस्पताल में एडमिट- ज्यादातर बच्चों के इलाज अस्पताल में एडमिट करना पड़ता है, ताकि डॉ. स्थिति पर लगातार नजर रख सकें। #2. दर्द का इलाज - एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस पेट में दर्द बहुत तेज होता है। डॉ.दर्द को कम करने के लिए दवा देते हैं। #3. पानी की कमी को दूर करना - बीमारी में उल्टी तथा भूख कम होने से शरीर में पानी के कमी है। इसलिए बच्चे को IV Fluids दी जाती है। #4.कुछ समय तक खाना नहीं दिया जाता है। # 5. बच्चा लंबे समय तक खाना को नहीं खा रहा है तो ,डॉ. ट्यूब के माध्यम से पोषण दे सकते हैं। # 6. संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक दवा को देते हैं।६) एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस के संभावित जटिलता क्या है?अगर समय पर इलाज नहीं किया तो कुछ जटिलताएँ होती हैं, - पाचन के समस्या का होना - मधुमेह का खतरा - बार-बार पैन्क्रियाटाइटिस का होना सही इलाज तथा देखभाल से बच्चे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
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Osteoporosis kya hota hai in hindi | हड्डियों की कमजोरी क्या है।| Osteoporosis - Symptoms, Causes
१)हड्डियों की कमजोरी का इलाज?हड्डियाँ शरीर के आधार होते हैं। शरीर को सहारा देती हैं तथा अंगों के रक्षा भी करती हैं. जब हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं तो, शरीर में दर्द, थकान, तथा फ्रैक्चर होना जैसी समस्याएँ होने लगती हैं।- आजकल के समय में गलत खान-पान, धूप के कमी , तथा बैठने वाली जीवनशैली के कारण से हड्डियों भी कमजोर होते जा रहे है।२) हड्डियों के कमजोरी क्या है?- जब भी हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, तथा उनमें मजबूती नहीं रहती, है तब उसे हड्डियों के कमजोरी कहते है।मेडिकल भाषा में इसे Osteoporosis भी कहा जाता है।३) हड्डियों के कमजोर होने के मुख्य कारण क्या है?- हड्डियों के कमजोरी कई अलग कारणों से हो सकती है। कुछ कारण इस प्रकार हैं, 1. कैल्शियम की कमी - कैल्शियम ही हड्डियों का तत्व है। शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाए तो हड्डियाँ भी धीरे से कमजोर होने लगती हैं। 2. विटामिन D की कमी - विटामिन D शरीर के कमी से भी हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं। 3. धूप की कमी - लोग ज्यादातर समय घर , ऑफिस में बिताते हैं, जिस से शरीर में धूप नहीं मिलती है। 4. गलत खान-पान - जंक फूड तथा पोषण के कमी वाली डाइट से भी हड्डियों कमजोर बना सकती है। 5. बढ़ती उम्र- उम्र बढ़ने के साथ में हड्डियों का घनत्व भी कम होने लगता है, महिलाओं में। ४) हड्डियों के कमजोर होने के क्या लक्षण होते है?- हड्डियों के कमजोर होने के लक्षण निचे अनुसार है, - जोड़ों तथा हड्डियों में दर्द का होना - कमर में दर्द का होना - जल्दी थकान होने लग जाता है.- चोट लगने से भी फ्रैक्चर हो .जाता है.५) हड्डियों के कमजोरी का सही इलाज क्या है?हड्डियों के कमजोरी का इलाज सही तरह का खान-पान, कसरत तथा जीवनशैली में सुधार से संभव है। #1. कैल्शियम से मिलने वाले आहार लें - हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम बहुत ही जरूरी है। जैसे की, - दूध तथा दही - पनीर - बादाम खाद्य पदार्थ को खाने से भी हड्डि मजबूत बनाने में मदद करते हैं। #2. विटामिन D प्राप्त करें -विटामिन D के लिए डेली सुबह 10 से 20 मिनट धूप में बैठना अच्छा होता हैं: - अंडे, मशरूम, मछली #3. नियमित कसरत करने से भी हड्डियाँ मजबूत होती हैं. #4. अच्छे जीवनशैली - धूम्रपान ,शराब से हमेंशा बचें। - सही मात्रा में नींद लें - टेंशन नहीं ले.५) घरेलू उपाय क्या हो सकते है?/कुछ घरेलू उपाय को भी किया जा सकता है.जैसे की, - रोज १ गिलास दूध को पियें। - बादाम को भिगोकर खाएँ।
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Ulcerative colitis kya hai? | अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन रोग में क्या अंतर है?
१) अल्सरेटिव कोलाइटिस का क्या उपचार है?अल्सरेटिव कोलाइटिस गंभीर आंतों के बीमारी है, जिस में बड़ी आंत तथा रेक्टम के अंदरू पर्त में सूजन तथा घाव बन जाते हैं।- यह बीमारी लंबे समय तक रहने वाली होती है. इसमें पेट में दर्द, बार-बार दस्त, खून के साथ मल का आना, कमजोरी का होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सही समय पर तथा जीवन-शैली में सुधार कर के कण्ट्रोल कर सकते है.२) अल्सरेटिव कोलाइटिस के उपचार का उद्देश्य क्या है?इस बीमारी के इलाज का उद्देश्य तीन चीजें हैं: जो के इस तरह से है, (1) आंतों के सूजन को कम करना। (2) लक्षणों को कण्ट्रोल करना। (3) इस बीमारी को दोबारा बढ़ने से रोकना। इलाज दर्दी के स्थिति, बीमारी के गंभीरता , रोग के फैलाव के अनुसार अलग-अलग होता है. #1. दवा के द्वारा उपचार (1) एंटी-इन्फ्लेमेटरी के दवा यह आंतों के सूजन को कम करती हैं, तथा बीमारी को कण्ट्रोल रखने में मदद करते हैं। (2) स्टेरॉयड के दवा - जब भी सूजन ज्यादा हो जाती है, तब डॉ. दवा जल्दी असर करते हैं, पर लंबे समय तक उपयोग से साइड-इफेक्ट होता हैं. (3) इम्यून सिस्टम को कण्ट्रोल करने के दवा - कुछ दर्दी में इम्यून सिस्टम आंतों पर हमला करता है। ऐसे में इम्यूनोसप्रेसिव दवा दी जाती हैं। नियंत्रित करके सूजन कम भी करती हैं।2.आहार तथा जीवन-शैली में परिवर्तन - मरीजों के सही डाइट का लेना बहुत ही जरुरी है। #खाने में क्या लें# - हल्का तथा सुपाच्य वाला भोजन। - उबली हुयी सब्जि। - खिचड़ी तथा चावल - पर्याप्त पानी को पीना # किन चीजों से दूर रहे# - ज्यादा तला हुआ भोजन। - जंक फूड - चाय ,कॉफ़ी। छोटे-छोटे अंतर पर कई बार लेना फायदेमंद होता है। 3. तनाव पर कण्ट्रोल - मानसिक तनाव कम करने के लिए डेली योग करे. तथा पर्याप्त नींद ले. 4. होम्योपैथिक का दृष्टिकोण - कुछ दर्दी होम्योपैथिक से उपचार अपनाते हैं, जिस में दर्दी के पूरे लक्षणोंके आधार पर दवा दी जाती है। - कोई भी उपचार को करने से पहले डॉ. की सलाह लेना जरूरी है। 5. नियमित जांच तथा फॉलो-अप - यह दीर्घकालिक बीमारी है, दर्दी को डेली रूप से डॉ. से जांच कराते रहना चा
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Acute interstitial edematous Pancreatitis best treatment in homeopathy | sign symptom | अग्नाशयशोथ
१)पैंक्रियाटाइटिस क्या है? क्या यह सामान्य हो सकता है?पैंक्रियाटाइटिस एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसमें अग्न्याशय में सूजन आ जाती है। अग्न्याशय पेट के पीछे स्थित एक महत्वपूर्ण अंग है जो हमारे शरीर में पाचन एंजाइम और इंसुलिन जैसे हार्मोन बनाने का काम करता है।जब किसी कारण से पाचन एंजाइम समय से पहले ही सक्रिय हो जाते हैं, तो वे भोजन को पचाने के बजाय अग्न्याशय के ऊतकों को ही नुकसान पहुंचाने लगते हैं। इस स्थिति को ही पैंक्रियाटाइटिस कहा जाता है।२)क्या पैंक्रियाटाइटिस अपने आप ठीक हो सकता है?यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी कितनी गंभीर है। कुछ मामलों में हल्का पैंक्रियाटाइटिस सही इलाज, आराम और डॉक्टर की निगरानी से पूरी तरह ठीक हो सकता है। लेकिन यदि बीमारी गंभीर हो जाए तो अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करवाना आवश्यक हो सकता है।#1. तीव्र पैंक्रियाटाइटिस(Acute Pancreatitis)- यह अचानक शुरू होने वाली स्थिति होती है। - कई बार यह कुछ दिनों के इलाज से ठीक भी हो सकता है। - समय पर इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।#2. दीर्घकालिक पैंक्रियाटाइटिस(Chronic Pancreatitis)- यह लंबे समय तक रहने वाली समस्या होती है। - इसमें अग्न्याशय धीरे-धीरे कमजोर और क्षतिग्रस्त होने लगता है। - यदि समय पर उपचार न किया जाए तो स्थायी नुकसान हो सकता है।३) क्या पैंक्रियाटाइटिस सामान्य बीमारी है?अगर बात तीव्र पैंक्रियाटाइटिस की करें तो कई मामलों में सही इलाज और आराम से सामान्य स्थिति में आ सकता है। - अस्पताल में मरीज को कुछ दिनों तक दवाइयाँ, तरल पदार्थ और हल्का भोजन दिया जाता है, जिससे उसकी स्थिति में सुधार होता है। लेकिन इसे बिल्कुल साधारण बीमारी समझना भी सही नहीं है क्योंकि। - यह अचानक गंभीर रूप ले सकता है. - किडनी और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ सकता है. इसीलिए पैंक्रियाटाइटिस को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। ४) पैंक्रियाटाइटिस होने के प्रमुख कारण?यह बीमारी कई कारणों से हो सकती है, जैसे: की, - पित्ताशय की पथरी (Gallstones), अत्यधिक शराब का सेवन, खून में ट्राइग्लिसराइड का अधिक स्तर, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट, पारिवारिक कारण ५) पैंक्रियाटाइटिस के लक्षण?इस बीमारी में कई प्रकार के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे: की, - पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द , दर्द का पीठ तक फैलना, मतली और उल्टी, पेट में सूजन या भारीपन, भूख कम लगना - अगर किसी व्यक्ति को बहुत तेज दर्द या लगातार उल्टी हो रही हो तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।५) पैंक्रियाटाइटिस का इलाज और रिकवरी?- इलाज मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है। सामान्यत: - कुछ समय तक ठोस भोजन बंद किया जाता है. - शरीर में तरल की कमी पूरी करने के लिए IV फ्लूड दिया जाता है.#कारण के अनुसार उपचार#यदि बीमारी का कारण पित्त की पथरी या कोई अन्य समस्या है, तो उसका भी इलाज किया जाता है। आमतौर पर हल्के मामलों में मरीज 3 से 7 दिनों में ठीक हो सकता है।लेकिन यदि सूजन बहुत अधिक हो जाए, ऊतक नष्ट होने लगें या संक्रमण फैल जाए तो ICU में इलाज की आवश्यकता पड़ सकती है।६) क्या पैंक्रियाटाइटिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?तीव्र पैंक्रियाटाइटिस के कई मामलों में सही इलाज और समय पर देखभाल से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। लेकिन दीर्घकालिक पैंक्रियाटाइटिस में बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, पूरी तरह समाप्त करना हमेशा संभव नहीं होता। ७) पैंक्रियाटाइटिस से बचाव कैसे करें?इस बीमारी से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ अपनानी चाहिए: - शराब का सेवन पूरी तरह बंद करें। - कम वसा (Low Fat) वाला संतुलित आहार लें.erte
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महिलाओं में हृदय रोग के लक्षण |हार्ट के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?| Heart attack in women symptoms
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GERD होने के प्रमुख कारण | गर्ड के क्या लक्षण हैं? | gerd kya hota hai | gerd kaise hota hai
GERD होने के प्रमुख कारण | गर्ड के क्या लक्षण हैं? | gerd kya hota hai | gerd kaise hota haiGERD क्या होता है?GERD (Gastroesophageal Reflux Disease) एक पाचन संबंधी बीमारी है जिसमें पेट का एसिड बार-बार भोजन नली (esophagus) में वापस आ जाता है। इससे जलन, दर्द और गले तक खट्टा पानी आने जैसी समस्या होती है। सामान्य एसिडिटी कभी-कभी होती है, लेकिन जब यह बार-बार और लंबे समय तक हो, तो उसे GERD कहा जाता है।GERD होने के प्रमुख कारणलोअर एसोफेजियल स्फिंक्टर (LES) की कमजोरी – यह वाल्व ठीक से बंद नहीं होता।अधिक तला-भुना या मसालेदार खानामोटापाधूम्रपान और शराबज्यादा खाना या देर रात खानाप्रेग्नेंसी (पेट पर दबाव बढ़ने से)कुछ दवाइयाँ जैसे पेनकिलर या कुछ हार्ट/ब्लड प्रेशर दवाएँGERD के लक्षणसीने में जलन (Heartburn)खट्टा डकार या मुँह में एसिड आनागले में जलन या खराशनिगलने में कठिनाईलगातार खाँसीछाती में दर्द (कभी-कभी हार्ट अटैक जैसा महसूस हो सकता है)
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PANCREATITIS TREAETMENTSWHAT IS PANCREATITIS?Pancreatitis is a condition characterized by inflammation of the pancreas, a gland responsible for digestion and blood sugar regulation. There are two main types: acute and chronic. Acute pancreatitis, often severe but usually resolved with medical treatment, can be caused by factors like gallstones, alcohol consumption, infections, trauma, or high triglycerides. Symptoms include abdominal pain, nausea, vomiting, fever, rapid pulse, and tender abdomen. Chronic pancreatitis, on the other hand, is a long-term inflammation that can cause permanent
HOSTED BY
Brahm Homeopathy | Dr Pradeep kushwaha
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